साल 2026 में शनि देव 27 जुलाई से अपनी चाल उलटी कर लेंगे, यानी वक्री गोचर करेंगे, और यह स्थिति लगभग साढ़े चार महीने तक बनी रहने वाली है। ज्योतिष शास्त्र में शनि को कर्मफलदाता माना जाता है, इसलिए जब भी यह ग्रह अपनी चाल बदलता है तो इसका प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर सीधा नजर आता है।
कब से कब तक चलेगी शनि की उलटी चाल
हिंदू पंचांग के मुताबिक, शनि देव 27 जुलाई 2026 से वक्री चाल में गोचर करना शुरू करेंगे। यह वक्री अवस्था दिसंबर तक बनी रहेगी और 11 दिसंबर की सुबह करीब 5 बजे शनि देव फिर से अपनी सीधी चाल में लौट आएंगे। इस तरह देखा जाए तो शनि देव कुल मिलाकर लगभग 138 दिनों तक वक्री अवस्था में विराजमान रहने वाले हैं। ज्योतिष में वक्री ग्रह का मतलब होता है कि वह ग्रह पृथ्वी से देखने पर उलटी दिशा में चलता हुआ प्रतीत होता है, और इस दौरान उसका प्रभाव सामान्य से कहीं ज्यादा तीव्र माना जाता है।
किन राशियों पर सबसे ज्यादा असर
इस समय शनि देव की साढ़ेसाती तीन राशियों पर चल रही है, कुंभ राशि, मेष राशि और मीन राशि। जब शनि की वक्री चाल इन राशियों की साढ़ेसाती के साथ मिलती है, तो ज्योतिष में इसे खासतौर पर संवेदनशील समय माना जाता है, इसलिए इन तीनों राशि वालों को अपने कामकाज, सेहत और रिश्तों को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है।
शनि की उलटी चाल में क्या करें, ये हैं जरूरी उपाय
ज्योतिष के अनुसार शनि देव की वक्री अवस्था के दौरान कुछ खास उपाय अपनाकर उनके नकारात्मक प्रभाव को कम किया जा सकता है। इनमें शामिल हैं
- शनि की वक्री अवधि में शिव चालीसा का नियमित पाठ करने से शनि देव प्रसन्न होते हैं।
- शनि के बुरे प्रभाव को कम करने के लिए शनिवार के दिन पीपल के पेड़ की पूजा करनी चाहिए।
- रोजाना भागवत गीता का पाठ करने से भी शनि के अशुभ असर में कमी आती है।
- शनिवार के दिन हनुमान जी, शिव जी और शनि देव की विधिवत पूजा करनी चाहिए।
- शाम के समय सरसों के तेल में काला तिल मिलाकर पेड़ के सामने दीपक जलाना शुभ माना जाता है।
- घर के बुजुर्गों और काम करने वाले लोगों के साथ अच्छा व्यवहार रखें, उनका अपमान न करें।
- शनिवार को पीपल के पेड़ और शमी के पेड़ में जल चढ़ाना चाहिए।
- शनिवार के दिन काले उड़द की दाल, सरसों का तेल और काले रंग के कपड़ों का दान बेहद शुभ माना जाता है।
- शनि की वक्री अवधि में शमी के पेड़ की पूजा करना भी लाभकारी बताया गया है।
- जरूरतमंद और गरीब लोगों की मदद करें और उन्हें भोजन कराएं।
- हनुमान चालीसा और शिव चालीसा का रोजाना पाठ करने से भी राहत मिलती है।
- ॐ शं शनिश्चराय नमः मंत्र का 108 बार जाप करने से शनि देव का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
- शनि देव को प्रसन्न रखने के लिए शनिवार के दिन काले रंग के वस्त्र पहनना बताया गया है।
- इस दौरान सुंदरकांड का पाठ करने से जीवन की कठिनाइयों से मुक्ति मिल सकती है।
ज्योतिष में यह भी माना जाता है कि शनि देव न्यायप्रिय ग्रह हैं और व्यक्ति के कर्मों के अनुसार ही फल देते हैं, इसलिए इस अवधि में ईमानदारी, धैर्य और अनुशासन बनाए रखने की सलाह दी जाती है।



















