क्या है पूरा विवाद
ओमान की खाड़ी में एक वाणिज्यिक जहाज पर हुए अमेरिकी सैन्य हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद देश में सियासी सुगबुगाहट तेज हो गई है. इस घटना और उसके बाद भारत व अमेरिका के विदेश मंत्रियों के बीच हुई फोन वार्ता को लेकर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अमेरिकी रुख पर गहरी नाराजगी जाहिर की है. उनके निशाने पर सिर्फ वॉशिंगटन नहीं, बल्कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी रहे.
थरूर ने अमेरिकी बयान को बताया 'सदमा देने वाला'
थरूर की नाराजगी की जड़ में वह आधिकारिक बयान है, जो जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की बातचीत के बाद अमेरिका की ओर से जारी किया गया. उनका कहना है कि इस बयान में मारे गए निर्दोष भारतीयों के लिए न तो अफसोस था और न ही संवेदना का कोई शब्द.
सोशल मीडिया मंच X पर उन्होंने लिखा, “अमेरिका का यह आधिकारिक बयान पढ़कर गहरा सदमा लगा है, जिसमें बेगुनाह भारतीयों की जान जाने पर अफ़सोस या संवेदना का ज़रा भी ज़िक्र नहीं है. कोई ‘दोस्त’ और रणनीतिक साझेदार इतना असंवेदनशील कैसे हो सकता है? क्या नियमों का पालन न करने वाले कमर्शियल जहाज़ को किसी दूसरे, जान न लेने वाले तरीके से नहीं रोका जा सकता था? क्या आम क्रू सदस्यों को मारने के मकसद से मिसाइल दागे बिना जहाज़ के प्रोपल्शन या स्टीयरिंग को बेकार नहीं किया जा सकता?”
उन्होंने भारतीय नाविकों की मौजूदगी की ओर ध्यान दिलाते हुए चेतावनी भरे लहजे में आगे लिखा, “इन अहम समुद्री रास्तों से गुज़रने वाले लगभग हर मर्चेंट जहाज़ पर भारतीय क्रू सदस्य होते हैं. क्या अब अमेरिकी मिसाइलों के लिए वे सब भी आसान शिकार माने जाएंगे? यह रवैया मंज़ूर करने लायक नहीं है और मुझे उम्मीद है कि एस. जयशंकर ने मार्को रुबियो ये यह बात कही होगी.”
जयशंकर ने रुबियो के सामने रखा मुद्दा
दूसरी ओर, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को साफ किया कि उन्होंने यह मामला अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के समक्ष सीधे उठाया है. इस समय यूरोप दौरे पर मौजूद जयशंकर ने रुबियो से फोन पर बातचीत की और ओमान की खाड़ी में तीन भारतीय नाविकों की मौत पर भारत का कड़ा विरोध जताया.
जयशंकर ने सोशल मीडिया पर कहा, “आज अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बात हुई. मैंने ओमान की खाड़ी में अमेरिकी नौसेना के हमलों के खिलाफ भारत का कड़ा विरोध दोहराया हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हुई है.” उन्होंने जोड़ा, “वाणिज्यिक जहाजों पर इस तरह की घातक कार्रवाई उचित नहीं है.”
अमेरिकी अधिकारी तलब
इस कूटनीतिक तनातनी से एक दिन पहले, शुक्रवार को भारत ने नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास के प्रभारी अधिकारी Jason Meeks को तलब किया था. उन्हें दो टूक बताया गया कि ओमान तट के पास भारतीय चालक दल वाले वाणिज्यिक जहाजों पर अमेरिकी सेना के घातक हमले किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं हैं.
तीन हमले, एक के बाद एक
पहली घटना 8 जून की है, जब अमेरिकी बलों ने पलाऊ के ध्वज वाले तेल टैंकर 'Maryvex' को निशाना बनाया. राहत की बात यह रही कि इस जहाज पर सवार सभी 24 भारतीय नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया.
इसके ठीक दो दिन बाद, 10 जून को अमेरिका ने पलाऊ के ही ध्वज वाले एक अन्य टैंकर 'Setebello' पर हमला किया. इस जहाज पर मौजूद 24 भारतीय नाविकों में से तीन की मौत हो गई — यही वह घटना है जिसने पूरे विवाद को भड़का दिया.
इनके अलावा, गिनी-बिसाऊ के ध्वज वाले टैंकर 'Jalveer' पर भी बृहस्पतिवार को हमला किया गया था. इस जहाज पर कुल 20 भारतीय नागरिक सवार थे.













