भारतीय ग्रामीण खानपान की जब भी चर्चा होती है, तब पत्थर के सिलबट्टे पर तैयार की गई चटनी की महक और उसका अनोखा ज़ायका बरबस ही याद आ जाता है। आधुनिक रसोई में समय बचाने की खातिर मिक्सर ग्राइंडर ने लगभग हर घर में अपनी जगह पक्की कर ली है, फिर भी सिलबट्टे पर पारंपरिक ढंग से तैयार चटनी का स्वाद, बनावट और उसकी सौंधी खुशबू आज भी बेजोड़ मानी जाती है। ताजे टमाटर, साबुत लहसुन, सूखी लाल मिर्च और साबुत धनिया के मेल से तैयार होने वाली यह पारंपरिक देसी चटनी रूखे-सूखे खाने को भी बेहद स्वादिष्ट बना देती है।
किचन में मौजूद आसान सामग्री से होती है तैयार
इस ग्रामीण विधि से बनने वाली चटनी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके लिए किसी खास या दुर्लभ मसाले की आवश्यकता नहीं होती है। आमतौर पर घर के किचन में रोजमर्रा इस्तेमाल होने वाली चीजों से ही इसे कुछ ही मिनटों में पीसकर परोसा जा सकता है। पके टमाटर, लहसुन, साबुत सूखी लाल मिर्च और साबुत धनिया का संतुलन इसमें असली जान फूंकता है। जब इस मिश्रण में स्वादानुसार सादा नमक और ऊपर से थोड़ा सा कच्चा सरसों का तेल मिला दिया जाता है, तो इसकी देसी तीखी महक और स्वाद कई गुना अधिक निखरकर सामने आता है।
चटनी बनाने के लिए आवश्यक सामग्री का सटीक अनुपात
सिलबट्टे पर इस तीखी और चटपटी चटनी को बनाने के लिए सामग्री का सही नाप बेहद महत्वपूर्ण है
- पके हुए टमाटर: 2 से 3 मध्यम आकार के लाल टमाटर लें।
- लहसुन की कलियां: 8 से 10 छिली हुई लहसुन की कलियां।
- सूखी लाल मिर्च: 3 से 5 साबुत सूखी लाल मिर्च। यदि अधिक तीखापन पसंद करते हैं, तो मिर्च की संख्या बढ़ाई जा सकती है।
- साबुत सूखी धनिया: 1 से 2 चम्मच साबुत धनिया के दाने।
- नमक: स्वादानुसार सादा नमक।
- सरसों का तेल: थोड़ा सा शुद्ध सरसों का तेल, जो चटनी को पारंपरिक गांव वाला तीखापन और विशेष खुशबू प्रदान करता है।
सिलबट्टे पर मसाला और टमाटर घिसने की सही तकनीक
सबसे पहले सिल और बट्टे को साफ पानी से अच्छी तरह धोकर सुखा लें। इसके बाद सिल पर भुनी हुई सूखी लाल मिर्च, साबुत धनिया और थोड़ा सा नमक रखकर बट्टे की मदद से धीरे-धीरे पीसना शुरू करें। मसालों को बिना किसी जल्दबाजी के आहिस्ता-आहिस्ता घिसें ताकि उनके प्राकृतिक तेल और भीनी-भीनी सुगंध पूरी तरह बाहर आ सकें। जब यह सूखा मसाला दरदरा पीस जाए, तब इसमें लहसुन की कलियां डालकर अच्छी तरह कुचलते हुए मिला लें। लहसुन और सूखे मसालों का बारीक पेस्ट बनने के उपरांत पके हुए टमाटर सिल पर रखें। टमाटर को बट्टे से हल्के हाथ से दबाते हुए मसालों के साथ पीसें। इस प्रक्रिया में हड़बड़ी बिल्कुल न करें, क्योंकि पत्थर पर धीरे-धीरे घिसने से टमाटर का रस और पिसे मसालों के कण आपस में पूरी तरह एकसार हो जाते हैं।
हर साधारण थाली को लाजवाब बना देता है यह ज़ायका
पत्थर की सिल पर तैयार यह टमाटर और लहसुन की तीखी चटनी गर्मागर्म गेहूं की रोटी, कुरकुरे पराठे, दाल-चावल, खिचड़ी अथवा तली हुई पूड़ी के साथ परोसने पर लाजवाब लगती है। ग्रामीण अंचलों में आज भी कई लोग दोपहर के समय कच्चा प्याज, हरी मिर्च और ताजी रोटी के साथ केवल इसी चटनी का आनंद लेना सबसे अधिक पसंद करते हैं। पके टमाटर की प्राकृतिक खटास, लहसुन की तीखी सुगंध, सूखी लाल मिर्च का तेज और धनिया का सोंधापन मिलकर ऐसा अनोखा स्वाद रचते हैं, जो किसी भी साधारण भोजन को दावत जैसा बना देता है।
आखिर मिक्सर ग्राइंडर से बेहतर क्यों मानी जाती है सिलबट्टे की पिसाई?
मुस्कान ने बातचीत के दौरान साझा किया कि ग्रामीण परिवेश में आज भी पारंपरिक खानपान का स्वाद अपनी मूल पहचान बनाए हुए है। इस देसी विधि से चटनी बनाने में केवल 5 से 10 मिनट का समय लगता है और यह ताजी तैयार हो जाती है। सिलबट्टे पर जब मसालों को पत्थर के दबाव से धीरे-धीरे पीसा जाता है, तो उनके रेशे और स्वाद आपस में गहराई से घुलते हैं। इसके विपरीत मिक्सर ग्राइंडर में ब्लेड की तेज रफ्तार सामग्री को बारीक तो काट देती है, परंतु घर्षण से पैदा होने वाली गर्मी के कारण प्राकृतिक स्वाद और असली खुशबू वैसी नहीं उभर पाती, जिस वजह से मिक्सर की चटनी का स्वाद सिलबट्टे वाली चटनी की तुलना में काफी हल्का रह जाता है।



















