मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में शिक्षा विभाग ने आठ शिक्षकों को नौकरी से बर्खास्त कर उनके खिलाफ पुलिस केस दर्ज कराया है। आरोप है कि इन शिक्षकों ने किसी और व्यक्ति की मार्कशीट पर अपना नाम लिखकर सरकारी शिक्षक की नौकरी हासिल की थी और करीब 19 साल तक इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी वेतन लेते रहे, जब तक कि मामला उजागर होकर अदालत तक नहीं पहुंच गया।
जिला शिक्षा विभाग की कार्रवाई के बाद दर्ज हुई FIR
जिला शिक्षा विभाग ने जांच पूरी होने के बाद इन आठों शिक्षकों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया। इसके बाद मंगलवार को ब्यावरा सिटी थाना पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज की। एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने सात फर्जी शिक्षकों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां से सभी को एक दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। इस कार्रवाई का मतलब यह है कि करीब दो दशक तक सरकारी शिक्षक के तौर पर तनख्वाह पाने वाले ये लोग अब क्लासरूम की बजाय अदालती कार्यवाही का सामना कर रहे हैं।
कर्नाटक की यूनिवर्सिटी से जुड़ा निकला फर्जीवाड़ा
थाना प्रभारी शिवराज सिंह चौहान के मुताबिक इन शिक्षकों ने फर्जी डीएड यानी डिप्लोमा इन एजुकेशन की मार्कशीट के आधार पर नौकरी हासिल की थी। स्कूल भर्ती नियमों के तहत डीएड ही न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता है, यही वजह है कि इस कोर्स की फर्जी मार्कशीट दिखाकर इन्हें आसानी से नौकरी मिल गई। मामले की आशंका होने पर शासन स्तर पर एक जांच टीम बनाई गई, जिसकी पड़ताल में सामने आया कि ये फर्जी मार्कशीट कर्नाटक स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी, मैसूर से जुड़ी हुई थीं।
आठ शिक्षकों पर चार धाराओं में मामला दर्ज
पुलिस ने पवन शर्मा, सुनील प्रजापति, हेमंत शर्मा, सावित्री दांगी, बने सिंह लववंशी, भारत सिंह यादव, हरिप्रसाद लववंशी और हिम्मत सिंह मीणा के खिलाफ कूट रचित दस्तावेज तैयार करने के आरोप में केस दर्ज किया है। इन पर धारा 318(4) यानी जालसाजी कर धोखा देना, धारा 336(3) यानी कूट रचित दस्तावेज तैयार करना, धारा 338 यानी मूल्यवान प्रतिभूति या बिल जैसे दस्तावेजों की कूट रचना और धारा 340(2) यानी कूट रचित दस्तावेज को असली बताकर इस्तेमाल करने की धाराएं लगाई गई हैं। ये चारों धाराएं मिलाकर दस्तावेज गढ़ने से लेकर उसे नौकरी जैसे फायदे के लिए असली बताकर इस्तेमाल करने तक की पूरी प्रक्रिया को कवर करती हैं, पुलिस का आरोप है कि इसी तरह इस मामले में हुआ। इसी केस में नामजद एक और शिक्षक रमेश चंद्र फिलहाल फरार है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है।
19 साल तक फर्जी दस्तावेज के सहारे चलती रही नौकरी
मार्कशीट के फर्जी होने की पुष्टि के बाद यह बात सामने आई कि सभी आरोपी शिक्षक करीब 19 साल से इन्हीं फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के भरोसे शिक्षा विभाग में नौकरी कर रहे थे। इतने लंबे समय तक किसी को इसका पता ही नहीं चला, नतीजा यह हुआ कि इन लोगों ने असली योग्य शिक्षकों को मिलने वाला पूरा वेतन, पेंशन लाभ और नौकरी की सुरक्षा वर्षों तक भोगी। मामला उजागर होते ही सभी शिक्षकों को गिरफ्तार कर पुलिस रिमांड पर ले लिया गया और पूछताछ में अभी और भी खुलासे होने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस अब यह भी पता लगा रही है कि क्या राज्य में और शिक्षक भी इसी तरह फर्जी मार्कशीट के दम पर नौकरी पा चुके हैं।
जिला शिक्षा अधिकारी की शिकायत पर केस, पूछताछ जारी
ब्यावरा सिटी थाना पुलिस के मुताबिक यह मामला जिला शिक्षा अधिकारी सावन पाटीदार के प्रतिवेदन पर आठ लोगों के खिलाफ दर्ज किया गया है। आरोपियों को पुलिस रिमांड पर लेने के बाद उनसे पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि इस पूछताछ और राज्यभर में चल रही व्यापक जांच के नतीजे यह तय करेंगे कि आगे और कितनी शिक्षक भर्तियां रद्द करने की जरूरत पड़ सकती है। आगे जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।











