# पुराने सोशल मीडिया पोस्ट पर सऊदी अरब में कैद ब्रिटिश नागरिक अहमद अल-दूस की रिहाई के लिए पत्नी की भावुक गुहार

> कई साल पुराने सोशल मीडिया पोस्ट के मामले में सऊदी अरब की जेल में बंद ब्रिटेन के बिजनेस एनालिस्ट अहमद अल-दूस की पत्नी ने उनकी बिगड़ती सेहत का हवाला देते हुए तत्काल रिहाई और मानवीय मदद की गुहार लगाई है।

**Type:** article · **Category:** दुनिया · **Published:** 2026-07-30 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/world/purane-soshala-midiya-posta-para-saudi-arabia-men-kaida-british-nagarika-ahmed-al-doush-ki-rihai-ke-lie-patni-ki-bhavuka-guhara-12124 · **Language:** Hindi
**Tags:** अहमद अल-दूस, सऊदी अरब, ब्रिटेन news, एम्नेस्टी इंटरनेशनल, मानवाधिकार, सोशल मीडिया पोस्ट

ब्रिटेन के मैनचेस्टर शहर के निवासी 44 वर्षीय बिजनेस एनालिस्ट अहमद अल-दूस अगस्त 2024 से सऊदी अरब की जेल में बंद हैं। परिवार के साथ छुट्टियों के बाद स्वदेश लौटते समय उन्हें रियाद हवाई अड्डे पर हिरासत में लिया गया था। मानवाधिकार संगठनों और परिजनों के अनुसार, उनकी गिरफ्तारी का मुख्य कारण कई साल पहले किए गए कुछ सोशल मीडिया पोस्ट हैं। इस समय उनकी पत्नी अमाहेर नूर अपने चार छोटे बच्चों के साथ उनकी सुरक्षित घर वापसी की राह देख रही हैं। अहमद अल-दूस जब जेल भेजे गए थे, तब उनकी पत्नी गर्भवती थीं और उनके चौथे बच्चे का जन्म पिता की अनुपस्थिति में हुआ।

## पारिवारिक यात्रा के दौरान गिरफ्तारी और मुकदमे की पृष्ठभूमि
अहमद अल-दूस अपनी पत्नी और तीन बच्चों के साथ अपनी पत्नी के भाई से मिलने सऊदी अरब गए थे। यात्रा समाप्त होने के बाद जब पूरा परिवार रियाद हवाई अड्डे से ब्रिटेन लौटने की तैयारी कर रहा था, तभी सुरक्षा अधिकारियों ने उन्हें हिरासत में ले लिया। उनके परिजनों को महीनों तक मामले की स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। उनकी वकील हेडी डिज्कस्टाल के अनुसार, अहमद अल-दूस से वर्ष 2018 में सूडान से जुड़े कुछ ट्वीट के बारे में पूछताछ की गई थी, जिन्हें वे पहले ही डिलीट कर चुके थे। इसके अलावा, ब्रिटेन में रहने वाले एक सऊदी असंतुष्ट के बेटे से उनकी जान-पहचान को भी जांच का आधार बनाया गया।

गिरफ्तारी के शुरुआती पांच महीनों तक अहमद अल-दूस को बिना किसी औपचारिक आरोप के हिरासत में रखा गया और वकील की अनुपस्थिति में उनसे पूछताछ की गई। मई 2025 में सऊदी अरब की स्पेशलाइज्ड क्रिमिनल कोर्ट ने उन्हें सोशल मीडिया के जरिए फर्जी खबरें फैलाने के आरोप में 10 साल की सजा सुनाई। बाद में अप्रैल में अपील सुनवाई के दौरान इस सजा को घटाकर 5 साल कर दिया गया। हालांकि, कानूनी कानूनी दस्तावेजों या फैसले की प्रति न तो उनके परिवार को दी गई है और न ही ब्रिटिश अधिकारियों को सौंपी गई है।

## जेल के भीतर बिगड़ता स्वास्थ्य और अमानवीय परिस्थितियां
अहमद अल-दूस की पत्नी अमाहेर नूर ने बताया कि जेल से आने वाले फोन कॉल्स के दौरान उनके पति की आवाज पहचानना मुश्किल हो जाता है। वे मानसिक और शारीरिक रूप से बेहद थके हुए और मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। अपनी न्याय की मांग को लेकर उन्होंने कई बार भूख हड़ताल भी की है, जिसकी जानकारी परिवार को काफी देर बाद मिली।

एम्नेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, अहमद अल-दूस को एक ऐसे बैरक में रखा गया है जो 6 से 8 कैदियों के लिए बनाया गया था, लेकिन वर्तमान में वहां करीब 16 कैदी रह रहे हैं। उनके घर फोन करने की अनुमति पर अक्सर प्रतिबंध लगा दिए जाते हैं। इसके साथ ही, उन्हें चेतावनी दी गई है कि यदि वे अपनी सेहत या कानूनी स्थिति पर बात करेंगे तो उन्हें और सख्त सजा दी जाएगी। अमाहेर नूर का कहना है कि उन्होंने घर से अपने पति के कपड़े छुपा दिए हैं ताकि छोटे बच्चों को उनकी याद में ज्यादा तकलीफ न हो।

## अंतरराष्ट्रीय निकायों के निष्कर्ष और मानवीय अपील
संयुक्त राष्ट्र के वर्किंग ग्रुप ऑन आर्बिट्रेरी डिटेंशन (UNWGAD) के स्वतंत्र विशेषज्ञों ने मार्च में अपनी समीक्षा में निष्कर्ष निकाला कि अहमद अल-दूस की हिरासत अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा का उल्लंघन है। यूएन निकाय ने स्पष्ट किया कि सऊदी अधिकारियों ने ऐसा कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया है जिससे यह साबित हो सके कि अहमद अल-दूस से समाज को कोई हिंसक खतरा था। निकाय ने उन्हें तुरंत रिहा करने की सिफारिश की है।

दूसरी ओर, सऊदी अधिकारियों ने यूएन निकाय के समक्ष दावा किया था कि अहमद अल-दूस के खिलाफ आतंकवादी अपराधों और आतंकवादी विचारधारा के समर्थन के सबूत मौजूद हैं। हालांकि, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि साइबर अपराध और आतंकवाद विरोधी व्यापक कानूनों का इस्तेमाल इंटरनेट पर विचार व्यक्त करने वालों को दंडित करने के लिए किया जा रहा है। एम्नेस्टी इंटरनेशनल यूके की प्रतिनिधि एलीड मैकफर्सन ने कहा कि अहमद अल-दूस को केवल उन सोशल मीडिया पोस्ट्स के लिए जेल में रखा गया है जो किसी भी लोकतांत्रिक देश में अपराध की श्रेणी में नहीं आते।

## ब्रिटेन सरकार की भूमिका और वैश्विक यात्रा सलाह पर असर
ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने अप्रैल में जेद्दा में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से मुलाकात की थी। ब्रिटेन के विदेश कार्यालय का कहना है कि उसने सऊदी अधिकारियों के समक्ष अहमद अल-दूस का मुद्दा उठाया है। इसके साथ ही ब्रिटिश सरकार की वर्तमान यात्रा सलाह में नागरिकों को चेतावनी दी गई है कि सऊदी अरब में सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित करने वाले बयानों पर कड़े नियम लागू होते हैं।

ब्रिटिश यात्रा निर्देश के अनुसार, कई साल पहले या देश के बाहर दिए गए सोशल मीडिया बयानों को भी कानूनी कार्रवाई का आधार बनाया जा सकता है, जिससे लंबी जेल की सजा हो सकती है। एम्नेस्टी इंटरनेशनल ने दुनिया भर की सरकारों से अपील की है कि 2034 वर्ल्ड कप और अन्य बड़े आयोजनों से पहले सऊदी अरब जाने वाले पर्यटकों और विदेशी नागरिकों के लिए यात्रा सलाह को और स्पष्ट किया जाए। अमाहेर नूर ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से मानवीय आधार पर अपने पति को दया याचिका देकर रिहा करने की अपील की है।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** विदेश यात्रा करने वाले या दूसरे देशों में रहने वाले भारतीय नागरिकों को सख्त डिजिटल कानूनों वाले देशों की यात्रा से पहले अपनी पुरानी सोशल मीडिया गतिविधियों की समीक्षा कर लेनी चाहिए, क्योंकि सालों पुराने पोस्ट भी गंभीर कानूनी मुसीबत खड़ी कर सकते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. अहमद अल-दूस कौन हैं और उन्हें सऊदी अरब में क्यों गिरफ्तार किया गया?
अहमद अल-दूस ब्रिटेन के मैनचेस्टर में रहने वाले 44 वर्षीय बिजनेस एनालिस्ट हैं, जिन्हें कई साल पुराने सोशल मीडिया पोस्ट के मामले में अगस्त 2024 में रियाद हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया गया था।

### 2. सऊदी कोर्ट ने अहमद अल-दूस को क्या सजा सुनाई है?
मई 2025 में स्पेशलाइज्ड क्रिमिनल कोर्ट ने उन्हें 10 साल की सजा सुनाई थी, जिसे अप्रैल में अपील के दौरान घटाकर 5 साल कर दिया गया।

### 3. संयुक्त राष्ट्र (UN) निकाय ने अहमद अल-दूस के मामले में क्या निष्कर्ष निकाला है?
यूएन वर्किंग ग्रुप ऑन आर्बिट्रेरी डिटेंशन (UNWGAD) ने मार्च में उनकी हिरासत को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत मनमाना पाया और उनकी तुरंत रिहाई की सिफारिश की।

### 4. अहमद अल-दूस के परिवार ने क्या अपील की है?
उनकी पत्नी अमाहेर नूर ने क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से मानवीय आधार पर दया याचिका स्वीकार कर तुरंत रिहा करने का अनुरोध किया है।

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