रावलपिंडी में आसिम मुनीर के खिलाफ हलचल तेज, अनुच्छेद 245 लागू कर उतारे गए 400 जवान पाकिस्तान के रावलपिंडी में बिगड़ते हालात के बीच छह महीने के लिए सेना के करीब 400 जवान तैनात किए गए हैं। सरकार द्वारा उठाए गए इस कदम को देश में बढ़ते राजनीतिक तनाव और आंतरिक बगावत के अंदेशे से जोड़कर देखा जा रहा है। पाकिस्तान की सियासत और सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रही है। बलूचिस्तान के अशांत इलाकों और PoK में सुलगते असंतोष के बाद अब देश के सबसे बड़े सैन्य केंद्र यानी रावलपिंडी में भी भारी उथल-पुथल के संकेत मिलने लगे हैं। बिगड़ते हालात को नियंत्रित करने के नाम पर पाकिस्तानी गृह मंत्रालय ने एक बड़ा कदम उठाते हुए संविधान के अनुच्छेद 245 को सक्रिय कर दिया है। इस फैसले के तहत रावलपिंडी की सड़कों पर अगले छह महीनों के लिए भारी हथियारों से लैस करीब 400 सैनिकों की तैनाती की जा रही है, जिससे पूरे इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है। सेना के गढ़ में बढ़ी सुरक्षा आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक रावलपिंडी में पाकिस्तानी सेना की तीन हथियारबंद कंपनियों को उतारा गया है। सैन्य परंपरा के अनुसार एक कंपनी में अमूमन 100 से 150 सैनिक शामिल होते हैं, जिसके चलते इस पूरे क्षेत्र में लगभग 300 से 450 जवान सुरक्षा व्यवस्था संभालते नजर आएंगे। यह वही शहर है जहां पाकिस्तानी सेना का मुख्यालय (GHQ) स्थित है। ऐसे में सेना के सबसे सुरक्षित समझे जाने वाले ठिकाने पर इतनी बड़ी संख्या में अतिरिक्त बल का उतारा जाना कई तरह के गंभीर सवाल खड़े करता है। जानकारों का मानना है कि यह प्रशासनिक फैसला कम और अंदरूनी खौफ का नतीजा ज्यादा है। अनुच्छेद 245 के इस्तेमाल की वजह संविधान का अनुच्छेद 245 सरकार को यह अधिकार देता है कि वह किसी भी गंभीर नागरिक विद्रोह या आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए सीधे सेना को मैदान में उतार सके। हालांकि, जब इस प्रावधान का उपयोग देश के प्रमुख सैन्य मुख्यालय वाले शहर में किया जाए, तो स्थिति की नजाकत का अंदाजा लगाया जा सकता है। पंजाब सरकार के गृह विभाग की औपचारिक सिफारिश पर लिए गए इस निर्णय से यह साफ हो गया है कि स्थानीय पुलिस और अर्धसैनिक रेंजर्स कानून-व्यवस्था संभालने में खुद को असहज महसूस कर रहे हैं। इस तैनाती के बाद रावलपिंडी आने वाले छह महीनों के लिए एक प्रकार से सैन्य छावनी में तब्दील हो चुका है। सुरक्षा घेरे के पीछे छिपे तीन बड़े कारण सरकार भले ही इस तैनाती को कानून और व्यवस्था की सामान्य प्रक्रिया बता रही हो, लेकिन इसके पीछे मुख्य रूप से तीन गंभीर वजहें बताई जा रही हैं। पहला बड़ा कारण अदियाला जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनके समर्थकों की बढ़ती सक्रियता है। जेल में होने के बावजूद उनकी लोकप्रियता में कमी नहीं आई है और उनकी पार्टी के कार्यकर्ता इस्लामाबाद तथा रावलपिंडी में बड़े प्रदर्शनों की रूपरेखा तैयार कर चुके हैं। हाल ही में मॉल रोड पर हुई हिंसक झड़पों के बाद प्रशासन को इस बात का गहरा डर सता रहा है कि आक्रोशित भीड़ सीधे तौर पर जेल या सेना मुख्यालय का रुख कर सकती है। दूसरा कारण जनरल आसिम मुनीर की नीतियों के प्रति आम जनता में सुलगता गुस्सा है। नए रक्षा अधिनियम के माध्यम से सैन्य प्रमुख ने अपने अधिकार क्षेत्र को काफ़ी बढ़ा लिया है, जिसकी वजह से देश में आर्थिक बदहाली और महंगाई के बीच सैन्य तानाशाही को लेकर जनता में भारी रोष है। तीसरा और सबसे बड़ा कारण सेना के भीतर ही किसी संभावित बगावत या तख्तापलट का अंदेशा है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा आम है कि इमरान खान का समर्थन केवल आम नागरिकों तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षा बलों के निचले स्तर के कर्मियों और अधिकारियों के बीच भी उनकी पैठ है। यही वजह है कि सेना प्रमुख किसी बाहरी खतरे से ज्यादा अपने ही महकमे के भीतर सुलगती असंतुष्टि को दबाने के लिए यह पुख्ता सुरक्षा घेरा तैयार कर रहे हैं। शहबाज शरीफ सरकार की लाचारी देश के कोने-कोने में भारी हथियारों से लैस सैकड़ों जवानों का इस तरह पहरा देना यह साबित करता है कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार केवल कागजों पर ही सिमट कर रह गई है। रावलपिंडी की वास्तविक कमान अब पूरी तरह से बंकरों में बैठे सैन्य आचार्यों के हाथों में चली गई है। देश के विपक्षी दलों और मानवाधिकार संगठनों ने इस आदेश पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था का दिखावा कर दरअसल पाकिस्तान को अघोषित मार्शल लॉ की तरफ धकेला जा रहा है। इसका आप पर असर भारत में: इस घटनाक्रम से पाकिस्तान के भीतर चल रही राजनीतिक अस्थिरता और सैन्य संघर्ष के संकेत स्पष्ट रूप से सामने आते हैं। पाकिस्तान में: रावलपिंडी के आम नागरिकों और स्थानीय कारोबारियों को अगले छह महीने तक कड़े सुरक्षा पहरे, आवाजाही पर पाबंदियों और लगातार बढ़ते तनाव का सामना करना पड़ेगा। सवाल-जवाब 1. रावलपिंडी में कितने सैनिकों की तैनाती की गई है? रावलपिंडी में सेना की तीन कंपनियों के तहत करीब 400 हथियारबंद जवानों को तैनात किया गया है। 2. सेना की तैनाती के लिए किस प्रावधान का सहारा लिया गया है? सरकार ने कानून व्यवस्था संभालने के लिए संविधान के अनुच्छेद 245 को लागू किया है। 3. यह सुरक्षा तैनाती कितने समय के लिए लागू रहेगी? यह विशेष सुरक्षा तैनाती रावलपिंडी में पूरे छह महीने की अवधि के लिए लागू की गई है। 4. इस तैनाती के पीछे मुख्य आशंका क्या है? प्रशासन को राजनीतिक प्रदर्शनों, नागरिक असंतोष और सेना के भीतर संभावित आंतरिक बगावत का अंदेशा है। https://trendkia.com/world/rawalpindi-me-asim-munir-ke-khilaf-halchal-tez-anuchhed-245-lagu-kar-utare-gaye-400-jawan-20324 TrendKia — Har trend, sabse pehle.