ज्योतिष और रत्नशास्त्र में हर ग्रह को एक खास पत्थर से जोड़कर देखा जाता है और माना जाता है कि सही रत्न धारण करने से जुड़े ग्रह का अशुभ असर कम हो जाता है। केतु ग्रह से जुड़ा ऐसा ही एक रत्न है लहसुनिया, जिसे कैट्स आई के नाम से भी जाना जाता है। अपनी अनोखी चमक और बीच में उभरी हुई एक खास रेखा के लिए पहचाना जाने वाला यह रत्न रत्नशास्त्र की दुनिया में बेहद प्रभावशाली माना जाता है। मान्यता है कि जिन लोगों की कुंडली में केतु कमजोर या अशुभ स्थिति में बैठा हो, उन्हें लहसुनिया जरूर धारण करना चाहिए। हालांकि यह रत्न इतना असरदार माना जाता है कि इसे बिना किसी जानकार ज्योतिषी की सलाह के धारण करने की सलाह नहीं दी जाती।
किन लोगों को धारण करना चाहिए लहसुनिया
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिन लोगों की कुंडली में केतु की महादशा या अंतर्दशा चल रही होती है, उनके लिए लहसुनिया काफी फायदेमंद माना जाता है। ऐसे दौर में केतु के प्रभाव को संतुलित करने के लिए यह रत्न सहायक माना जाता है। इसके अलावा अगर किसी व्यक्ति के जीवन में केतु की वजह से बार-बार काम अटकते हैं, फैसले टलते रहते हैं या मन लगातार बेचैन और अशांत रहता है, तो ऐसे में भी ज्योतिषी की सलाह लेकर लहसुनिया धारण किया जा सकता है। जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प दोष जैसी स्थिति बनी होती है, उनके लिए भी यह रत्न लाभकारी माना जाता है। यानी सिर्फ केतु की महादशा ही नहीं, बल्कि कुंडली में बनने वाले अलग-अलग दोष भी इस रत्न को धारण करने की एक बड़ी वजह माने जाते हैं।
किन राशियों के लिए है फायदेमंद
राशि के हिसाब से देखें तो वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर और कुंभ राशि के जातक लहसुनिया धारण कर सकते हैं। हालांकि सिर्फ राशि देखकर यह फैसला नहीं लेना चाहिए, क्योंकि कुंडली में ग्रहों की चाल, दशा और कई दूसरे पहलू भी अहम भूमिका निभाते हैं। इसीलिए इनमें से किसी भी राशि के जातक को यह रत्न धारण करने से पहले किसी अनुभवी ज्योतिषी से अपनी पूरी कुंडली दिखाकर सलाह लेनी चाहिए, ताकि यह पता चल सके कि उनके लिए यह रत्न वाकई उपयुक्त है या नहीं। बिना पूरी कुंडली जांचे केवल राशि के आधार पर रत्न धारण करना सही तरीका नहीं माना जाता।
लहसुनिया धारण करने के फायदे
रत्नशास्त्र में लहसुनिया से जुड़े कई फायदे बताए गए हैं। अगर इसे सही तरीके से धारण किया जाए तो यह केतु के अशुभ प्रभाव को काफी हद तक कम कर सकता है। कहा जाता है कि इसे पहनने से व्यक्ति के कॉन्फिडेंस में भी बढ़ोतरी होती है, जिससे रोजमर्रा के फैसले लेने में झिझक कम होती है। इसके साथ ही मान्यता है कि लहसुनिया धारण करने से मानसिक तनाव में भी कमी आती है, जिससे व्यक्ति ज्यादा शांत और स्थिर महसूस करता है। इस रत्न की मदद से फैसले लेने की क्षमता भी मजबूत होने की बात कही जाती है, यानी सही समय पर सही निर्णय लेना आसान हो जाता है। इसके अलावा लहसुनिया की मदद से नेगेटिव एनर्जी को काफी हद तक कम करने की भी मान्यता है, जिससे घर और मन दोनों में सकारात्मकता बनी रहती है।
धारण करने की सही विधि
रत्नशास्त्र के अनुसार लहसुनिया को हमेशा चांदी या पंचधातु में ही जड़वाकर पहनना शुभ माना जाता है। नियम के मुताबिक इसे हमेशा दाहिने हाथ की मध्यमा यानी बीच वाली उंगली में ही धारण करना चाहिए। मान्यता है कि अगर इस रत्न को शनिवार के दिन धारण किया जाए तो इसका असर और भी बेहतर माना जाता है। रत्न पहनने से पहले इसे गंगाजल और कच्चे दूध से शुद्ध कर लेना चाहिए। इसके बाद धारण करते समय ॐ कें केतवे नमः मंत्र का 108 बार जाप करने की सलाह दी जाती है। इन नियमों का पालन करने से माना जाता है कि रत्न अपना पूरा असर दिखा पाता है, जबकि इन्हें नजरअंदाज करने पर इसका फायदा उतना नहीं मिल पाता जितना उम्मीद की जाती है।











