गर्मियों और बदलते मौसम के दौरान बाजार में कटहल की आवक शुरू होते ही रसोइयों में इसकी सब्जी की मांग तेजी से बढ़ जाती है। अधिकांश लोग कटहल की रसेदार या सूखी सब्जी बड़े चाव से खाते हैं, परंतु इसी कटहल से तैयार किया गया पारंपरिक तीखा और चटपटा अचार भोजन की थाली में एक अलग ही जान फूंक देता है। भारतीय भोजन संस्कृति में सदियों से कटहल का अचार एक खास मुकाम रखता आया है। बुजुर्गों के हाथों के स्वाद और महक से भरा यह अचार यदि सही विधि से बनाया जाए, तो यह महीनों तक बिल्कुल ताजा बना रहता है और खराब भी नहीं होता।
तैयारी के लिए जरूरी सामग्री
घर में आधा किलो कटहल का स्वादिष्ट अचार तैयार करने के लिए आवश्यक सामग्रियों का उचित अनुपात में होना बेहद जरूरी है। इसके लिए 500 ग्राम छिला हुआ और मध्यम आकार के टुकड़ों में कटा ताजा कटहल लें। इसके साथ ही 1 कप शुद्ध सरसों का तेल, 2 बड़े चम्मच सौंफ, 2 बड़े चम्मच पीली अथवा काली सरसों (राई), 1 छोटा चम्मच मेथी दाना, 1 छोटा चम्मच कलौंजी (मंगरैल) और 1 छोटा चम्मच अजवाइन एकत्र कर लें।
मसालों के पाउडर में 1.5 छोटा चम्मच हल्दी पाउडर, 2 छोटे चम्मच लाल मिर्च पाउडर, आधा छोटा चम्मच हींग तथा खटास के लिए 2 बड़े चम्मच अमचूर पाउडर अथवा सिरका लें। इसके अतिरिक्त संपूर्ण मिश्रण में मिलाने के लिए स्वादानुसार नमक की आवश्यकता होगी।
कटहल को उबालने और धूप में सुखाने की प्रक्रिया
अचार बनाने की पहली और सबसे महत्वपूर्ण कड़ी कटहल की नमी को नियंत्रित करना है। सबसे पहले एक बर्तन में पानी गरम करें और उसमें थोड़ा सा नमक तथा आधा छोटा चम्मच हल्दी पाउडर मिला दें। इसके बाद कटे हुए कटहल के टुकड़ों को इस पानी में डालकर लगभग 4 से 5 मिनट तक उबालें। यहां ध्यान रखने योग्य बात यह है कि कटहल को केवल 50 प्रतिशत ही पकाना है ताकि वह नरम तो हो जाए लेकिन पूरी तरह गलकर बिखर न जाए।
उबालने के तुरंत बाद छलनी की मदद से सारा पानी छानकर अलग कर लें। इसके बाद उबले हुए टुकड़ों को किसी साफ सूती कपड़े पर अलग अलग फैलाकर 3 से 4 घंटे के लिए तेज धूप में सूखने दें। अचार को फफूंद और सड़न से बचाने के लिए टुकड़ों की ऊपरी नमी का पूरी तरह सूखना अनिवार्य होता है।
सुगंधित भुने मसाले तैयार करना
जब तक कटहल धूप में सूख रहा हो, तब तक अचार की जान माने जाने वाले साबुत मसालों को तैयार कर लें। एक कढ़ाई को धीमी आंच पर रखें और उसमें सौंफ, मेथी दाना, राई तथा अजवाइन डालें। इन सभी को धीमी आंच पर हल्का सा भूनें ताकि उनके अंदर मौजूद प्राकृतिक सीलन खत्म हो जाए। जब इन मसालों से हल्की और मनमोहक खुशबू आने लगे, तब गैस को बंद कर दें। मसालों के पूरी तरह ठंडा हो जाने पर उन्हें मिक्सी या खलबट्टे में डालकर दरदरा पीस लें। ध्यान रहे कि इनका बारीक पाउडर नहीं बनाना है, दरदरापन ही अचार के स्वाद को निखारता है।
सरसों के तेल का सही शोधन
पारंपरिक अचार में सरसों के तेल के तीखेपन को संतुलित करना आवश्यक होता है। इसके लिए एक अलग पैन में 1 कप सरसों का तेल लें और उसे मध्यम आंच पर तब तक गरम करें जब तक कि उसमें से हल्का धुआं न निकलने लगे। धुआं उठते ही आंच तुरंत बंद कर दें। तेल को एकदम ठंडा न होने दें, बल्कि जब वह हल्का गुनगुना रह जाए, तब उसका उपयोग मिश्रण में करें।
मसालों का संयोजन और अचार का भंडारण
धूप में अच्छी तरह सूख चुके कटहल के टुकड़ों को एक बड़े और सूखे बर्तन में निकालें। अब इसमें पहले से पिसे हुए दरदरे भुने मसाले, साबुत कलौंजी, हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, हींग, स्वादानुसार नमक और खटास के लिए अमचूर पाउडर या सिरका डालें। इसके बाद ऊपर से तैयार किया गया गुनगुना सरसों का तेल धीरे धीरे उड़ेलें।
चम्मच अथवा साफ हाथों से पूरे मिश्रण को अच्छी तरह तब तक चलाएं जब तक कि तेल और मसालों की एक समान परत कटहल के प्रत्येक टुकड़े पर पूरी तरह न चढ़ जाए। मसालेदार टुकड़ों को कांच के साफ और सूखे जार में भरकर रख दें। कुछ ही दिनों में मसाले कटहल के भीतर तक समा जाते हैं और बेहद लजीज अचार खाने के लिए तैयार हो जाता है।



















