घरों में जब भी कुछ मीठा पकाने का विचार आता है, तो अधिकांश लोग पारंपारिक तौर पर बेसन, गेहूं के चोकरयुक्त आटे अथवा रवा की तरफ ही रुख करते हैं। यदि आप भी नियमित बनने वाली इन साधारण डिशेज के जायके से कुछ नया तलाश रहे हैं, तो रसोई में सुलभ ताजे फल और दानेदार मेवों का एक अनूठा सम्मिश्रण एक उम्दा विकल्प बन सकता है। प्राकृतिक मिठास से भरपूर रसीले फल और सोंधी खुशबू वाली गिरीदार गिरियों का संगम न सिर्फ जुबान को एक नया अनुभव कराता है, बल्कि यह सामान्य आयोजनों अथवा सुबह के नाश्ते के वक्त परोसने के लिए भी बेहद मुफीद साबित होता है।
इस अनूठे व्यंजन के लिए जरूरी सामग्री
इस खास डिश को पकाने के लिए किसी दुर्लभ अथवा बेहद जटिल सामग्री की आवश्यकता नहीं पड़ती है। इसे तैयार करने हेतु आपको आधा कप भुनी हुई मूंगफली, एक मध्यम आकार का सेब, जरूरत के मुताबिक एक से दो गिलास पानी, तीन से चार बड़े चम्मच देशी घी और आधा कप सूजी की दरकार होगी। मिठास को संतुलित करने के लिए स्वादानुसार गुड़ और सजावट के साथ पौष्टिकता बढ़ाने के लिए 10 से 12 बादाम एकत्रित कर लें। यदि किसी को गन्ने के प्राकृतिक रस से बने उत्पाद का स्वाद पसंद न हो, तो वे उसकी जगह सामान्य शर्करा भी चुन सकते हैं। अगर आप चाहें तो अपनी निजी पसंद के अनुसार कुछ अन्य सूखे मेवे भी इसमें शामिल कर सकते हैं, जबकि दानों को पहले से सेंक लेने पर उनका प्राकृतिक सोंधापन और अधिक निखरकर सामने आता है।
उबालने और मुलायम प्यूरी बनाने की विधि
तैयारी के प्रथम चरण में फल को साफ पानी से अच्छी तरह धोकर छिलके समेत अथवा इच्छानुसार छोटे टुकड़ों में विभाजित कर लें। दानों को भी पहले से तवे पर सुखाकर अच्छी तरह भूरा होने तक सेंक लें। इसके पश्चात किसी गहरे बर्तन अथवा पैन में पानी भरकर उसमें कटे हुए फलों के फांक और तैयार दानों को एक साथ डाल दें। इन दोनों घटकों को धीमी अथवा मध्यम आंच पर लगभग 10 से 12 मिनट तक उबलने दें, ताकि गूदा पूरी तरह नरम और मुलायम अवस्था में आ जाए।
उबालने की प्रक्रिया पूरी होते ही आंच को बंद कर दें और इस पूरे मिश्रण को कमरे के तापमान पर थोड़ा ठंडा होने के लिए छोड़ दें। जब भाप शांत हो जाए, तब इसे ग्राइंडर जार में स्थानांतरित करें और महीन पीस लें। इस बात की विशेष सावधानी बरतें कि मिक्सी चलाते समय अत्यधिक जल न मिलाएं, अन्यथा पेस्ट ज्यादा पतला हो जाएगा और पकाने में अनावश्यक समय लगेगा। केवल उतनी ही नमी रखें जिससे एक गाढ़ा और एकसार मिश्रण प्राप्त हो सके।
रवे की सिकाई और मिश्रण का समावेशन
दूसरे चरण में एक मोटे और भारी पेंदे वाली कड़ाही अथवा पैन को आंच पर रखें और उसमें निर्धारित मात्रा में घी गर्म करें। जब वसा पिघल जाए, तो रवे को कड़ाही में डालें और चम्मच को लगातार घुमाते हुए धीमी से मध्यम आंच पर भूनना प्रारंभ करें। जैसे ही दानों का रंग हल्का सुनहरी आभा लेने लगे और आसपास मनमोहक खुशबू फैलने लगे, समझ लें कि सिकाई मुकम्मल हो चुकी है। कभी भी जल्दबाजी के चक्कर में आंच को तेज न करें, क्योंकि इससे सामग्री नीचे से काली पड़ सकती है और पूरे मिष्ठान का स्वाभाविक स्वाद बिगड़ सकता है।
रवा जब पूरी तरह पक जाए, तो आंच को मंद रखते हुए उसमें पहले से तैयार फल और नट्स का गाढ़ा पेस्ट धीरे-धीरे उंडेल दें। दोनों अवयवों को चमचे की मदद से लगातार एक ही दिशा में मिलाते रहें ताकि किसी भी प्रकार की गांठें अथवा गुठलियां न उभरें। कुछ समय तक धीमी लौ पर पकाने से यह गाढ़ा रूप अख्तियार करने लगेगा।
गुड़ का समावेश और अंतिम सजावट
जब कड़ाही में मिश्रण गाढ़ा होने की स्थिति में पहुंचे, तब इसमें अपने मनमुताबिक गुड़ मिला दें और चमचे से अच्छी तरह एकसार करें। मीठा डालने के बाद कुछ अतिरिक्त मिनटों तक धीमी आंच पर इसे लगातार चलाएं ताकि मिठास पूरे पकवान में बराबर समाहित हो सके। इसके बाद महीन टुकड़ों में कतरे हुए बादाम और मनपसंद अन्य मेवों की कतरन इसके ऊपर छिड़क दें। थोड़ी सी कतरन को अंतिम समय की थाली सजावट के लिए अलग बचाकर रखा जा सकता है।
जैसे ही यह व्यंजन अपनी आदर्श और मनचाही गाढ़ी बनावट प्राप्त कर ले, गैस का बर्नर बंद कर दें। तैयार गरमा गरम पकवान को सुंदर कटोरियों में निकालें और ऊपर से आरक्षित मेवों को बुरक कर परिजनों के सामने परोसें। ताजे फल की धीमी मिठास, नट्स का कुरकुरापन और देशी घी में रचे-बसे रवे की महक मिलकर इस मिष्ठान को रोजमर्रा के साधारण विकल्पों से कई गुना विशिष्ट बना देते हैं।



















