ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाते हुए चीन ने अपने उत्तर-पश्चिमी इलाके में स्थित तकलीमाकान रेगिस्तान के बेहद गहरे भूगर्भीय हिस्सों से हाइड्रोकार्बन निकालने के काम में बड़ी सफलता हासिल की है। शिनजियांग उइगर स्वायत्त क्षेत्र के तारिम बेसिन में फैला फुमान ऑयलफील्ड देश के सबसे अहम ऊर्जा ठिकानों के रूप में उभर रहा है। अत्यधिक कठोर जलवायु और दुर्गम रेतीले विस्तार के नीचे स्थित इस क्षेत्र में ड्रिलिंग तकनीकों का सहारा लेकर हजारों मीटर की गहराई से हाइड्रोकार्बन निकाला जा रहा है। अब तक इस विशाल कॉम्प्लेक्स से कुल 2.686 करोड़ टन तेल और गैस का संचयी उत्पादन दर्ज किया जा चुका है, जिसका संचालन चाइना नेशनल पेट्रोलियम कॉरपोरेशन यानी सीएनपीसी संभाल रही है।
रेगिस्तान के नीचे 1 अरब टन हाइड्रोकार्बन का विशाल अनुमान
भौगोलिक दृष्टि से यह पूरा ढांचा चीन के सबसे बड़े अल्ट्रा-डीप और रेगिस्तानी भंडार के रूप में दर्ज है। यहां मौजूद तेल और प्राकृतिक गैस की परतें जमीन की सतह से 6,000 मीटर से लेकर 10,000 मीटर की अभूतपूर्व गहराई के बीच फैली हुई हैं। पारंपरिक खनन के मुकाबले इतनी भीषण गहराई पर तापमान और अत्यधिक दबाव के चलते खुदाई करना तकनीकी रूप से बेहद पेचीदा माना जाता है। पेट्रोचाइना के आकलन के मुताबिक, इस समूचे बेसिन में 1 अरब टन से भी अधिक ईंधन संसाधन समाए होने की उम्मीद है। वैश्विक ऊर्जा बाजार में लगातार बने रहने वाले उतार-चढ़ाव और अनिश्चितताओं के बीच अपनी घरेलू निर्भरता बढ़ाने के मकसद से वहां लगातार उत्पादन क्षमता का विस्तार किया जा रहा है।
सैकड़ों गहरे कुओं का जाल और रिकॉर्ड उत्पादन
तकनीकी विस्तार की बात करें तो फुमान ऑयलफील्ड के भीतर अब तक 485 अल्ट्रा-डीप कुओं की खुदाई पूरी की जा चुकी है। इस विशाल नेटवर्क में शामिल 464 कुएं वर्तमान में ऐसे हैं जो प्रत्येक कुएं के हिसाब से 10,000 टन से ज्यादा की दर से ईंधन दे रहे हैं। इसके अलावा, 133 कुओं ने अकेले ही 1 लाख टन से अधिक का भारी उत्पादन दर्ज कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इन गहन बोरवेल्स के सक्रिय हो जाने के बाद यह क्षेत्र न केवल विशाल रेगिस्तानी तेल क्षेत्र बन गया है, बल्कि गहरे भूगर्भीय ईंधन निष्कर्षण का सबसे प्रमुख केंद्र भी बन चुका है। अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए चीन जमीनी रेगिस्तानी क्षेत्रों के साथ-साथ गहरे समुद्री हिस्सों में भी कच्चे तेल के दोहन में लगा हुआ है।
8,080 मीटर गहराई से निकलीं 50 करोड़ साल पुरानी चट्टानें
हालिया तकनीकी प्रयोगों के दौरान फुमान परियोजना के तहत खोदे गए झेंटान-1 नामक बोरवेल से इंजीनियरों ने 8,080 मीटर, यानी लगभग 26,500 फीट, की गहराई से रॉक कोर के नमूने सफलतापूर्वक हासिल किए हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि निकाले गए ये पत्थर लगभग 50 करोड़ वर्ष पुराने कालखंड के हैं और सदियों से धरती की गहराइयों में दबे रहे हैं। उत्तर-पश्चिमी तारिम बेसिन के इलाके में 8 हजार मीटर से ज्यादा नीचे से इस तरह के वास्तविक नमूने सतह पर लाने की यह पहली घटना है। विशेषज्ञों के अनुसार, इन ठोस नमूनों की रासायनिक और संरचनात्मक जांच से यह स्पष्ट समझने में सहायता मिलेगी कि इतनी असाधारण गहराई में ईंधन की परतें कितनी परिपक्व हैं और उनकी वास्तविक मोटाई क्या है।
आयात पर भारी निर्भरता घटाने की दीर्घकालिक कोशिश
संपूर्ण तकलीमाकान इलाके में 50 करोड़ टन से अधिक प्रमाणित हाइड्रोकार्बन संपदा मौजूद होने की पुष्टि हो चुकी है। इस कुल भंडार का लगभग आधा हिस्सा 6,000 मीटर से भी अधिक गहरी परतों में मौजूद है। आठ किलोमीटर की गहराई तक ड्रिलिंग उपकरण पहुंचाना यह साफ करता है कि ऊर्जा सुरक्षा की दौड़ में अब उन जटिल भूगर्भीय स्तरों को भी तोड़ा जा रहा है जिन्हें पहले असंभव माना जाता था। चीन फिलहाल वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल का सबसे बड़ा आयातक बना हुआ है, जिसकी घरेलू खपत का 70 प्रतिशत से अधिक भाग दूसरे देशों से मंगाए जाने वाले तेल पर टिका है। आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2025 में चीन ने 55.773 करोड़ टन कच्चे तेल का रिकॉर्ड आयात किया था, जो प्रतिदिन औसतन 1.155 करोड़ बैरल बैठता है। इसके विपरीत, उसका अपना वार्षिक घरेलू क्रूड उत्पादन लगभग 21.5 करोड़ मीट्रिक टन के करीब है, और वह जमीन तथा समुद्र दोनों स्रोतों को मिलाकर रोजाना करीब 11 मिलियन बैरल कच्चा तेल निकाल रहा है।
















