पाकिस्तान के परमाणु गढ़ चाघाई में बलूच विद्रोहियों का बड़ा हमला, भीषण मुठभेड़ में 20 सैनिक ढेर बलूच लिबरेशन आर्मी ने चाघाई जिले में पाकिस्तानी सेना के काफिले पर घात लगाकर हमला किया, जिसमें एक कैप्टन समेत 20 सैन्यकर्मी मारे गए और कई वाहन तबाह हो गए। बलूचिस्तान के सामरिक रूप से बेहद संवेदनशील और परमाणु गतिविधियों के लिए मशहूर चाघाई जिले में बलूच विद्रोहियों ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। बलूच लिबरेशन आर्मी ने आधिकारिक तौर पर यह दावा किया है कि चाघाई के दश्त गोरान क्षेत्र में हुई एक लंबी और खूनी मुठभेड़ के दौरान पाकिस्तानी सेना के एक कैप्टन समेत कुल 20 जवान मारे गए हैं। इस हिंसक झड़प में संगठन के अपने दो लड़ाकों के भी मारे जाने की पुष्टि की गई है, जिन्हें संगठन ने देश और समाज के लिए अपनी जान कुर्बान करने वाले शहीद का दर्जा दिया है। यह पूरी सैन्य कार्रवाई क्षेत्र में बढ़ते तनाव और बलूच संगठनों द्वारा पाकिस्तानी सेना के खिलाफ छेड़े गए सशस्त्र अभियानों की कड़ी का एक बड़ा हिस्सा मानी जा रही है। दश्त गोरान में नाकाबंदी और अचानक घेराबंदी बलूच लिबरेशन आर्मी के प्रवक्ता आजाद बलूच द्वारा जारी किए गए आधिकारिक विवरण के मुताबिक, यह पूरी घटना 31 अगस्त की शाम को शुरू हुई थी। संगठन के सशस्त्र लड़ाकों ने शाम करीब 6 बजे दश्त गोरान के नादिराबाद इलाके में रणनीतिक रूप से नाकाबंदी कर रखी थी और एक औचक जांच अभियान चलाया हुआ था। ठीक उसी समय पाकिस्तानी सेना के आठ सैन्य वाहनों का एक भारी-भरकम काफिला वहां से गुजर रहा था। बलूच संगठन का यह भी आरोप है कि इस सैन्य काफिले के साथ कुछ स्थानीय डेथ स्क्वॉड के लोग भी चल रहे थे जो पाकिस्तानी सेना को खुफिया जानकारी और जमीनी मदद मुहैया करा रहे थे। जैसे ही काफिला इस घेरे में आया, विद्रोहियों ने अपनी योजना के तहत चारों तरफ से मोर्चा संभाल लिया और पाकिस्तानी टुकड़ियों पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। चाघाई जिले का ऐतिहासिक और सामरिक महत्व भौगोलिक और राजनीतिक दृष्टि से चाघाई जिला बलूचिस्तान का एक बेहद अहम इलाका है जो पूरी दुनिया में तब चर्चा का केंद्र बना था जब यहाँ साल 1998 में परमाणु परीक्षण किए गए थे। पाकिस्तान ने 28 मई 1998 को चाघाई की रास कोह पहाड़ियों के भीतर भूमिगत परमाणु परीक्षणों को अंजाम दिया था और इसके ठीक दो दिन बाद यानी 30 मई को एक और परीक्षण किया गया था। यही वजह है कि चाघाई का इलाका पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम और उसकी सैन्य रीढ़ से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ माना जाता है। ऐसे सामरिक और सुरक्षित समझे जाने वाले गढ़ के भीतर इस स्तर का बड़ा सशस्त्र हमला होना पाकिस्तानी सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया तंत्र की स्थिरता पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है। कब्जे में आए वाहन और अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल मुठभेड़ के दौरान बलूच लड़ाकों ने युद्ध की सुनियोजित रणनीति का पालन करते हुए पाकिस्तानी सेना के चार वाहनों को अपनी सीधी घेराबंदी में ले लिया। संगठन के अनुसार, इन वाहनों को आधुनिक हथियारों और रॉकेट लॉन्चरों से निशाना बनाया गया जिससे वे पूरी तरह चकनाचूर हो गए। इन गाड़ियों के भीतर मौजूद सभी सैनिक मौके पर ही मारे गए क्योंकि रॉकेट हमलों की तीव्रता इतनी अधिक थी कि किसी को भी वहां से बच निकलने का कोई मौका नहीं मिल सका। एक विशेष हमले में संगठन के एक लड़ाके ने रॉकेट से सीधे तौर पर पाकिस्तानी सेना के वाहन को उड़ा दिया, जिसके अवशेषों को हटाने के लिए बाद में क्रेन मंगवानी पड़ी थी। बलूच सूत्रों के हवाले से यह भी बताया गया है कि रातभर घटनास्थल के आसपास दर्जनों एंबुलेंस लगातार चक्कर काटती रहीं जो मारे गए सैनिकों के शवों को वहां से सुरक्षित ठिकानों पर ले जा रही थीं। कैप्टन उबैद समेत कई अधिकारियों की मौत का दावा इस भीषण हमले में मरने वालों में पाकिस्तानी सेना के एक कैप्टन का नाम भी शामिल है जिनकी पहचान कैप्टन उबैद के रूप में बताई गई है। बलूच लिबरेशन आर्मी का यह भी गंभीर आरोप है कि पाकिस्तानी सेना अपनी पारंपरिक नीति के तहत युद्ध के मैदान में होने वाले अपने नुकसान के असली आंकड़ों को हमेशा छिपाती आई है। संगठन का कहना है कि इस बार भी सेना ने अपने मारे गए सैनिकों, घायल जवानों और नष्ट हुए सैन्य उपकरणों की वास्तविक संख्या को सार्वजनिक नहीं किया है जबकि हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है और नुकसान बहुत भारी है। शाम को करीब 6:30 बजे शुरू हुई यह गोलीबारी और सैन्य भिड़ंत अगली सुबह 4 बजे तक रुक-रुककर चलती रही, जिसके दौरान पाकिस्तानी सेना को ड्रोन की मदद भी लेनी पड़ी लेकिन इसके बावजूद वे बलूच लड़ाकों के हमलों को रोक पाने में नाकाम रहे। संगठन के दो लड़ाकों की शहादत इस खूनी संघर्ष के दौरान बलूच लिबरेशन आर्मी ने अपने दो समर्पित और अनुभवी लड़ाकों के हताहत होने की भी जानकारी सार्वजनिक की है। संगठन के अनुसार, संगत नासिर उर्फ बाबा और संगत बशीर उर्फ शौकत ने इस पूरी लड़ाई में अपनी बहादुरी का परिचय देते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया है। संगत नासिर मंगुचर इलाके के रहने वाले थे जो साल 2014 में इस सशस्त्र संगठन से जुड़े थे और उनके पास पिछले 12 सालों का लंबा युद्ध का अनुभव था। उन्होंने अपने संघर्ष के दौरान शोर परोद, नागाहो, चाघाई और दल्बंदिन जैसे तमाम महत्वपूर्ण इलाकों में कई निर्णायक लड़ाइयों का नेतृत्व किया था और वे रणनीतिक रूप से बेहद कुशल माने जाते थे। बशीर का सफर और बलूच युवाओं के लिए प्रेरणा दूसरे मृत लड़ाके संगत बशीर उर्फ शौकत का संबंध कलात जिले के गज़ग क्षेत्र से था जिन्होंने साल 2015 में इस संगठन के माध्यम से अपनी सक्रिय भूमिका निभानी शुरू की थी। बशीर ने बलूचिस्तान के नरमक, नागाहो, चाघाई, सारून और शोर परोद जैसे कई संवेदनशील क्षेत्रों में पाकिस्तानी सेना के खिलाफ अभियानों में फ्रंटलाइन पर रहकर हिस्सा लिया था। संगठन का मानना है कि बशीर की असाधारण बहादुरी, उनकी सटीक रणनीति और अपनी मातृभूमि के लिए समर्पित उनका यह बलिदान आने वाली बलूच पीढ़ियों और युवाओं के लिए हमेशा एक मजबूत मार्गदर्शक का काम करेगा। अंत में संगठन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब तक बलूचिस्तान से पाकिस्तानी सेना की पूर्ण रूप से वापसी नहीं हो जाती और बलूच जनता को उनका अधिकार नहीं मिल जाता, तब तक यह सशस्त्र संघर्ष इसी तरह पूरी ताकत के साथ जारी रहेगा। इसका आप पर असर इस बड़ी सैन्य झड़प और सुरक्षा माहौल बिगड़ने का असर इस क्षेत्र की यात्रा, दैनिक गतिविधियों और स्थानीय सुरक्षा पर सीधा पड़ेगा। - बचाव और आवाजाही: चाघाई और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बलों की आवाजाही बढ़ने से स्थानीय नागरिकों की सामान्य आवाजाही प्रभावित हो सकती है और कड़े प्रतिबंध लग सकते हैं। - क्षेत्रीय सुरक्षा: बलूचिस्तान के संवेदनशील जिलों में हिंसक झड़पों के तेज होने से स्थानीय आबादी के बीच तनाव और सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता का माहौल गहरा गया है। सवाल-जवाब 1. यह घटना किस जिले में घटी? यह सशस्त्र झड़प बलूचिस्तान के चाघाई जिले के दश्त गोरान इलाके में हुई। 2. इस हमले में कितने पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने का दावा किया गया है? बलूच लिबरेशन आर्मी ने एक कैप्टन समेत 20 पाकिस्तानी सैन्यकर्मियों के मारे जाने का दावा किया है। 3. यह मुठभेड़ कितने समय तक चली? यह लड़ाई 31 अगस्त की शाम करीब 6:30 बजे से शुरू होकर अगली सुबह 4 बजे तक रुक-रुककर चलती रही। 4. चाघाई जिला क्यों प्रसिद्ध है? चाघाई जिला 1998 में हुए परमाणु परीक्षणों के कारण दुनिया के नक्शे पर अपनी खास पहचान रखता है। 5. इस हमले में संगठन के कितने लड़ाके मारे गए? इस संघर्ष में बलूच लिबरेशन आर्मी के दो लड़ाके मारे गए जिन्हें संगठन ने शहीद बताया है। https://trendkia.com/world/pakistana-ke-paramanu-garha-chagai-men-balucha-vidrohiyon-ka-bara-hamala-bhishana-muthabhera-men-20-sainika-dhera-25859 TrendKia — Har trend, sabse pehle.