‘शब्दों का खेल’ बताकर रूबियो ने ईरान को घेरा, बोले होर्मुज पर किसी एक मुल्क का कब्जा मंजूर नहीं बहरीन में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने ईरान के शुल्क वसूली के रुख को सिर्फ शब्दों का खेल बताया और साफ किया कि होर्मुज जलसंधि किसी एक देश की जागीर नहीं हो सकती। उन्होंने परमाणु कार्यक्रम पर आईएईए के निरीक्षण की जरूरत भी दोहराई। अमेरिका ने दो टूक कह दिया है कि होर्मुज जलसंधि पर वह किसी एक देश का दावा कबूल नहीं करेगा। बहरीन की राजधानी मनामा में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने इस अहम समुद्री रास्ते को लेकर ईरान के बढ़ते रुख को सीधे खारिज कर दिया और कहा कि होर्मुज को किसी एक राष्ट्र-राज्य की मिल्कियत नहीं माना जा सकता। होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूलने की ईरान की मंशा पर रूबियो ने इसे महज शब्दों की बाजीगरी करार दिया। उन्होंने कहा, “आप इसे टोल कहें या शुल्क कहें, लेकिन आखिर में यह सिर्फ शब्दों का खेल है।” बातचीत का दरवाजा खुला रखते हुए भी रूबियो ने कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा, “हम ईरान के साथ एक समझौता चाहते हैं, लेकिन किसी भी कीमत पर समझौता नहीं चाहते।” फिलहाल होर्मुज को लेकर तस्वीर धुंधली बनी हुई है। आईआरजीसी ने सख्त चेतावनी जारी की है कि तय रास्ते से हटकर बिना इजाजत कोई दूसरा रास्ता अपनाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। होर्मुज पर ईरान का नया दांव रूबियो के मुताबिक होर्मुज की मौजूदा स्थिति में कोई बदलाव नहीं आएगा। दूसरी ओर ईरान लगातार दावा कर रहा है कि अब एक नई समुद्री व्यवस्था लागू हो चुकी है और वह इस रणनीतिक इलाके पर अपना नियंत्रण और संप्रभुता और मजबूत करेगा। तेहरान का इशारा है कि अगर कोई अंतिम समझौता होता है, तो वह जहाजों से शुल्क वसूलने की कोशिश कर सकता है। दिलचस्प बात यह है कि ईरान अब इस वसूली को ‘सर्विस फीस’ का नाम दे रहा है। पहले वह इसे खुलकर टोल फीस बता रहा था, लेकिन अब उसका तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत टोल फीस वसूलना प्रतिबंधित है। परमाणु कार्यक्रम पर भी टिकी नजरें होर्मुज के अलावा रूबियो ने दूसरे बड़े मुद्दे यानी ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने जांचे-परखे जा सकने वाले ठोस कदमों पर जोर दिया और आईएईए के निरीक्षण की जरूरत को साफ शब्दों में गिनाया। हालांकि ईरान पहले ही कह चुका है कि अभी आईएईए के निरीक्षकों के ईरान दौरे की कोई योजना नहीं है। गल्फ देशों को भरोसा देने की कवायद रूबियो इस वक्त तीन दिवसीय गल्फ दौरे पर हैं। इस यात्रा का असली मकसद उन खाड़ी देशों को भरोसे में लेना है, जो अंतरिम समझौते में अमेरिका के साथ खड़े हैं, ताकि वे वॉशिंगटन के फैसलों को लेकर पूरी तरह आश्वस्त रहें। इसका आप पर असर • भारत में: भारत अपना ज्यादातर कच्चा तेल होर्मुज जलसंधि के रास्ते मंगाता है, इसलिए यहां तनाव बढ़ा तो पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों पर सीधा दबाव पड़ सकता है। • दुनिया भर में: यह रास्ता ग्लोबल तेल सप्लाई की लाइफलाइन है, ऐसे में किसी भी रुकावट या शुल्क का असर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों और शिपिंग लागत पर पड़ेगा। सवाल-जवाब 1. रूबियो ने ईरान के शुल्क वसूली के रुख पर क्या कहा? उन्होंने इसे सिर्फ शब्दों का खेल बताया और कहा कि चाहे इसे टोल कहें या शुल्क, बात एक ही है। 2. क्या होर्मुज जलसंधि की मौजूदा स्थिति बदलेगी? रूबियो के मुताबिक होर्मुज की मौजूदा स्थिति में कोई बदलाव नहीं आएगा। 3. ईरान अब इस शुल्क को क्या नाम दे रहा है? ईरान अब इसे ‘सर्विस फीस’ कह रहा है, जबकि पहले वह इसे खुलकर टोल फीस बता रहा था। 4. परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका की मांग क्या है? रूबियो ने जांचे-परखे जा सकने वाले कदमों और आईएईए के निरीक्षण की जरूरत पर जोर दिया है। 5. क्या ईरान आईएईए के निरीक्षकों को आने देगा? ईरान पहले ही कह चुका है कि अभी आईएईए के निरीक्षकों के दौरे की कोई योजना नहीं है। 6. रूबियो गल्फ दौरे पर क्यों हैं? वह तीन दिवसीय दौरे पर अंतरिम समझौते में साथ खड़े खाड़ी देशों को भरोसे में लेने के लिए गए हैं। https://trendkia.com/world/shabdon-ka-khela-batakara-rubio-ne-iran-ko-ghera-bole-hormuz-para-kisi-eka-mulka-ka-kabja-mnjura-nahin-2959 TrendKia — Har trend, sabse pehle.