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  "type": "article",
  "title": "पांच वर्षों में बदला वैश्विक परिदृश्य: युद्धों, टैरिफ और ब्रिक्स विस्तार ने 2021 से 2026 के बीच बदला अंतरराष्ट्रीय संतुलन",
  "summary": "सितंबर 2021 में भारत द्वारा आयोजित वर्चुअल ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बाद से वैश्विक राजनीति में भारी उथल-पुथल हुई है। यूरोप और पश्चिम एशिया के युद्धों, दक्षिण एशिया में ऑपरेशन सिंदूर, अमेरिकी टैरिफ नीतियों और ब्रिक्स के ऐतिहासिक विस्तार ने 2026 तक संपूर्ण अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को नया रूप दे दिया है।",
  "content": "सितंबर 2021 में जब भारत ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी की थी, तब संपूर्ण विश्व कोरोना महामारी की चुनौतियों से जूझ रहा था। 9 सितंबर 2021 को वर्चुअल माध्यम से आयोजित उस बैठक के समय ब्रिक्स समूह में केवल पांच राष्ट्र शामिल थे, जिनमें भारत, रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका थे। उस दौर में वैश्विक मंच पर अमेरिका और चीन के मध्य बढ़ता प्रतिस्पर्धात्मक तनाव, अफगानिस्तान से अमेरिकी सैन्य बलों की वापसी और वैश्विक स्वास्थ्य संकट मुख्य बिंदु थे। हालांकि, पांच वर्षों के अंतराल के बाद जब सितंबर 2026 में भारत पुनः ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन कर रहा है, तब तक भू-राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह रूपांतरित हो चुका है। इन पांच वर्षों की समयावधि में यूरोप में भीषण सैन्य संघर्ष छिड़ा, पश्चिम एशिया में नए युद्ध मोर्चे खुले, दक्षिण एशिया में भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य टकराव हुआ, अमेरिका में व्यापार नीतियों में व्यापक बदलाव आया और ब्रिक्स संगठन का आकार एवं प्रभाव दोनों काफी बढ़ गए।\n\nयूरोप में सैन्य संघर्ष और नाटो का रणनीतिक विस्तार\n24 फरवरी 2022 को रूस द्वारा यूक्रेन के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई शुरू किए जाने के साथ ही वैश्विक सुरक्षा संरचना में गहरा संकट उत्पन्न हो गया। यह संघर्ष केवल दो पड़ोसी देशों की सीमाओं तक सीमित न रहकर शीघ्र ही रूस और पश्चिमी देशों के बीच एक वृहद भू-राजनीतिक टकराव में बदल गया। संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूस पर सख्त आर्थिक और वित्तीय प्रतिबंध लागू किए। इसके परिणामस्वरूप संपूर्ण यूरोप को गंभीर ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ा और वैश्विक बाजार में कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस, खाद्यान्न तथा उर्वरकों के दामों में तेज वृद्धि देखी गई।\n\nयूक्रेन युद्ध के प्रभाव स्वरूप उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) की भूमिका पुनः सुदृढ़ हुई। अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से फ़िनलैंड ने अप्रैल 2023 में और स्वीडन ने मार्च 2024 में आधिकारिक रूप से नाटो की सदस्यता ग्रहण की। इसी समय अंतराल में पूर्वी एशिया में भी तनाव की स्थितियां उत्पन्न हुईं। अगस्त 2022 में तत्कालीन अमेरिकी हाउस स्पीकर नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा के तुरंत बाद चीन ने ताइवान जलडमरूमध्य के आसपास व्यापक सैन्य अभ्यास आयोजित किए, जिससे वैश्विक समुदाय के सामने यूरोप में रूस-पश्चिम संघर्ष और एशिया में अमेरिका-चीन प्रतिद्वंद्विता की दोहरी सुरक्षा चुनौती स्पष्ट रूप से उभर आई।\n\nपश्चिम एशिया में बढ़ता युद्ध और लाल सागर का समुद्री संकट\nवर्ष 2023 में वैश्विक स्थिरता को नए संकटों ने घेरा। सूडान में आंतरिक गृहयुद्ध भड़कने के कुछ महीनों बाद, 7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा इज़राइल पर किए गए बड़े हमले ने गाज़ा में सैन्य कार्रवाई की शुरुआत कर दी। यह संघर्ष केवल गाज़ा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका विस्तार लेबनान, सीरिया और लाल सागर के समुद्री मार्गों तक हो गया। यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाना शुरू किया, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर अत्यधिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।\n\nइसी वर्ष अगस्त 2023 में जोहान्सबर्ग में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में समूह के विस्तार का ऐतिहासिक फैसला लिया गया। इसके बाद 1 जनवरी 2024 से मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात औपचारिक रूप से ब्रिक्स के पूर्णकालिक सदस्य बन गए। इस विस्तार ने ब्रिक्स के भौगोलिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय प्रभाव में भारी वृद्धि की और इसे वैश्विक दक्षिण की एक सशक्त आवाज बना दिया।\n\nवैश्विक राजनीतिक परिवर्तन और अमेरिका की नई व्यापार नीति\nवर्ष 2024 में विभिन्न देशों में बड़े राजनीतिक उलटफेर देखने को मिले। बांग्लादेश में महीनों तक चले जनविरोध प्रदर्शनों के बाद अगस्त 2024 में शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद से त्यागपत्र देकर भारत में शरण लेनी पड़ी। वहीं दिसंबर 2024 में सीरिया में दशकों से जारी बशर अल-असद के शासन का पतन हो गया। नवंबर 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की ऐतिहासिक जीत ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ा।\n\nडोनाल्ड ट्रंप के दोबारा सत्ता संभालने के बाद 2 अप्रैल 2025 को अमेरिका ने एक व्यापक एवं सख्त टैरिफ व्यवस्था लागू करने की घोषणा की। इसके तहत अमेरिका आयातित वस्तुओं पर न्यूनतम 10 प्रतिशत का बेसलाइन टैरिफ लगाया गया और कई साझेदार देशों पर इससे भी अधिक आयात शुल्क आरोपित किए गए। इस कदम से अमेरिका और चीन सहित विश्व के अन्य बड़े व्यापारिक साझेदारों के बीच आर्थिक तनाव चरम पर पहुंच गया, जिससे स्पष्ट हो गया कि वैश्विक शक्ति संतुलन अब केवल सैन्य क्षमता तक सीमित न रहकर तकनीक, सेमीकंडक्टर निर्माण, आपूर्ति श्रृंखला और टैरिफ नीतियों से निर्धारित हो रहा है।\n\nदक्षिण एशिया में सुरक्षा संकट और इजराइल-ईरान संघर्ष\nदक्षिण एशिया में भी सुरक्षा स्थितियां उस समय अत्यंत तनावपूर्ण हो गईं जब 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में एक भयावह आतंकी हमला हुआ, जिसमें 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई। इसके प्रत्युत्तर में भारत ने 7 मई 2025 को 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया। इस सैन्य कार्रवाई के तहत भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में स्थित नौ रणनीतिक आतंकी ठिकानों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया। इस घटनाक्रम के बाद दोनों देशों के बीच कई दिनों तक गंभीर सैन्य तनाव बना रहा, जो 2021 के बाद इस क्षेत्र की सबसे बड़ी सुरक्षा घटना साबित हुई।\n\nदूसरी ओर, 13 जून 2025 को इज़राइल द्वारा ईरान पर सीधे व्यापक सैन्य हमले शुरू करने के बाद पश्चिम एशिया में भीषण युद्ध छिड़ गया। तनाव तब और अधिक बढ़ गया जब 22 जून 2025 को अमेरिका स्वयं इस युद्ध में सीधे कूद पड़ा और ईरान के तीन अत्यंत महत्वपूर्ण परमाणु स्थलों- फोर्डो, नतांज और इस्फहान पर हवाई हमले किए। इस घटनाक्रम ने वैश्विक तेल आपूर्ति और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के समुद्री मार्ग पर भारी खतरा मंडरा दिया।\n\n2026 का बहुध्रुवीय विश्व और ब्रिक्स की नई संरचना\nवर्ष 2025 में इंडोनेशिया के ब्रिक्स में पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल होने के साथ ही, 2021 के पांच देशों वाले समूह से 2026 के एक विशाल बहुराष्ट्रीय संगठन तक की यात्रा पूरी हुई। सितंबर 2026 में जब भारत दोबारा ब्रिक्स सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहा है, तब यह समूह केवल उभरती अर्थव्यवस्थाओं का अनौपचारिक मंच नहीं रह गया है, बल्कि एशिया, अफ्रीका, पश्चिम एशिया और लातिन अमेरिका के महत्वपूर्ण राष्ट्रों का एक आर्थिक एवं रणनीतिक गठजोड़ बन चुका है जो एक नए बहुध्रुवीय विश्व की नींव रख रहा है।\n\nइसका आप पर असर\nवैश्विक संघर्षों, ऊर्जा संकट और नए व्यापारिक टैरिफ का सीधा असर दुनिया भर के उपभोक्ताओं और भारतीय अर्थव्यवस्था की दैनिक लागत पर पड़ता है।\n\n• भारत में: अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल और शिपिंग लागत बढ़ने से घरेलू ईंधन और आयातित वस्तुओं के दाम बढ़ सकते हैं। दक्षिण एशियाई सुरक्षा स्थितियों के मद्देनजर रक्षा और आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती पर सरकारी खर्च में वृद्धि संभावित है।\n• वैश्विक स्तर पर: अमेरिका द्वारा लगाए गए 10 प्रतिशत के बेसलाइन टैरिफ से अंतरराष्ट्रीय व्यापार महंगा होगा। वैश्विक स्तर पर इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और दैनिक उपभोग की वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी का सामना करना पड़ सकता है।\n• ऊर्जा आपूर्ति: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और लाल सागर में तनाव से एलएनजी और कच्चे तेल की खेपों में देरी हो सकती है। उपभोक्ताओं को बिजली और गैस के बिलों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।\n• आपूर्ति श्रृंखला: सेमीकंडक्टर और तकनीक के क्षेत्र में भू-राजनीतिक होड़ से गैजेट्स और वाहनों की डिलीवरी समय सीमा प्रभावित हो सकती है।\n\nऐसा क्यों हुआ\n2021 से 2026 के बीच वैश्विक व्यवस्था में बड़े बदलाव कई सैन्य अभियानों, भू-राजनीतिक गठबंधनों और आर्थिक नीतियों के कारण आए हैं।\n\n• सैन्य संघर्ष: फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस की सैन्य कार्रवाई और अक्टूबर 2023 में हमास-इज़राइल युद्ध ने यूरोप और पश्चिम एशिया में सुरक्षा संतुलन को पूरी तरह बिगाड़ दिया।\n• नाटो का विस्तार: रूस के कदम के बाद सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए फिनलैंड (अप्रैल 2023) और स्वीडन (मार्च 2024) ने नाटो का रुख किया।\n• दक्षिण एशियाई सुरक्षा: 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के जवाब में भारत ने 7 मई 2025 को 'ऑपरेशन सिंदूर' चलाकर आतंकी ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई की।\n• अमेरिकी नीति में बदलाव: नवंबर 2024 में चुनाव जीतने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अप्रैल 2025 को 10 प्रतिशत बेसलाइन टैरिफ लागू कर वैश्विक व्यापार तनाव को बढ़ावा दिया।\n• ब्रिक्स का विस्तार: अगस्त 2023 में जोहान्सबर्ग शिखर सम्मेलन के बाद मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया के जुड़ने से ब्रिक्स एक शक्तिशाली बहुध्रुवीय मंच बन गया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. 2021 के मुकाबले 2026 में ब्रिक्स संगठन में क्या बदलाव आया है?\n2021 में ब्रिक्स केवल 5 देशों (भारत, रूस, चीन, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका) का समूह था, जबकि 2026 तक मिस्र, इथियोपिया, ईरान, यूएई और इंडोनेशिया के शामिल होने से इसका विस्तार हो चुका है।\n\n2. ऑपरेशन सिंदूर कब और क्यों शुरू किया गया था?\n22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले (जिसमें 26 लोग मारे गए थे) के जवाब में भारत ने 7 मई 2025 को 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू कर नौ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था।\n\n3. अमेरिका ने 2025 में क्या नई टैरिफ नीति लागू की?\n2 अप्रैल 2025 को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में आने वाली विदेशी वस्तुओं पर न्यूनतम 10 प्रतिशत का बेसलाइन टैरिफ ढांचा घोषित किया था।\n\n4. अमेरिका ने ईरान के किन परमाणु ठिकानों पर हमला किया था?\n22 जून 2025 को अमेरिकी बलों ने सीधे शामिल होकर ईरान के तीन प्रमुख परमाणु ठिकानों - फोर्डो, नतांज और इस्फहान को निशाना बनाया था।\n\n5. फिनलैंड और स्वीडन नाटो में कब शामिल हुए?\nयूक्रेन युद्ध के बाद सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए फिनलैंड अप्रैल 2023 में और स्वीडन मार्च 2024 में औपचारिक रूप से नाटो के सदस्य बने।",
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  "category": "दुनिया",
  "publishedAt": "2026-09-11",
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