यूक्रेन संघर्ष के बीच रूस में संसदीय मतदान शुरू, 450 सीटों वाली ड्यूमा पर टिकी दुनिया की निगाहें यूक्रेन युद्ध के बीच रूस में संसद के निचले सदन स्टेट ड्यूमा के चुनाव हो रहे हैं, जहां व्लादिमीर पुतिन समर्थित यूनाइटेड रशिया के दबदबे के बीच 450 सीटों पर फैसला होगा। यूक्रेन के साथ जारी सैन्य टकराव और पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच रूस में संसद के निचले सदन स्टेट ड्यूमा के सदस्यों को चुनने के लिए मतदान की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। शुक्रवार से रविवार तक चलने वाला यह तीन दिवसीय मतदान उस दौर में आयोजित किया जा रहा है, जब देश की अर्थव्यवस्था धीमी गति से जूझ रही है और अग्रिम मोर्चे से दूर रूसी तेल रिफाइनरियों तथा गोदामों को यूक्रेनी ड्रोन हमलों का सामना करना पड़ रहा है। इस माहौल में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के समर्थक राजनीतिक खेमे की जीत तय मानी जा रही है, जबकि सत्तारूढ़ यूनाइटेड रशिया पार्टी के सदन में अपने पूर्ण प्रभुत्व को बरकरार रखने की संभावना है। सरकारी अधिकारी जहां इस कवायद को जनमत की स्वतंत्र अभिव्यक्ति बता रहे हैं, वहीं आलोचकों का तर्क है कि वास्तविक विपक्ष की अनुपस्थिति ने चुनाव के नतीजों को पहले से ही तय कर दिया है। रूस में कैसे होता है स्टेट ड्यूमा का चुनाव रूसी संसदीय व्यवस्था के तहत स्टेट ड्यूमा की कुल 450 सीटों के लिए जटिल चुनावी व्यवस्था अपनाई जाती है। इस प्रणाली में संसद की आधी यानी 225 सीटें आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के आधार पर पार्टी लिस्ट के जरिए भरी जाती हैं, जबकि शेष 225 सीटों पर विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में उम्मीदवारों के बीच सीधा एक-दूसरे से मुकाबला होता है। मतदान के लिए देश भर में करीब 11.1 करोड़ मतदाता पंजीकृत हैं, जिन्हें पारंपरिक मतपत्रों के अलावा इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग की सुविधा भी दी गई है। संसदीय चुनाव के साथ-साथ कई संघीय क्षेत्रों में स्थानीय स्तर की सरकार चुनने के लिए भी वोट डाले जा रहे हैं। इस राष्ट्रव्यापी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के दौरान देश के 11 क्षेत्रों में गवर्नर पदों के लिए और 39 क्षेत्रों में स्थानीय विधानसभाओं के नए सदस्यों के चयन के लिए मतदान संपन्न कराया जा रहा है। तीन दिनों तक फैले इस मतदान कार्यक्रम का मकसद मतदान केंद्रों पर भीड़ को नियंत्रित करना और भागीदारी बढ़ाना बताया गया है। यूनाइटेड रशिया का संसद में प्रभुत्व और प्रमुख चेहरे क्रेमलिन समर्थक राजनीतिक दलों के विलय के बाद साल 2001 में स्थापित हुई यूनाइटेड रशिया पार्टी लंबे समय से व्लादिमीर पुतिन की नीतियों की सबसे मजबूत ढाल रही है। साल 2021 में हुए पिछले संसदीय चुनाव में इस पार्टी ने ड्यूमा की दो-तिहाई से अधिक सीटों पर शानदार जीत हासिल करके सदन पर पूर्ण नियंत्रण कायम किया था। वर्तमान चुनावी चक्र में भी पार्टी की इसी मजबूत स्थिति के कायम रहने का आकलन किया जा रहा है। इस बार पार्टी ने अपने उम्मीदवारों की सूची में देश के शीर्ष राजनीतिक और प्रशासनिक चेहरों को आगे किया है। पार्टी सूची में विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और मॉस्को के मेयर सर्गेई सोब्यानिन के नाम प्रमुखता से शामिल किए गए हैं। इनके साथ ही यूक्रेनी ड्रोन हमले में गंभीर रूप से जख्मी हुए युद्ध संवाददाता येवगेनी पोद्दुबनी को भी पार्टी ने अपने प्रमुख चेहरों में जगह दी है। पार्टी के तमाम प्रत्याशियों ने यूक्रेन में चल रहे सैन्य अभियान और व्लादिमीर पुतिन के रणनीतिक फैसलों को पूरा समर्थन देने का संकल्प दोहराया है। मैदान में डटे विपक्षी दल और युद्ध विरोधी आवाजें यूनाइटेड रशिया के अलावा चुनाव मैदान में मौजूद अधिकांश दलों को व्यवस्था के भीतर का विपक्ष माना जाता है, जो औपचारिक रूप से अलग पहचान रखते हुए भी राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े अहम मुद्दों पर सरकार के पक्ष में ही मतदान करते आए हैं। इस पूरे परिदृश्य में याब्लोको पार्टी ही एकमात्र पंजीकृत राजनीतिक दल था, जिसने खुलकर यूक्रेन युद्ध का विरोध किया था। हालांकि अगस्त के महीने में रूस की सुप्रीम कोर्ट ने एक कड़े आदेश के तहत याब्लोको पार्टी को पार्टी-लिस्ट चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित कर दिया। अदालत ने अपनी व्यवस्था में कहा कि पार्टी का युद्ध-विरोधी रुख रूस की क्षेत्रीय अखंडता को चुनौती देने और उसका उल्लंघन करने के समान है। इस अदालती झटके के बाद अब याब्लोको के कुछ उम्मीदवार केवल चुनिंदा सिंगल सीट निर्वाचन क्षेत्रों से व्यक्तिगत तौर पर अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर कम्युनिस्ट पार्टी 1990 के दशक से ही रूसी संसद के भीतर मुख्य विपक्षी ताकत की भूमिका निभाती रही है। गेन्नाडी ज्यूगानोव के नेतृत्व वाली यह पार्टी सामाजिक और आर्थिक नीतियों पर सरकार की आलोचना करती है, परंतु यह व्लादिमीर पुतिन की सीधी आलोचना से पूरी तरह बचती है और यूक्रेन में सैन्य कार्रवाई का खुलकर समर्थन करती है। संसद में लंबे समय से मौजूदगी रखने वाली लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDPR) भी राष्ट्रवादी रुख के साथ चुनावी मुकाबले में डटी हुई है। संसद में छोटे दलों की भागीदारी और समीकरण रूस के विधायी परिदृश्य में लगभग दो दशकों से सक्रिय ए जस्ट रशिया पार्टी भी सोशल-डेमोक्रेटिक विचारधारा के आधार पर चुनाव में उतरी है और उसने भी युद्ध के प्रति पूर्ण समर्थन जाहिर किया है। वहीं साल 2021 के चुनावों से ठीक पहले अस्तित्व में आई न्यू पीपल पार्टी ने खुद को युवाओं और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों के उदारवादी मंच के रूप में स्थापित किया है। पिछले चुनाव में पांच प्रतिशत से कुछ अधिक वोट हासिल करके यह दल ड्यूमा में अपना छोटा गुट बनाने में कामयाब रहा था। इन मुख्य दलों के अतिरिक्त कई अन्य छोटे दल भी स्टेट ड्यूमा में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए जोर-आजमाइश कर रहे हैं। इनमें मुख्य रूप से कम्युनिस्ट्स ऑफ रूस, पार्टी ऑफ पेंशनर्स, ग्रीन पार्टी, पार्टी ऑफ डायरेक्ट डेमोक्रेसी और मदरलैंड पार्टी शामिल हैं। ये सभी दल आनुपातिक सीमा पार करके संसद में सीटें हासिल करने की जुगत में लगे हैं। क्रेमलिन के लिए इन चुनावों के राजनीतिक मायने यूक्रेन के खिलाफ सैन्य संघर्ष शुरू होने के बाद रूस में यह पहला संसदीय चुनाव है, जिस कारण इसका राजनीतिक महत्व बहुत अधिक बढ़ गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि व्लादिमीर पुतिन ने इस चुनाव को सैन्य अभियान के जनसमर्थन के परीक्षण के रूप में पेश किया है। अगस्त में आयोजित यूनाइटेड रशिया के पार्टी सम्मेलन में उन्होंने पार्टी कैडर से यूक्रेन युद्ध में पूर्ण विजय हासिल करने के लिए हर संभव प्रयास करने का खुला आह्वान किया था। साल 2000 में व्लादिमीर पुतिन के सत्ता संभालने के बाद से यूनाइटेड रशिया ने स्टेट ड्यूमा के प्रत्येक चुनाव में भारी अंतर से जीत दर्ज की है। हालांकि अतीत में कई चुनावों के परिणामों पर विवाद भी उठे हैं। उदाहरण के तौर पर साल 2011 के संसदीय चुनावों में बड़े पैमाने पर मतों में हेरफेर के आरोप लगे थे, जिसके चलते देश भर में भारी आक्रोश फैला था और व्लादिमीर पुतिन के शासनकाल के सबसे बड़े सड़क प्रदर्शन देखने को मिले थे। इस बार की चुनावी प्रक्रिया यह तय करेगी कि युद्ध की छाया में संसद का आगामी स्वरूप कैसा होगा। इसका आप पर असर रूस के इस संसदीय चुनाव के नतीजे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक संतुलन पर सीधा असर डालेंगे। • वैश्विक ऊर्जा और ईंधन बाजार: रूसी संसद में युद्ध समर्थक बहुमत कायम रहने से पश्चिमी देशों के प्रतिबंध और जवाबी व्यापारिक पाबंदियां बरकरार रहेंगी। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहेगा, जिसका असर आयात लागत पर पड़ेगा। • भारतीय विदेश नीति और व्यापार: भारत के लिए रूस से रियायती दरों पर कच्चा तेल और सैन्य उपकरण खरीदने की मौजूदा व्यवस्था बिना किसी रुकावट के जारी रहेगी। नई दिल्ली को मॉस्को और पश्चिमी देशों के बीच संतुलन बनाए रखने की अपनी कूटनीतिक रणनीति पर आगे भी कायम रहना होगा। • यूक्रेन संघर्ष की दिशा: ड्यूमा में व्लादिमीर पुतिन के समर्थक दलों का दबदबा रहने से सैन्य बजट और रक्षा नीतियों को संसद से तत्काल मंजूरी मिलती रहेगी। इसका मतलब है कि निकट भविष्य में युद्धविराम या सैन्य संघर्ष रुकने की संभावनाएं काफी कम रहेंगी। • रूसी नागरिकों के अधिकार: आंतरिक मोर्चे पर युद्ध-विरोधी विपक्ष पर अदालती रोक और पाबंदियां आगे भी सख्त बनी रहेंगी। रूसी नागरिकों के लिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और स्वतंत्र राजनीतिक विकल्पों का दायरा और अधिक सिमट जाएगा। ऐसा क्यों हुआ यह चुनाव रूस के संवैधानिक कार्यक्रम का नियमित हिस्सा है, लेकिन यूक्रेन युद्ध और आर्थिक दबावों ने इसे असाधारण बना दिया है। • संवैधानिक समयसीमा का पालन: स्टेट ड्यूमा का पांच वर्षीय कार्यकाल समाप्त होने के कारण चुनाव का आयोजन निर्धारित समय पर कराया जा रहा है। क्रेमलिन युद्ध के बावजूद सामान्य शासन व्यवस्था दिखाने के लिए संवैधानिक प्रक्रिया को जारी रखना चाहता है। • सैन्य अभियान के लिए राजनीतिक वैधता: व्लादिमीर पुतिन इस चुनाव को यूक्रेन में चल रहे विशेष सैन्य अभियान के लिए जनता के खुले समर्थन के रूप में पेश करना चाहते हैं। संसद में यूनाइटेड रशिया की प्रचंड जीत से युद्ध संबंधी बजट और फैसलों को निर्बाध मंजूरी मिलती रहेगी। • विपक्ष का सुनियोजित खात्मा: सुप्रीम कोर्ट के आदेश से युद्ध-विरोधी याब्लोको पार्टी को पार्टी-सूची से बाहर कर दिया गया, जिससे वास्तविक असहमति वाली आवाजें मुकाबले से बाहर हो गईं। संसद में मौजूद अन्य दल पहले से ही यूक्रेन युद्ध और विदेश नीति पर सरकार का समर्थन करते हैं। सवाल-जवाब 1. रूस की स्टेट ड्यूमा में कुल कितनी सीटें हैं? रूस के संसद के निचले सदन स्टेट ड्यूमा में कुल 450 सीटें हैं। 2. स्टेट ड्यूमा के सदस्यों का चुनाव किस प्रणाली से होता है? 225 सीटें पार्टी लिस्ट के जरिए आनुपातिक रूप से और बाकी 225 सीटें निर्वाचन क्षेत्रों में सीधे मुकाबले से चुनी जाती हैं। 3. रूस में कितने मतदाता वोट डालने के पात्र हैं? इस चुनाव में करीब 11.1 करोड़ पंजीकृत मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग करने के योग्य हैं। 4. संसदीय चुनाव के साथ और कौन-कौन से चुनाव हो रहे हैं? 11 क्षेत्रों में गवर्नर और 39 क्षेत्रों में स्थानीय विधानसभाओं के सदस्यों के लिए भी मतदान हो रहा है। 5. याब्लोको पार्टी को चुनाव से क्यों हटाया गया? सुप्रीम कोर्ट ने याब्लोको के युद्ध-विरोधी रुख को रूस की क्षेत्रीय अखंडता के उल्लंघन के समान मानकर पार्टी-लिस्ट से बाहर कर दिया। 6. यूनाइटेड रशिया पार्टी की स्थापना कब हुई थी? यूनाइटेड रशिया की स्थापना साल 2001 में क्रेमलिन समर्थक दलों के विलय के जरिए हुई थी। https://trendkia.com/world/yukrena-sngharsha-ke-bicha-russia-men-snsadiya-matadana-shuru-450-siton-vali-state-duma-para-tiki-duniya-ki-nigahen-33883 TrendKia — Har trend, sabse pehle.