झारखंड के खान-पान की पहचान उसकी सादगी और शुद्ध देसी जायके से होती है। यहां के पारंपरिक व्यंजनों में मसालों का संतुलन कुछ इस तरह रखा जाता है कि स्वाद गहरा मिले और पेट पर भारीपन भी न रहे। इसी परंपरा का एक लोकप्रिय हिस्सा है झारखंडी शैली की घुघनी मटर। घर की रसोई में बहुत कम चीजों के साथ झटपट बनने वाली यह डिश सुबह के नाश्ते के साथ-साथ शाम की हल्की भूख के लिए भी एकदम मुफीद मानी जाती है। कुकिंग एक्सपर्ट रिक्ति शर्मा के अनुसार अगर सही विधि और संतुलित आंच के साथ इसे बनाया जाए तो इसका स्वाद बेहद लाजवाब होता है।
मटर भिगोने और उबालने की सही विधि
इस व्यंजन को बनाने की शुरुआत सूखी मटर के चयन और उसकी तैयारी से होती है। सबसे पहले मटर को साफ पानी से अच्छी तरह धो लें ताकि उसकी धूल और गंदगी निकल जाए। इसके बाद मटर को पर्याप्त पानी में कुछ घंटों के लिए भिगोकर रख दें। अगर मटर पूरी तरह सूखी है तो उसे पर्याप्त समय तक भिगोना बेहद जरूरी होता है, जिससे वह भीतर तक फूल जाती है। ऐसा करने से उबालते वक्त मटर जल्दी पकती है और उसका छिलका कड़ा नहीं रहता।
जब मटर ठीक से फूल जाए तो उसे प्रेशर कुकर में डालें। कुकर में आवश्यकतानुसार पानी और थोड़ा सा नमक मिला लें। इसके बाद कुकर को गैस पर रखकर करीब 3 से 4 सीटी आने तक मध्यम आंच पर पकाएं। यहां ध्यान रखना जरूरी है कि मटर को सिर्फ उतना ही पकाना है जिससे वह नरम हो जाए और खाने में मुलायम लगे। उसे जरूरत से ज्यादा गलाकर पेस्ट या भरता नहीं बनाना है। उबालने के बाद मटर को पानी से अलग किसी बर्तन में रख लें और तड़के की तैयारी शुरू करें।
सरसों तेल और देसी मसालों से तैयार करें तड़का
झारखंडी घुघनी का असली स्वाद उसके तड़के और भुनाई पर टिका होता है। सबसे पहले एक कड़ाही में सरसों का तेल डालकर अच्छी तरह गर्म करें। तेल जब हल्का धुआं छोड़ने लगे, तब उसमें जीरा, सूखी लाल मिर्च और चुटकी भर हींग का छौंक लगाएं। इन खड़े मसालों की खुशबू आने पर बारीक कटी हुई प्याज कड़ाही में डालें। प्याज को मध्यम आंच पर तब तक भूनें जब तक कि उसका रंग सुनहरा न हो जाए।
प्याज भुन जाने के बाद उसमें अदरक-लहसुन का पेस्ट डालें और कच्चापन दूर होने तक कुछ पलों के लिए चलाएं। इसके तुरंत बाद बारीक कटे टमाटर कड़ाही में डालें। टमाटर को तब तक पकने दें जब तक कि वह पूरी तरह नरम होकर तेल न छोड़ने लगे। अब सूखे मसालों की बारी आती है। मिश्रण में हल्दी, धनिया पाउडर, लाल मिर्च पाउडर और स्वादानुसार नमक डालें। सभी मसालों को धीमी आंच पर तब तक भूनें जब तक कि वे अच्छी तरह एकसार न हो जाएं। भुनाई जितनी धीमी और बेहतर होगी, घुघनी का ग्रेवी बेस उतना ही खुशबूदार बनेगा।
मसालों के साथ मटर को पकाने का तरीका
जब मसाला कड़ाही के किनारों से तेल छोड़ने लगे, तब उसमें पहले से उबली हुई मटर डाल दें। कलछी की मदद से मटर और मसाले को आपस में अच्छी तरह मिला लें ताकि हर दाने पर मसाले की परत चढ़ जाए। अगर मिश्रण ज्यादा सूखा लगे तो जरूरत के मुताबिक थोड़ा पानी मिलाया जा सकता है। इसके बाद कड़ाही को ढककर मध्यम आंच पर करीब 5 से 7 मिनट तक पकने दें। इस प्रक्रिया से मसालों का तीखापन और खुशबू मटर के दानों के अंदर तक समा जाती है।
तय समय बाद आंच धीमी करें और ऊपर से गरम मसाला छिड़कें। अगर आपको खट्टापन पसंद है तो इसमें थोड़ा अमचूर पाउडर या ताजे नींबू का रस भी निचोड़ सकते हैं। अंत में बारीक कटा हरा धनिया डालकर गैस बंद कर दें। रिक्ति शर्मा का कहना है कि जो लोग ज्यादा तीखा और चटपटा खाना पसंद करते हैं, वे ऊपर से बारीक कटी हरी मिर्च और चाट मसाला भी बुरक सकते हैं।
चूड़ा, रोटी और पराठे के साथ परोसें
तैयार घुघनी मटर को गरमा-गरम परोसने पर उसका असली स्वाद निखर कर आता है। पारंपरिक तौर पर इसे भुने हुए चूड़ा, सादी रोटी या फिर तिकोने पराठे के साथ खाया जाता है। अगर आप चाहें तो इसे बिना किसी रोटी या चावल के सिर्फ एक कटोरी स्नैक्स की तरह चम्मच से भी खा सकते हैं। शाम के वक्त जब परिवार के सभी सदस्य साथ हों, तब चाय के साथ यह एक बेहतरीन नाश्ता साबित होता है। खासकर ठंड और बारिश के मौसम में गरमा-गरम घुघनी की थाली झारखंड के घरेलू और पारंपरिक खान-पान की याद दिला देती है।



















