रबी के आने वाले मौसम को ध्यान में रखते हुए किसानों ने खेतों में गेहूं की बुवाई और जमीन तैयार करने का काम तेज कर दिया है। कृषि विज्ञान केंद्र के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. नंदन सिंह ने किसानों को आगाह किया है कि अगर सही समय, प्रमाणित बीज और वैज्ञानिक तकनीकों का तालमेल बैठाया जाए, तो न केवल फसलों की लागत घटाई जा सकती है बल्कि पैदावार और मुनाफे में भी उल्लेखनीय इजाफा हो सकता है। खेती में अंधाधुंध रासायनिक खादों का प्रयोग करने के बजाय जमीन की वास्तविक जरूरतों को समझना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
बुवाई से पहले खेत की मिट्टी की वैज्ञानिक जांच कराएं
डॉ. नंदन सिंह के अनुसार गेहूं बोने से पहले खेत की मिट्टी की जांच कराना बेहद आवश्यक कदम है। इसके लिए एक एकड़ के रकबे में चार से पांच अलग-अलग स्थानों का चयन करके 15 से 20 सेंटीमीटर यानी 6×4×6 इंच की गहराई से मिट्टी का नमूना एकत्र करना चाहिए। इन सभी नमूनों को एक साथ अच्छी तरह मिलाकर मृदा परीक्षण विभाग अथवा कृषि विज्ञान केंद्र की प्रयोगशाला में जांच हेतु भेजें। प्रयोगशाला से मिलने वाली सॉइल हेल्थ रिपोर्ट के आधार पर ही पोषक तत्वों और उर्वरकों की संतुलित मात्रा खेत में डालनी चाहिए। ऐसा करने से अनावश्यक खाद पर होने वाला खर्च रुकता है और मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी सुरक्षित रहती है।
फसल अवशेषों का प्रबंधन और सीधी बुवाई की तकनीक
खेत तैयार करते समय पिछली फसल के बचे हुए अवशेषों को आग के हवाले करने के बजाय उनका जैविक समाधान निकालना चाहिए। डॉ. सिंह ने बताया कि पूसा डीकंपोजर का छिड़काव करके इन अवशेषों को खेत के भीतर ही सड़ाकर जैविक खाद में बदला जा सकता है। इसके अलावा, परंपरागत कल्टीवेटर या रोटावेटर से बार-बार जुताई करने से किसानों का डीजल और कीमती समय दोनों बेवजह बर्बाद होते हैं। सुपर सीडर अथवा ज़ीरो टिल जैसी आधुनिक कृषि मशीनों के उपयोग से सीधे बुवाई की जा सकती है, जिससे जुताई का भारी खर्च पूरी तरह बच जाता है।
उन्नत किस्मों का चुनाव बढ़ाएगा 25 प्रतिशत तक उत्पादन
फसल की कुल पैदावार काफी हद तक इस बात पर टिकी होती है कि बीज किस गुणवत्ता का है। प्रमाणित और उन्नतशील बीजों की मदद से सामान्य उत्पादन में 20 से 25 प्रतिशत तक का उछाल दर्ज किया जा सकता है। विश्वविद्यालय स्तर पर तैयार की गई उच्च उपज क्षमता वाली किस्में, जैसे डीबीडब्ल्यू 187, डीबीडब्ल्यू 222 और एचडी 2967, किसानों के लिए बेहद लाभकारी सिद्ध होती हैं। बुवाई से पूर्व पूरी जांच-परख के बाद ही प्रमाणित किस्म के बीजों का चयन करना चाहिए ताकि अंकुरण और बालियों का विकास बेहतर हो सके।
बुवाई का सही समय, तापमान और कतारों की दूरी
गेहूं की बुवाई के लिए नवंबर का महीना सबसे मुफीद समय माना जाता है, जब वायुमंडलीय तापमान 20 से 25 डिग्री सेल्सियस के दायरे में बना रहता है। बुवाई के दौरान कतार से कतार के बीच लगभग 20 सेंटीमीटर का फासला रखना चाहिए और बीज को जमीन के भीतर 4 से 5 सेंटीमीटर की गहराई पर डालना चाहिए। आधुनिक मशीनों के प्रयोग से बीजों का अंकुरण एक समान और मजबूत होता है, जिससे पौधे शुरुआती दौर से ही स्वस्थ रहते हैं।



















