मिठाई के शौकीनों के लिए घर की रसोई में बाजार जैसा स्वाद और कोमलता पाना हमेशा एक चुनौती भरा काम लगता है. त्योहारों या खास मौकों पर अक्सर लोग हलवाई जैसी बनावट पाने की कोशिश करते हैं. उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर स्थित बरगछा के रहने वाले मिठाई कारीगर अंकित गुप्ता ने इस पारंपरिक भारतीय व्यंजन को बिना किसी जटिलता के तैयार करने का बेहद सरल और सटीक तरीका साझा किया है. उनकी बताई विधि से बेहद सीमित सामग्री के जरिए कोई भी व्यक्ति अपनी रसोई में बेहतरीन बनावट वाली मिठाई तैयार कर सकता है.
सटीक अनुपात और सामग्री का मेल
इस मिठाई की सफलता मुख्य रूप से सामग्री के सही नाप पर निर्भर करती है. कारीगर के बताए अनुसार, सबसे पहले एक किलो मावा लिया जाता है. इस एक किलो मावे में करीब 100 ग्राम मैदा मिलाना चाहिए. मैदे की यह सीमित मात्रा मावे को सही कसाव देती है और उसे बिखरने से रोकती है. इसके बाद आवश्यकता और पसंद के आधार पर इसमें खाने वाला सोडा शामिल किया जाता है. यह सोडा मिठाई को अंदर से स्पंजी और मुलायम बनाने में सबसे अहम भूमिका निभाता है. खुशबू और अतिरिक्त स्वाद चाहने वाले लोग इसमें पिसी हुई इलायची या केसर की पत्तियां भी शामिल कर सकते हैं. इन सभी चीजों को हथेलियों की मदद से तब तक मिलाया जाता है जब तक कि पूरा मिश्रण बिल्कुल एकसार और चिकना न हो जाए.
तलने और एकसमान आकार देने की कला
चिकना डो तैयार हो जाने के बाद उससे छोटे और गोल आकार के बॉल्स तैयार किए जाते हैं. कारीगर इस बात पर विशेष जोर देते हैं कि सभी गोलियों का आकार एक जैसा रखा जाए. ऐसा करने से गर्म तेल या देसी घी में तलते समय सभी हिस्से बराबर आंच पर पकते हैं और कोई भी टुकड़ा कच्चा या जरूरत से ज्यादा नहीं सिकता. कड़ाही में तेल या देसी घी गर्म करने के बाद गैस की आंच धीमी कर दी जाती है. धीमी आंच पर इन गोलियों को तब तक तला जाता है जब तक कि उनका रंग चारों तरफ से सुनहरा न हो जाए. धीमी आंच पर तलने से यह बाहर से जलते नहीं हैं और अंदर तक पूरी तरह पक जाते हैं.
चाशनी में डुबोना और लंबे समय तक सुरक्षित रखने का राज
सुनहरे रंग में सिकने के तुरंत बाद इन्हें कड़ाही से बाहर निकाला जाता है और पहले से तैयार चीनी की चाशनी में डुबो दिया जाता है. कारीगर के मुताबिक, इन्हें लगभग 10 से 15 मिनट तक चाशनी के भीतर ही डूबे रहने देना चाहिए. इस तय समय में मिठाई रस को पूरी गहराई तक सोख लेती है, जिससे हर निवाले में भरपूर मिठास मिलती है. दूध के चुनाव पर बात करते हुए अंकित गुप्ता ने स्पष्ट किया कि गाय के दूध से तैयार मावा इस्तेमाल करने पर न केवल स्वाद उम्दा मिलता है, बल्कि मिठाई कई दिनों तक खराब भी नहीं होती. इसके विपरीत, बाजार में मिलने वाले पुआ से भी इसे बनाया जा सकता है, मगर उनकी शेल्फ लाइफ अपेक्षाकृत कम रहती है.



















