सुबह के नाश्ते में दक्षिण भारतीय व्यंजन जैसे डोसा या इडली बनाते वक्त ज्यादातर लोग नारियल, मूंगफली या धनिया की चटनी ही परोसते हैं। लगातार एक ही तरह की संगत से कई बार खाने का जायका नीरस लगने लगता है। ऐसे में अपनी रसोई में मौजूद सूखे मेवों का इस्तेमाल कर सुबह की थाली को एक ताजगी भरा और नया रूप दिया जा सकता है। घाटी के पारंपरिक खानपान से प्रेरित अखरोट की चटनी अपने नटी टेक्सचर, गाढ़ेपन और हल्के खट्टे-तीखे स्वाद के कारण एक बेहतरीन विकल्प साबित होती है। इसे बनाने में बहुत कम समय लगता है और ज्यादा तामझाम की जरूरत भी नहीं पड़ती।
सामग्री की सही नाप और तैयारी
इस खास चटनी को तैयार करने के लिए सबसे पहले सामग्री का सही अनुपात जुटाना जरूरी है। मुख्य सामग्री के तौर पर 1 कप अखरोट की साबुत गिरी लें। इसके अलावा ½ कप गाढ़ा दही, 3 से 4 हरी मिर्च, आधा इंच का अदरक का टुकड़ा और ½ छोटा चम्मच जीरा चाहिए। सुगंध और रंगत बढ़ाने के लिए ¼ कप बारीक कटा हरा धनिया या पुदीने की पत्तियां ली जा सकती हैं। खटास का संतुलन साधने के लिए 1 छोटा चम्मच ताजा नींबू का रस अथवा ½ छोटा चम्मच अमचूर पाउडर का प्रयोग करें। नमकीन स्वाद के लिए ¼ छोटा चम्मच काला नमक और समान मात्रा में यानी ¼ छोटा चम्मच सादा नमक रखें। यदि मिश्रण बहुत सख्त हो जाए, तो आवश्यकतानुसार 1 से 2 बड़े चम्मच ठंडा पानी या दही के ऊपर का पानी इस्तेमाल किया जा सकता है। यदि आप ऊपर से छौंक लगाना चाहते हैं, तो 1 छोटा चम्मच कुकिंग ऑयल या शुद्ध देसी घी, ½ छोटा चम्मच काली राई, 5 से 6 ताजे करी पत्ते और 1 सूखी लाल मिर्च अलग रख लें।
अखरोट को भिगोने और पीसने की विधि
तैयारी की शुरुआत अखरोट को तैयार करने से होती है। अखरोट की गिरी को गुनगुने पानी में डालकर करीब 10 से 15 मिनट के लिए छोड़ दें। हल्के गर्म पानी में रहने से इनकी ऊपरी परत नरम हो जाती है, जिससे ग्राइंडर में इनका पेस्ट बनाना काफी सुगम हो जाता है और बनावट में भी रेशमी मुलायमियत आती है। तय समय के बाद गिरी का सारा अतिरिक्त पानी निथार लें। जिन लोगों को बहुत चिकनी चटनी की जगह थोड़ा दानेदार एहसास पसंद है, वे इसे ज्यादा महीन पीसने से बच सकते हैं।
अब मिक्सी के जार में निथारे हुए अखरोट डालें। साथ में हरी मिर्च, छीला हुआ अदरक, जीरा, धनिया या पुदीने की पत्तियां, दोनों प्रकार के नमक और दो बड़े चम्मच दही शामिल करें। मिक्सी को लगातार चलाने के बजाय पल्स मोड पर रुक-रुक कर घुमाएं। शुरुआत में सादा पानी बिल्कुल न डालें, ताकि अखरोट अपने प्राकृतिक तेलों के साथ मिलकर गाढ़ा और मलाईदार आधार बना सके।
दही का संयोजन और सही कंसिस्टेंसी
जब अखरोट का पहला दानेदार मिश्रण तैयार हो जाए, तब जार में बचा हुआ गाढ़ा दही और एक छोटा चम्मच नींबू का रस मिलाएं। इसे एक बार फिर से अच्छी तरह चलाएं ताकि सारी चीजें एकसार हो जाएं। यदि चटनी आवश्यकता से अधिक गाढ़ी लगे, तो उसमें एक या दो चम्मच ठंडा पानी अथवा दही का पानी मिलाकर अपनी पसंद के अनुसार गाढ़ापन तय करें।
तीखेपन को भी अपनी सुविधा के अनुसार घटाया या बढ़ाया जा सकता है। कम तीखा खाने वाले लोग हरी मिर्च की संख्या 3-4 से घटा सकते हैं, जबकि तीखे के शौकीन इसमें एक मिर्च अतिरिक्त जोड़ सकते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में दही की ठंडक और नींबू का खट्टापन अखरोट की प्राकृतिक कड़वाहट को पूरी तरह संतुलित कर देता है।
परोसने के विकल्प और तड़के का चुनाव
यह कश्मीरी चटनी गर्मागर्म इडली, करारे डोसे, उत्तपम और अप्पे के साथ बेहद स्वादिष्ट लगती है। इसके अलावा नाश्ते में बनने वाले सादे या भरवां पराठों के साथ भी इसे चटपटे साइड डिश के रूप में थाली में सजाया जा सकता है। इस चटनी की खासियत यह है कि इसे बिना किसी छौंक के भी सीधा खाया जा सकता है, क्योंकि इसमें अखरोट, दही, अदरक और हरी मिर्च का असली स्वाद उभर कर आता है।
यदि आपको पारंपरिक दक्षिण भारतीय छौंक का तड़का पसंद है, तो पैन में थोड़ा तेल या घी गर्म करें। उसमें राई चटकाएं, करी पत्ता और सूखी लाल मिर्च डालकर तुरंत चटनी के ऊपर डाल दें। हालांकि यह तड़का पूरी तरह से ऐच्छिक है और बिना इसके भी चटनी का क्रीमी स्वाद पूरी तरह बरकरार रहता है।



















