# पीएम मोदी का वायरल वीडियो: इंडोनेशियाई वाद्ययंत्र अंगक्लुंग की क्या है खासियत?

> प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया इंडोनेशिया यात्रा के दौरान एक वीडियो चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसमें वे 'अंगक्लुंग' नाम का पारंपरिक वाद्ययंत्र बजाते दिखे। जानिए इस अनोखे बांस के वाद्ययंत्र का इतिहास और इसके महत्व के बारे में।

**Type:** article · **Category:** दुनिया · **Published:** 2026-07-07 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/world/piema-modi-ka-vayarala-vidiyo-indoneshiyai-vadyayntra-angklung-ki-kya-hai-khasiyata-5547 · **Language:** Hindi
**Tags:** नरेंद्र मोदी, इंडोनेशिया, अंगक्लुंग, प्रबावो सुबियांतो, वाद्ययंत्र, यूनेस्को

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी विदेश यात्राओं के दौरान वहां की स्थानीय संस्कृति और परंपराओं में रुचि लेने के लिए जाने जाते हैं। अपनी इंडोनेशिया यात्रा के दौरान भी ऐसा ही एक दृश्य देखने को मिला, जब उन्होंने वहां के पारंपरिक संगीत में अपनी भागीदारी दिखाई। बैठकों के बीच मिले समय में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबावो सुबियांतो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक विशेष पारंपरिक वाद्ययंत्र भेंट किया। इस वाद्ययंत्र को बजाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखने के बाद से ही लोग इस वाद्ययंत्र के नाम और उसकी विशेषताओं के बारे में जानने के लिए उत्सुक हैं।

## क्या है अंगक्लुंग?
इस वाद्ययंत्र का नाम अंगक्लुंग है। यह देखने में बांस से बना एक सामान्य ढांचा जान पड़ सकता है, लेकिन यह दुनिया के सबसे अनूठे वाद्ययंत्रों में गिना जाता है। पूरी तरह से बांस से तैयार इस यंत्र में अलग-अलग लंबाई की बांस की नलियां लगी होती हैं। इसे बजाने के लिए किसी भी डंडी या हथौड़े की आवश्यकता नहीं पड़ती है। केवल हाथों की हल्की हरकत से बांस की नलियों में कंपन पैदा होता है, जिससे बेहद मधुर संगीत निकलता है।

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## सामूहिकता का प्रतीक
अंगक्लुंग की सबसे खास बात यह है कि इसे अकेले बजाकर संपूर्ण संगीत तैयार करना संभव नहीं है। आमतौर पर एक अंगक्लुंग का उपयोग केवल एक या दो सुर निकालने के लिए किया जाता है। किसी भी धुन या संगीत को पूरा करने के लिए कई कलाकारों को अलग-अलग सुर वाले अंगक्लुंग एक साथ लेकर प्रदर्शन करना पड़ता है। इसी कारण इसे केवल एक वाद्ययंत्र नहीं, बल्कि टीमवर्क, आपसी सामंजस्य और एकता के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

## ऐतिहासिक महत्व और विरासत
अंगक्लुंग का इतिहास इंडोनेशिया के पश्चिम जावा क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। सदियों पहले स्थानीय निवासी इसे अच्छी फसल की कामना के लिए और विभिन्न धार्मिक आयोजनों के दौरान बजाते थे। समय के साथ यह इंडोनेशियाई संस्कृति का अटूट हिस्सा बन गया। इसकी वैश्विक स्वीकार्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2010 में यूनेस्को ने अंगक्लुंग को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के रूप में मान्यता दी है।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** यह घटना अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में सांस्कृतिक संबंधों और व्यक्तिगत जुड़ाव के महत्व को दर्शाती है।

## सवाल-जवाब

### 1. पीएम मोदी द्वारा बजाए गए वाद्ययंत्र का नाम क्या है?
इस वाद्ययंत्र का नाम अंगक्लुंग है, जो इंडोनेशिया का एक पारंपरिक वाद्ययंत्र है।

### 2. अंगक्लुंग कैसे बजाया जाता है?
अंगक्लुंग को बजाने के लिए किसी डंडी की जरूरत नहीं होती; हाथों से हल्की गति देने पर बांस की नलियां कंपन करती हैं और संगीत पैदा होता है।

### 3. अंगक्लुंग का इतिहास क्या है?
इसकी उत्पत्ति इंडोनेशिया के पश्चिम जावा में हुई थी और इसे पारंपरिक रूप से फसल की कामना और धार्मिक अनुष्ठानों में उपयोग किया जाता था।

### 4. अंगक्लुंग को टीमवर्क का प्रतीक क्यों माना जाता है?
क्योंकि एक अकेला अंगक्लुंग केवल एक-दो सुर निकाल सकता है, इसलिए पूरी धुन बजाने के लिए कई कलाकारों को मिलकर काम करना पड़ता है।

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