गुमनाम खौफ के साए में PoK, पाक सेना के जुल्म से मस्जिदें और इमाम भी नहीं बचे सुरक्षित पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में सुरक्षा के नाम पर तैनात सेना की क्रूरता थमने का नाम नहीं ले रही है। इंटरनेट और संचार माध्यम बंद कर दिए जाने के बीच मीरपुर और भिंबर में धार्मिक स्थलों पर हमले की दिल दहला देने वाली घटनाएं सामने आई हैं। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। आम नागरिकों की आवाज दबाने के लिए तैनात किए गए पाकिस्तानी सैनिकों का रवैया अब बेहद हिंसक हो चुका है। स्थानीय इलाकों में सुरक्षा प्रबंधों की आड़ में आम लोगों पर ज्यादतियां की जा रही हैं और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि अब पूजा स्थल और धार्मिक केंद्र भी इन ज्यादतियों से अछूते नहीं रहे हैं। हाल ही में सामने आई घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि वहां के बाशिंदों के साथ-साथ उनके धार्मिक स्थल भी खतरे की जद में हैं। भिंबर और मीरपुर में धार्मिक स्थलों पर हमले हालिया मामलों में सबसे दर्दनाक वाकया मीरपुर शहर का है। जब हथियारबंद पाकिस्तानी सैनिक जबर्दस्ती एक मस्जिद के अंदर दाखिल होने लगे, तो वहां मौजूद एक स्थानीय इमाम ने इसका विरोध किया। उस धार्मिक स्थल की पवित्रता बचाने और हिंसा रोकने की खातिर वह इमाम दीवार बनकर खड़ा हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों और रिपोर्ट्स के अनुसार, मुनीर आर्मी के गुंडों ने उस निहत्थे इमाम पर हमला बोल दिया और उसे पीट-पीट कर मौत के घाट उतार दिया। इसी तरह की एक अन्य घटना भिंबर जिले से भी सामने आई है, जहां के एक स्थानीय इमाम ने बताया कि सुरक्षा बलों ने एक अन्य मस्जिद में घुसकर उस पर अपना कब्जा जमा लिया है। इन दोनों वारदातों ने पूरे इलाके में कोहराम मचा दिया है और लोगों के भीतर भारी आक्रोश फैल गया है। कम्युनिकेशन ठप और डिजिटल ब्लैकआउट इन तमाम बर्बर कार्रवाइयों के बीच पूरे क्षेत्र में पूर्ण इंटरनेट ब्लैकआउट लागू कर दिया गया है। जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) का कहना है कि प्रशासन नागरिकों और प्रदर्शनकारियों के विरोध को कुचलने के लिए हरसंभव हथकंडे अपना रहा है। संचार माध्यमों पर पूरी तरह रोक लगने के कारण स्थानीय जनता का संपर्क बाहरी दुनिया से पूरी तरह कट चुका है। हालांकि, इन पाबंदियों के बावजूद लोगों का यह साफ कहना है कि वे अपने अधिकारों की इस लड़ाई को किसी भी कीमत पर रुकने नहीं देंगे और उनका संघर्ष आगे भी जारी रहेगा। आम जनजीवन पर पाबंदियों का गंभीर असर मीरपुर डिवीजन में प्रशासनिक सख्ती के चलते जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है। पूरे क्षेत्र में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं पूरी तरह ठप पड़ी हुई हैं, जिससे आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस पूर्ण संचारबंदी के मुख्य प्रभाव इस प्रकार हैं • अपनों से संपर्क टूटा: संचार सेवाएं पूरी तरह बंद होने के कारण लोग अपने दूरदराज रह रहे परिवार के सदस्यों का हालचाल तक नहीं जान पा रहे हैं। • इमरजेंसी में भारी दिक्कत: चिकित्सा आपातकाल या किसी गंभीर बीमारी की स्थिति में तुरंत मदद मांगना या संपर्क साधना असंभव हो गया है। • खबरों पर सेंसरशिप: इंटरनेट बंद होने से क्षेत्र की जमीनी हकीकत और असली खबरें बाहर नहीं आ पा रही हैं, जिससे अफवाहों का दौर तेजी से चल रहा है। सवाल-जवाब 1. PoK में किन जगहों पर मस्जिदों को निशाना बनाए जाने की खबरें हैं? रिपोर्ट्स के अनुसार मीरपुर शहर और भिंबर जिले में मस्जिदों को निशाना बनाया गया है। 2. मीरपुर में इमाम के साथ क्या हुआ? मीरपुर में मस्जिद में जबरन घुसने का विरोध करने पर एक इमाम को पीट-पीट कर मार डाला गया। 3. JKJAAC का इस पूरे घटनाक्रम पर क्या कहना है? जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी का कहना है कि प्रशासन नागरिकों और प्रदर्शनकारियों की आवाज दबाने के लिए हिंसक कार्रवाई कर रहा है। 4. इलाके में संचार व्यवस्था की क्या स्थिति है? पूरे इलाके में इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह बंद हैं, जिससे बाहरी दुनिया से संपर्क टूट गया है। https://trendkia.com/world/pok-under-military-crackdown-as-mosques-and-imams-face-brutal-attacks-13600 TrendKia — Har trend, sabse pehle.