# वोटर घूसखोरी मामले में दो संदिग्ध रिहा, नेतन्याहू के आरोपों को लगा झटका

> इज़राइल पुलिस ने चुनावी रिश्वत मामले में तीन में से दो संदिग्धों को रिहा कर दिया, जिससे लिकुड पार्टी के धांधली के दावों पर सवाल खड़े हो गए हैं। चुनाव नतीजों के बाद सरकार गठन को लेकर राजनीतिक गतिरोध गहरा गया है।

**Type:** article · **Category:** दुनिया · **Published:** 2026-11-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/world/votara-ghusakhori-mamale-men-do-sndigdha-riha-netanyahu-ke-aropon-ko-laga-jhataka-54609 · **Language:** Hindi
**Tags:** इज़राइल चुनाव, बेंजामिन नेतन्याहू, गादी आइज़नकोट, नेसेट, शिन बेट, लिकुड पार्टी, इसाक हर्ज़ोग

इज़राइल में 27 अक्टूबर को हुए आम चुनाव के बाद छिड़ा सियासी संग्राम अब कानूनी और जांच एजेंसियों के गलियारों तक पहुंच गया है। मतदान प्रक्रिया शुरू होने से ठीक पहले नकदी से भरे लिफाफे मिलने के मामले में पकड़े गए तीन संदिग्धों में से दो को इज़राइली पुलिस ने रविवार को रिहा कर दिया। पुलिस के इस कदम से प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी पार्टी लिकुड द्वारा लगाए जा रहे चुनावी धांधली के आरोपों को गहरा झटका लगा है। लिकुड पार्टी ने बिना किसी ठोस सबूत के यह आरोप लगाया था कि अरब नेतृत्व वाले दलों ने जनादेश चुराया है। हालांकि, अदालत की सख्त टिप्पणियों और संदिग्धों की रिहाई के बाद इन आरोपों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

## जांच पर अदालत की फटकार और संदिग्धों की रिहाई
पुलिस के अनुसार, पकड़े गए संदिग्धों के तार इस्लामिक दल राम से जुड़े बताए गए थे, जिसे पार्टी ने सिरे से खारिज करते हुए किसी भी तरह की संलिप्तता से साफ इनकार किया था। इस मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठे। न्यायाधीश ने पूरी जांच प्रणाली की तीखी आलोचना की और पुलिस द्वारा रिहा किए गए एक आरोपी पर अतिरिक्त कानूनी पाबंदियां लगाने की मांग को पूरी तरह ठुकरा दिया।

पुलिस प्रशासन ने बाद में स्पष्ट किया कि एक संदिग्ध को कुछ अनिर्दिष्ट शर्तों के साथ मुक्त किया गया है, जबकि दूसरे आरोपी को आठ दिनों की नजरबंदी में रखने का आदेश दिया गया है। वहीं, तीसरे संदिग्ध की हिरासत अवधि दो और दिनों के लिए बढ़ा दी गई है। शुरुआती तीन गिरफ्तारियों के दो दिन बाद पुलिस ने चार अन्य संदिग्धों को भी हिरासत में लिया था। लिकुड पार्टी ने इन्हीं शुरुआती गिरफ्तारियों को हथियार बनाकर पूरे चुनावी नतीजों की प्रामाणिकता पर सवाल खड़े करने शुरू किए थे। लिकुड ने मतदान में विदेशी हस्तक्षेप का भी आरोप मढ़ा है, लेकिन अरब नेतृत्व वाले दलों के खिलाफ अब तक कोई पुख्ता सबूत पेश नहीं कर पाई है।

## संसद में सीटों का गणित और नेतन्याहू की मुश्किलें
हालिया नतीजों ने इज़राइल की संसद, जिसे नेसेट कहा जाता है, में सत्ता संतुलन को पूरी तरह बदल कर रख दिया है। 120 सदस्यीय नेसेट में नेतन्याहू के संसदीय गुट को भारी नुकसान झेलना पड़ा है और वह घटकर महज 53 सीटों पर सिमट गया है। निवर्तमान संसद में उनके गठबंधन के पास 68 सीटों का मजबूत बहुमत था।

दूसरी ओर, नेतन्याहू के मुख्य राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी गादी आइज़नकोट के नेतृत्व वाले गुट ने 48 सीटें हासिल की हैं। इसके अलावा राम सहित अरब नेतृत्व वाली पार्टियों ने बाकी 19 सीटों पर जीत दर्ज की है। इस संसदीय अंकगणित का सीधा अर्थ यह है कि नेतन्याहू का विरोध करने वाले तमाम दल मिलकर सरकार बनाने के लिए आवश्यक जादुई आंकड़े को पार कर लेते हैं। हालांकि, वैचारिक मतभेदों के चलते यह अब भी तय नहीं हो पाया है कि क्या ये तमाम विपक्षी दल किसी साझा गठबंधन सरकार पर सहमत हो पाएंगे या नहीं।

## राष्ट्रपति की भूमिका और सरकार गठन की प्रक्रिया
चुनाव आयोग द्वारा आधिकारिक परिणामों को बुधवार को अंतिम रूप से प्रमाणित किया जाना तय है। चुनाव नतीजों के औपचारिक प्रमाणीकरण के ठीक बाद देश के राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग संसद में चुनकर आए प्रत्येक राजनीतिक दल के प्रतिनिधियों से औपचारिक मुलाकात करेंगे। इस परामर्श प्रक्रिया के दौरान राष्ट्रपति हर पार्टी से यह स्पष्ट रूप से पूछेंगे कि वे प्रधानमंत्री पद के लिए किस नेता का समर्थन करते हैं।

इन विस्तृत परामर्शों के आधार पर राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग उस उम्मीदवार को मनोनीत करेंगे, जिसके पास मजबूत गठबंधन बनाने की सबसे व्यावहारिक संभावना होगी। मौजूदा हालात में यह दौड़ मुख्य रूप से बेंजामिन नेतन्याहू और गादी आइज़नकोट के बीच केंद्रित मानी जा रही है। राष्ट्रपति द्वारा नेता चुने जाने के साथ ही देश में हफ्तों चलने वाली गठबंधन वार्ता का दौर शुरू हो जाएगा। यदि मनोनीत नेता तय समयसीमा में बहुमत जुटाने में नाकाम रहता है, तो राष्ट्रपति किसी अन्य उम्मीदवार को मौका दे सकते हैं। अगर तमाम कोशिशों के बावजूद कोई स्थिर सरकार नहीं बन पाती है, तो देश को अगले साल की शुरुआत में फिर से नए चुनावों का सामना करना पड़ सकता है।

## शिन बेट की जांच और कतर से जुड़े आरोप
चुनाव आयोग के सीधे अनुरोध पर इज़राइल की आंतरिक सुरक्षा सेवा शिन बेट ने भी मामले की औपचारिक जांच शुरू कर दी है। प्रतिद्वंद्वी गुट के नेता गादी आइज़नकोट ने रविवार को स्पष्ट आरोप लगाया कि नेतन्याहू चुनावी नतीजों को अमान्य और गैरकानूनी साबित करने के लिए एक पूर्व-नियोजित अभियान चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस अभियान के तहत जानबूझकर ऐसे संकेत फैलाए जा रहे हैं जैसे खाड़ी देश कतर विपक्षी दलों को परोक्ष समर्थन दे रहा हो। आइज़नकोट ने यह भी साझा किया कि सुरक्षा सेवा शिन बेट ने उन्हें मौजूदा स्थिति पर जानकारी दी है, लेकिन विस्तृत जांच पूरी करने के लिए एजेंसी को अभी और समय की आवश्यकता है।

शिन बेट ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि वह सभी राजनीतिक दलों के प्रभाव से पूरी तरह स्वतंत्र रहकर निष्पक्ष जांच कर रही है। दूसरी तरफ, कतर ने चुनाव परिणाम को प्रभावित करने के मकसद से किसी भी गतिविधि को वित्तपोषित करने के आरोपों का पुरजोर खंडन किया है। कतर के प्रभाव से जुड़े विवाद इज़राइली राजनीति में पहले भी हंगामा मचाते रहे हैं। पूर्व में सामने आए एक मामले में यह आरोप लगा था कि नेतन्याहू के करीबी सहायकों ने प्रधानमंत्री कार्यालय में कार्यरत रहने के दौरान कतर से पैसे लिए थे।

## अरब वोटरों पर निशाना और बढ़ता राजनीतिक ध्रुवीकरण
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नतीजों पर सवाल खड़े करके नेतन्याहू वास्तव में विपक्षी दलों और अरब नेतृत्व वाले दलों के बीच किसी भी संभावित समझौते को रोकने की रणनीति बना रहे हैं। यदि विपक्षी खेमा अरब दलों के साथ औपचारिक गठबंधन कर लेता है, तो नेतन्याहू की सत्ता से विदाई पूरी तरह तय हो जाएगी। यही वजह है कि नेतन्याहू ने खुले तौर पर यह तक कह दिया कि आइज़नकोट का अरब दलों के साथ हाथ मिलाना देशद्रोह के समान होगा।

इस बयानबाजी पर तीखा पलटवार करते हुए राम पार्टी के प्रमुख मंसूर अब्बास ने कहा कि गिरफ्तारियां पूरी तरह से अलोकतांत्रिक थीं और उनका एकमात्र उद्देश्य चुनाव परिणामों को प्रभावित करना था। नेतन्याहू के विरोधियों ने उन पर अरब दलों के खिलाफ डर का माहौल बनाने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि इस प्रचार अभियान का निशाना इज़राइल के अरब नागरिक भी बने, जो देश की कुल आबादी का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा हैं।

अरब दलों की संयुक्त सूची के नेता युसेफ जबरीन ने लिकुड के प्रचार अभियान पर सीधा सवाल उठाया। उन्होंने रेखांकित किया कि मतदान के दिन लिकुड और नेतन्याहू द्वारा प्रसारित की गई अधिकांश प्रचार सामग्री विशेष रूप से अरब मतदाताओं को निशाना बनाकर तैयार की गई थी। युसेफ जबरीन ने कहा, "संकट के क्षणों में वह अपने जाने-पहचाने हथकंडे पर लौट आते हैं: नस्लवादी उकसावे और अरब जनता को अवैध ठहराना।" अब जबकि अदालत की टिप्पणियों और संदिग्धों की रिहाई ने लिकुड के दावों की हवा निकाल दी है, सारा ध्यान बुधवार को परिणामों के प्रमाणीकरण और राष्ट्रपति की बैठकों पर टिक गया है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि इज़राइल में नई सरकार बनती है या देश एक बार फिर नए चुनाव के चक्रव्यूह में फंसेगा।

## इसका आप पर असर
इज़राइल में चुनाव के बाद गहराते राजनीतिक संकट और संभावित नेतृत्व परिवर्तन का असर पश्चिम एशिया की भू-राजनीति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर पड़ना तय है।

- **वैश्विक कूटनीति:** यदि इज़राइल में गठबंधन सरकार बदलती है तो क्षेत्रीय सुरक्षा नीतियों में बदलाव देखने को मिल सकता है। विदेशी सरकारों और व्यापारिक साझीदारों को नई सरकार के गठन तक अपनी द्विपक्षीय योजनाओं को रोकना पड़ सकता है।
- **आर्थिक अनिश्चितता:** सरकार गठन में देरी या दोबारा चुनाव की नौबत आने से इज़राइली मुद्रा और वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है। जो निवेशक इज़राइली तकनीकी क्षेत्र या सरकारी बॉन्ड में निवेश करते हैं, उन्हें राजनीतिक स्पष्टता आने तक सतर्क रहना होगा।
- **भारत में प्रभाव:** भारत और इज़राइल के बीच रक्षा, कृषि और नवाचार के क्षेत्र में गहरे रणनीतिक संबंध हैं। तेल अवीव में नई सरकार के स्वरूप पर निर्भर करेगा कि आने वाले महीनों में प्रस्तावित द्विपक्षीय समझौतों की गति कैसी रहती है।
- **घरेलू नागरिक स्थिरता:** चुनावी प्रक्रिया पर अविश्वास और अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाने वाले बयानों से इज़राइल के भीतर सामाजिक तनाव गहरा सकता है। देश की 20 प्रतिशत अरब आबादी के अधिकारों और उनके राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर नई बहस तेज होगी।

## ऐसा क्यों हुआ
यह राजनीतिक और कानूनी विवाद 27 अक्टूबर के मतदान में नेतन्याहू के गठबंधन द्वारा बहुमत खोने और मतदान से ठीक पहले नकदी बरामद होने के बाद शुरू हुआ। चुनावी अंकगणित में पिछड़ने के बाद लिकुड पार्टी ने जनादेश की वैधता पर सवाल उठाना शुरू कर दिया।

- **प्रत्यक्ष कारण:** मतदान शुरू होने से ठीक पहले नकदी से भरे लिफाफे मिलने के बाद पुलिस ने तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया था। लिकुड पार्टी ने बिना साक्ष्य के आरोप लगाया कि अरब नेतृत्व वाले दलों ने चुनाव में धांधली की है।
- **संसदीय सीटों का नुकसान:** नेतन्याहू का गुट 120 सीटों वाली संसद में 68 से घटकर मात्र 53 सीटों पर आ गया। बहुमत हाथ से फिसलने के कारण विपक्षी दलों और अरब पार्टियों के संभावित गठबंधन को रोकने के लिए इन आरोपों को हवा दी गई।
- **अदालत की जांच और रिहाई:** एक स्थानीय न्यायाधीश ने पुलिस जांच की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाते हुए दो संदिग्धों को रिहा कर दिया। इस न्यायिक झटके के कारण लिकुड द्वारा फैलाए जा रहे चुनावी चोरी के दावों की हवा निकल गई।
- **कतर से जुड़े आरोप:** विपक्ष पर कतर से गुप्त वित्तीय सहायता लेने के आरोप मढ़े गए, जबकि शिन बेट अभी इस मामले की निष्पक्ष जांच कर रही है और कतर ने भी इन दावों का पूरी तरह खंडन किया है।

## सवाल-जवाब

### 1. पुलिस ने कितने संदिग्धों को रिहा किया और कितनों की हिरासत बढ़ाई गई?
पुलिस ने तीन में से दो संदिग्धों को रिहा कर दिया है, जिसमें से एक को आठ दिन की नजरबंदी में रखा गया है। तीसरे संदिग्ध की हिरासत दो दिनों के लिए बढ़ाई गई है।

### 2. 27 अक्टूबर के चुनाव में बेंजामिन नेतन्याहू के गुट को कितनी सीटें मिलीं?
120 सदस्यीय नेसेट में नेतन्याहू के संसदीय गुट को 53 सीटें मिली हैं, जो पिछली संसद में उनके पास मौजूद 68 सीटों से काफी कम है।

### 3. नेतन्याहू के मुख्य प्रतिद्वंद्वी गादी आइज़नकोट के गठबंधन ने कितनी सीटें जीती हैं?
गादी आइज़नकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गुट ने 48 सीटें जीती हैं, जबकि अरब नेतृत्व वाले दलों ने 19 सीटें हासिल की हैं।

### 4. क्या चुनाव में विदेशी फंडिंग के आरोपों की कोई आधिकारिक जांच चल रही है?
हां, चुनाव आयोग के अनुरोध पर इज़राइल की आंतरिक सुरक्षा सेवा शिन बेट स्वतंत्र रूप से कतर से जुड़ी फंडिंग के आरोपों की जांच कर रही है।

### 5. चुनाव परिणाम आधिकारिक रूप से कब प्रमाणित किए जाएंगे?
चुनाव आयोग द्वारा मतदान के आधिकारिक परिणामों को बुधवार को औपचारिक रूप से प्रमाणित किया जाना तय है।

### 6. नतीजों के प्रमाणीकरण के बाद राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग क्या कदम उठाएंगे?
राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग सभी निर्वाचित दलों से मुलाकात करेंगे और सबसे मजबूत स्थिति वाले नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करेंगे।

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