सुबह के नाश्ते में अक्सर लोग सड़क किनारे की दुकानों या ढाबों पर मिलने वाली खस्ता क्लब कचौड़ी का लुत्फ उठाना पसंद करते हैं। बाहर मिलने वाली इस कचौड़ी का स्वाद जितना कुरकुरा और मजेदार होता है, इसे घर की रसोई में तैयार करने का तरीका भी उतना ही सीधा है। चंद बुनियादी सावधानियों और सही अनुपात का ध्यान रखकर कोई भी इसे ढाबा स्टाइल में अपने घर पर आसानी से बना सकता है। इसमें आटे में कुछ सामान्य मसाले मिलाकर तलने भर की जरूरत होती है।
सामग्रियों का सही चुनाव और मोयन मिलाने का नियम
रांची की रहने वाली गृहणी उषा इस कचौड़ी को तैयार करने की बारीकियाँ साझा करती हैं। उनके अनुसार, क्लब कचौड़ी बनाने की शुरुआत आटा लेकर की जाती है। इस आटे में अजवाइन, मंगरेला, स्वादानुसार नमक और रिफाइंड तेल मिलाया जाता है। कचौड़ी को खस्ता रूप देने के लिए रिफाइंड तेल की मात्रा सामान्य से थोड़ी अधिक रखनी चाहिए। तेल और सूखे मसालों को दोनों हाथों से आटे में पूरी तरह मिला लेना जरूरी है। जब मोयन अच्छे से मिल जाए, तब इसमें हल्का गर्म पानी डालकर सानना शुरू किया जाता है। ध्यान रखना होता है कि आटा बिल्कुल नरम न हो, बल्कि हल्का कड़ा रखा जाए। जो लोग ज्यादा कुरकुरापन चाहते हैं, वे केवल मैदा ले सकते हैं या फिर आधा आटा और आधा मैदा मिलाकर भी गूंथ सकते हैं, जिससे स्वाद और निखर जाता है।
गूंधने की प्रक्रिया और आराम देने का समय
कचौड़ी का आटा तैयार करते समय मेहनत गूंधने पर ही लगती है। हाथों के दबाव से इसे लगभग 15 मिनट तक लगातार अच्छी तरह मसलते रहना चाहिए। जब आटा व्यवस्थित हो जाए, तो इसे कम से कम आधे घंटे के लिए किसी बर्तन या कपड़े से ढककर रख देना चाहिए। आटे को यह आराम देना बेहद जरूरी है ताकि लोई बनाते समय उसमें खिंचाव और लचीलापन सही रहे। आधे घंटे बाद आटे की छोटी-छोटी लोइयां तोड़ी जाती हैं और फिर बेलन की मदद से उन्हें गोल आकार में बेला जाता है।
तलने के लिए तेल का सही तापमान
कचौड़ी को तलते वक्त आंच और तेल की गर्माहट सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जब पूरी या कचौड़ी को कड़ाही में डाला जाए, तो तेल बहुत तेज गर्म होना चाहिए। तेल का तापमान मध्यम भी नहीं होना चाहिए, बल्कि पूरी तरह खौलता हुआ होना जरूरी है। कचौड़ी को तेल में डालने के बाद ऐसे ही नहीं छोड़ना है, बल्कि कलछी से तुरंत हल्का सा दबाना होता है। हल्का दबाव पड़ते ही कचौड़ी गुब्बारे की तरह फूल जाती है। जैसे ही यह दोनों तरफ से सुनहरी सिक जाए, इसे तुरंत तेल से बाहर निकाल लेना चाहिए।
परोसने के तरीके और लजीज मेल
इस खस्ता क्लब कचौड़ी को अलग-अलग जायकों के साथ परोसा जाता है। बहुत से लोग इसे तीखी और चटपटी चना और आलू की तरी वाली सब्जी के साथ खाना पसंद करते हैं। वहीं दूसरी तरफ, कई लोग इसे गाढ़ी रबड़ी जैसी मीठी खीर के साथ खाना बेहद पसंद करते हैं। नमकीन या मीठा, दोनों में से किसी भी पसंद के साथ इसका स्वाद इतना उम्दा लगता है कि कोई भी आसानी से सात से आठ कचौड़ियां खा सकता है।



















