# तमिलनाडु के दंपती ने साड़ी को बनाया लाइफलाइन, नेपाल में बचाई 21 श्रद्धालुओं की जान

> नेपाल में कैलाश यात्रा के दौरान फंसे तमिलनाडु के 21 श्रद्धालुओं को एक दंपती ने अपनी सूझबूझ और बहादुरी से मौत के मुंह से बाहर निकाला। भारी बारिश और लैंडस्लाइड के बीच साड़ी की रस्सी बनाकर सभी को सुरक्षित बचाया गया।

**Type:** article · **Category:** दुनिया · **Published:** 2026-08-30 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/world/tamil-nadu-ke-dnpati-ne-sari-ko-banaya-lifeline-nepala-men-bachai-21-shraddhaluon-ki-jana-24636 · **Language:** Hindi
**Tags:** कैलाश मानसरोवर यात्रा, नेपाल बाढ़, तमिलनाडु समाचार, रेस्क्यू ऑपरेशन, लैंडस्लाइड

पवित्र कैलाश पर्वत की तीर्थयात्रा पर रवाना हुए तमिलनाडु के इक्कीस यात्रियों के लिए नेपाल का यह सफर किसी डरावने सपने की तरह साबित हुआ। तिमुरे के दुर्गम पहाड़ों में स्याब्रू बेस और केरूंग के बीच अचानक आए कुदरती कहर ने पूरे रास्ते को खतरे के दायरे में ला दिया। मूसलाधार बारिश, धंसते पहाड़ों और भयंकर जलप्रलय के बीच एक साधारण साड़ी और एक पति-पत्नी के हौसले ने ऐसा करिश्मा कर दिखाया, जिसने इक्कीस लोगों की जिंदगी बचा ली। पहाड़ी ढलानों पर मटमैले पानी का तेज सैलाब उमड़ रहा था और सुरक्षा के नाम पर केवल कीचड़ से भरी खड़ी चढ़ाई ही बची थी। हालात इतने भयानक थे कि ऊपर पहुंचने के बाद किसी में भी नीचे मुड़कर देखने का साहस नहीं बचा था।

## साड़ी बनी उम्मीद की डोर और दंपती बने देवदूत
इस विकट परिस्थिति में मयिलादुतुरै के रहने वाले रत्नाकुमार और उनकी पत्नी पूंगुझली पहले ही सुरक्षित ऊंचाई पर पहुंच चुके थे। हालांकि, जैसे ही रत्नाकुमार की नजर कुछ महिलाओं पर पड़ी जो फिसलन भरे कीचड़ में बार-बार गिर रही थीं और ऊपर नहीं आ पा रही थीं, उन्होंने बिना एक पल गंवाए खतरे के बीच दोबारा उतरने का फैसला किया। उन्होंने अपनी पत्नी पूंगुझली की साड़ी उतारी और उसे एक मजबूत सहारे की तरह इस्तेमाल किया। ऊपर से उनकी पत्नी ने छोर थाम रखा था और नीचे खड़े रत्नाकुमार ने एक-एक महिला को उस साड़ी के सहारे खींचकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।

## मौत के मुहाने पर बिताए दो मुश्किल दिन
इस खौफनाक अनुभव को याद करते हुए यात्रा दल की सदस्य शिवरंजनी ने बताया कि जब उनकी गाड़ी भारतीय दूतावास चेकपॉइंट के नजदीक पानी में घिर गई थी, तो हर बीतता पल सांसें थामने वाला था। गाड़ी यदि पांच फीट भी इधर-उधर हो जाती, तो सभी लोग उफनते पानी में बह जाते। वाहन का ड्राइवर साइड का दरवाजा खोलकर किसी तरह लोगों ने बाहर जान बचाई। इसके बाद पूरा जत्था कड़ाके की ठंड के बीच दो दिनों तक स्थानीय लोगों की ओर से दिए गए थोड़े बहुत खान-पान के सहारे जीवित रहा। इसके बाद हरकत में आए प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की।

## प्रशासनिक और हवाई रेस्क्यू ऑपरेशन
घटना की गंभीरता को देखते हुए भारतीय दूतावास, विदेश मंत्रालय और तमिलनाडु सरकार ने मिलकर तालमेल बैठाया और अड़तालीस घंटे के भीतर एक बड़ा हवाई बचाव अभियान चलाया। इस साझा और तेज ऑपरेशन के तहत सभी इक्कीस यात्रियों को नेपाल के काठमांडू से एयरलिफ्ट कर सकुशल भारत वापस लाया गया। इस पूरी आपदा के दौरान जहां एक ओर कुदरत का रौद्र रूप देखने को मिला, वहीं दूसरी ओर इंसानियत और आपसी मदद की एक ऐसी मिसाल कायम हुई जिसने कई जिंदगियों को नया जीवनदान दे दिया।

## इसका आप पर असर
यह घटना दिखाती है कि दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों की यात्रा के दौरान अचानक मौसम बदलने पर गंभीर संकट पैदा हो सकता है, जिससे प्रशासनिक सहायता पहुंचने तक यात्रियों को खुद के बूते शुरुआती सुरक्षा उपाय करने पड़ सकते हैं।

- **भारत में:** देश के विभिन्न हिस्सों से कैलाश या अन्य हिमालयी क्षेत्रों की तीर्थयात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को अत्यधिक बारिश और भूस्खलन के मौसम में यात्रा के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए और स्थानीय चेतावनी तंत्र पर नजर रखनी चाहिए।
- **तमिलनाडु में:** राज्य के उन परिवारों को जिनकी आने वाले दिनों में नेपाल या उच्च हिमालयी क्षेत्रों की यात्रा की योजना है, वर्तमान मौसम और भूगोलीय जोखिमों को ध्यान में रखते हुए अपनी बुकिंग और सुरक्षा तैयारियों की दोबारा समीक्षा करनी चाहिए।

## सवाल-जवाब

### 1. यह घटना कहां पर हुई थी?
यह घटना नेपाल के तिमुरे क्षेत्र में स्याब्रू बेस और केरूंग के बीच हुई थी।

### 2. कितने यात्री इस आपदा में फंसे थे?
तमिलनाडु के कुल 21 श्रद्धालु इस आपदा में फंसे हुए थे।

### 3. यात्रियों को किसने और कैसे बचाया?
रत्नाकुमार नाम के यात्री ने अपनी पत्नी की साड़ी को रस्सी की तरह इस्तेमाल कर महिलाओं को ऊपर खींचा, और बाद में सरकारों के संयुक्त अभियान से एयरलिफ्ट किया गया।

### 4. यात्री कितने दिनों तक फंसे रहे?
यात्री कड़ाके की ठंड के बीच दो दिनों तक स्थानीय लोगों की मदद से टिके रहे।

### 5. यात्रियों को सुरक्षित कहां लाया गया?
सभी यात्रियों को काठमांडू से एयरलिफ्ट कर भारत वापस लाया गया।

## प्रेरणा और सबक
यह घटना मुश्किल समय में अदम्य साहस, निस्वार्थ भाव और संकट के प्रबंधन का एक अनूठा उदाहरण पेश करती है।

- **निस्वार्थता और नेतृत्व:** रत्नाकुमार ने अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा सुनिश्चित होने के बावजूद दूसरों की जान बचाने के लिए खुद को दोबारा खतरे में झोंक दिया।
- **संसाधनों का सही इस्तेमाल:** विकट परिस्थिति में उपलब्ध साधारण सामग्री यानी साड़ी को लाइफलाइन के रूप में उपयोग करके तुरंत समाधान निकाला गया।
- **सामूहिक सहयोग:** स्थानीय निवासियों द्वारा समय पर स्नैक्स और पानी उपलब्ध कराने से यात्रियों को दो दिनों तक ठंड में टिके रहने की हिम्मत मिली।

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