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झारखंड के ग्रामीण अंदाज में तैयार करें आलू और अंडे की भुर्जी वाली रसेदार सब्जीखानपान
10 अक्तू॰ 2026, 9:35 am (45 मिनट पहले)· 1

झारखंड के ग्रामीण अंदाज में तैयार करें आलू और अंडे की भुर्जी वाली रसेदार सब्जी

झारखंड के देहाती इलाकों में बनने वाली अंडे की भुर्जी और उबले आलू की तरीदार सब्जी स्वाद में लाजवाब होने के साथ प्रोटीन से भरपूर है। इसे पारंपरिक तरीके से लकड़ी के चूल्हे पर पकाने से इसका जायका और भी निखर जाता है।

अंडे से बनने वाली आमलेट, सादी भुर्जी या पारंपरिक अंडा करी तो अधिकतर घरों में आम तौर पर बनती रहती है। झारखंड के देहाती अंचलों में इसी अंडे की भुर्जी को उबले आलू और तीखे मसालों की रसेदार ग्रेवी के साथ मिलाकर एक बेहद खास तरीदार सब्जी तैयार की जाती है। यह स्थानीय व्यंजन न केवल खाने में बेहद लजीज होता है, बल्कि शरीर को भरपूर मात्रा में प्रोटीन भी प्रदान करता है। ग्रामीण परिवेश में जब इस डिश को मिट्टी के बर्तन अथवा लोहे की कड़ाही में लकड़ी के चूल्हे की धीमी आंच पर पकाया जाता है, तो इसकी सोंधी खुशबू और देसी स्वाद कई गुना बढ़ जाता है। रसोई में इस अनूठी और पौष्टिक सब्जी को तैयार करने का पूरा तरीका बेहद सरल है।

शुरुआती तैयारी और अंडे की भुर्जी बनाना

इस देहाती व्यंजन को बनाने के लिए सबसे पहले तीन से चार ताजे अंडे लें और उन्हें एक गहरे बर्तन में फोड़कर अच्छी तरह फेंट लें। अंडों को फेंटते समय ही उसमें थोड़ा सा नमक डालकर ठीक से मिला देना चाहिए। इसके बाद गैस या चूल्हे पर कड़ाही चढ़ाकर थोड़ा सा खाद्य तेल गर्म करें। तेल के पर्याप्त गर्म होते ही फेंटे हुए अंडे का घोल कड़ाही में डालें और लगातार चलाते हुए बढ़िया भुर्जी तैयार कर लें। जब अंडे के टुकड़े अच्छी तरह पक जाएं और उनका कच्चापन पूरी तरह खत्म हो जाए, तब इस तैयार भुर्जी को कड़ाही से निकालकर एक अलग प्लेट में रख लें।

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मसाला भूनना और उबले आलू का मिश्रण

भुर्जी निकालने के बाद उसी कड़ाही में दोबारा थोड़ा सा तेल डालकर गर्म करें। जब तेल अच्छी तरह गर्म हो जाए, तब उसमें तड़के के लिए जीरा, साबुत खड़े गरम मसाले और बारीक कटे हुए प्याज डालें। प्याज को मध्यम आंच पर तब तक भूनते रहें जब तक कि उसका रंग खूबसूरत सुनहरा भूरा न हो जाए। इसके बाद पहले से उबले हुए आलू कड़ाही में डालें और प्याज के साथ अच्छी तरह मिला लें। अब इसमें पिसा हुआ अदरक, लहसुन और जीरे का पेस्ट शामिल करें। साथ ही स्वादानुसार नमक, हल्दी पाउडर और लाल मिर्च पाउडर डालकर सभी मसालों को धीमी आंच पर तब तक भूनें जब तक कि मसालों से तेल अलग न दिखने लगे।

रसेदार ग्रेवी और भुर्जी को पकाने का तरीका

जैसे ही भुना हुआ मसाला तेल छोड़ने लगे, कड़ाही में आवश्यकतानुसार साफ पानी डालें ताकि मनमाफिक रसा तैयार हो सके। अब ग्रेवी में तेज आंच पर उबाल आने दें ताकि उबले हुए आलू मसालों के तीखेपन और स्वाद को अपने भीतर अच्छी तरह सोख लें। जब रसे में अच्छी तरह खौल आ जाए, तब पहले से अलग रखी गई अंडे की भुर्जी को कड़ाही में डाल दें। धीमी आंच पर कुछ मिनटों तक इसे पकने दें ताकि भुर्जी और तरी का स्वाद आपस में पूरी तरह घुल-मिल जाए।

परोसने की विधि और देसी स्वाद का आनंद

सब्जी के पक जाने पर गैस बंद करने से ठीक पहले ऊपर से बारीक कटा हुआ ताजा हरा धनिया और थोड़ा सा पिसा गरम मसाला छिड़क कर मिला दें। झारखंड के गांवों की यह पारंपरिक और पौष्टिक अंडे की भुर्जी वाली सब्जी अब पूरी तरह तैयार है। इसे गरमा-गरम उबले चावल या सादी रोटियों के साथ थाली में परोसें और अपने ही घर पर ठेठ देहाती स्वाद का पूरा लुत्फ उठाएं।

सवाल-जवाब

इस रेसिपी को बनाने के लिए कितने अंडों की जरूरत होती है?
इस डिश को तैयार करने के लिए तीन से चार ताजे अंडे लेने की सलाह दी गई है।
इस सब्जी का स्वाद सबसे ज्यादा किस तरह पकाने पर बढ़ता है?
इसे लकड़ी के चूल्हे की धीमी आंच पर पकाने से इसका देसी स्वाद और सोंधापन काफी बढ़ जाता है।
ग्रेवी में भुर्जी कब मिलानी चाहिए?
जब मसालों और पानी की तरी में अच्छी तरह उबाल आ जाए, तब पहले से तैयार अंडे की भुर्जी डालनी चाहिए।
इस सब्जी को किन चीजों के साथ परोसना सबसे अच्छा रहता है?
इसे गरमा-गरम सादे चावल या ताजी रोटियों के साथ खाना सबसे ज्यादा स्वादिष्ट लगता है।
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