भारतीय स्ट्रीट फूड और पारंपरिक स्नैक्स का असली स्वाद बिना किसी खास चटनी के अधूरा माना जाता है। जब भी समोसा, पकोड़े, खस्ता कचौड़ी या दही वड़ा परोसा जाता है, तो उसके साथ मिलने वाली गाढ़ी, खट्टी मीठी चटनी हर निवाले का जायका कई गुना बढ़ा देती है। अक्सर घरों में हलवाई जैसा गाढ़ापन और संतुलित खट्टा-मीठा स्वाद न मिल पाने के कारण लोग मजबूरी में टोमैटो सॉस का इस्तेमाल करने लगते हैं, जिससे चाट या स्नैक्स का असली देसी मजा गायब हो जाता है। कुछ बुनियादी मसालों, गुड़ और सही विधि का इस्तेमाल करके रसोई में ही एकदम पारंपरिक हलवाई स्टाइल चटनी बनाई जा सकती है, जिसे महीनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
इमली का गूदा तैयार करने का सही तरीका
इस चटनी को तैयार करने का सबसे पहला और जरूरी चरण इमली से साफ पल्प निकालना है। इसके लिए लगभग 100 ग्राम इमली लेकर उसे एक गहरे बर्तन में रखें और ऊपर से पर्याप्त गर्म पानी डाल दें। बर्तन को ढककर तकरीबन आधा घंटे के लिए ऐसे ही छोड़ दें, ताकि इमली अच्छी तरह फूलकर नरम हो जाए। जब इमली मुलायम हो जाए, तो उसी पानी में हाथों की मदद से उसे अच्छी तरह मसल लें ताकि सारा गूदा पानी में घुल जाए। इसके बाद थोड़े मोटे छेदों वाली छलनी का उपयोग करके इस मिश्रण को छान लें। छलनी पर बचे हुए रेशों और बीजों को अलग कर दें, जिनका इस्तेमाल पीतल या तांबे के पुराने बर्तनों को चमकाने में भी किया जा सकता है। इस तरह छना हुआ गाढ़ा पल्प चटनी पकाने के लिए पूरी तरह तैयार हो जाता है।
तड़का, उबाल और गुड़ का संतुलन
पल्प तैयार होने के बाद एक कड़ाही में 1 चम्मच कुकिंग ऑयल डालकर धीमी आंच पर गर्म करें। तेल में थोड़ा जीरा और हींग डालकर तड़काएं। जैसे ही जीरा चटकने लगे, इमली का पूरा पानी और पल्प कड़ाही में डाल दें। इस मिश्रण को तेज आंच पर लगातार चलाते हुए 2 से 3 अच्छे उबाल आने तक पकने दें। जब इमली का मिश्रण खौलने लगे, तो इसमें 1 चम्मच कद्दूकस की हुई ताजी अदरक या सूखी अदरक का पाउडर जिसे सोंठ कहा जाता है, मिला दें। इसके तुरंत बाद मिठास संतुलित करने के लिए 1 कप बारीक टुकड़ों में कटा हुआ गुड़ डाल दें। गुड़ के पिघलने तक इसे धीमी आंच पर चम्मच से हिलाते रहें।
पारंपरिक मसाले और ड्राई फ्रूट्स का तड़का
गुड़ अच्छी तरह घुल जाने के बाद इसमें 1 चम्मच पिसी हुई सौंफ, लाल मिर्च पाउडर, काला नमक, सादा सफेद नमक और भुना जीरा पाउडर मिला दें। इन सभी मसालों को चटनी में अच्छी तरह मिक्स करें और धीमी आंच पर तब तक पकाएं जब तक कि मिश्रण गाढ़ा और चमकदार न दिखने लगे, क्योंकि इमली की चटनी का असली मजा उसके गाढ़ेपन में ही होता है। जब चटनी मनचाही स्थिरता पर पहुंच जाए, तब इसमें तरबूज या खरबूजे के बीज यानी मेलन सीड्स, थोड़ी किशमिश और बारीक लंबाई में कटे हुए खजूर मिला दें। इन सभी सामग्रियों को एक मिनट तक मिलाकर आंच बंद कर दें और चटनी को पूरी तरह ठंडा होने दें।
लंबे समय तक स्टोर करने का तरीका और परोसना
जब चटनी कमरे के तापमान पर पूरी तरह ठंडी हो जाए, तो इसे एक साफ और सूखे कांच के जार में भरकर रख लें। यदि आप इसे सामान्य तापमान पर बिना फ्रिज के रखते हैं, तो यह 10 से 15 दिनों तक एकदम ताजा बनी रहती है। वहीं फ्रिज में स्टोर करने पर यह चटनी कई महीनों तक बिल्कुल खराब नहीं होती। इस स्वादिष्ट चटनी को आप बेसन के चीले, समोसे, कचौड़ी, दही भल्ले या किसी भी प्रकार की घरेलू चाट के साथ बड़े चाव से परोस सकते हैं।



















