झारखंड की राजधानी रांची में स्ट्रीट फूड के शौकीनों के लिए पारंपरिक जायके का एक बेहद अनोखा ठिकाना मौजूद है। आमतौर पर मिलने वाले तले हुए वड़ों से हटकर यहां कांजी वड़ा अपनी खास पहचान बना चुका है। इसका स्वाद तीखा, नमकीन और हल्का खट्टा होता है, जो पहली बार चखने वालों को भी तुरंत लुभा लेता है। इस पारंपरिक व्यंजन की सबसे बड़ी खासियत इसे बनाने में लगने वाला धैर्य है, क्योंकि इसे पूरी तरह तैयार होने में लगभग तीन दिन का वक्त लगता है। यही धीमी प्रक्रिया इसके पानी और वड़े में एक गहरा और अनोखा खट्टापन घोलती है, जिसके चलते लोग बार-बार इसका स्वाद लेने खिंचे चले आते हैं।
पारंपरिक विधि और तीन दिनों का सब्र
इस व्यंजन को तैयार करने की प्रक्रिया बेहद सादी लेकिन समय लेने वाली है। कांजी का खास पानी बनाने के लिए साधारण पानी में पिसी हुई राई और नमक का संतुलित मिश्रण तैयार किया जाता है। इसके बाद इसमें ताजा तले हुए वड़े डाले जाते हैं। इस पूरे मिश्रण को लगभग तीन दिनों तक प्राकृतिक रूप से उठने और घुलने-मिलने के लिए छोड़ दिया जाता है। तीन दिन बीतने के बाद राई का तीखापन और खटास पानी के साथ-साथ वड़े के भीतर तक समा जाती है। इस प्रक्रिया से तैयार हुआ कांजी वड़ा इतना लजीज होता है कि ग्राहक अक्सर एक प्लेट खत्म करते ही दूसरी प्लेट की मांग करने लगते हैं।
बिना प्याज-लहसुन के पच्चीस सालों का सफर
केसरी चाट की यह दुकान पिछले 20 से 25 वर्षों से लगातार ग्राहकों की सेवा कर रही है। एक परिवार द्वारा शुरू किए गए इस प्रतिष्ठान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां बनने वाला हर एक व्यंजन बिना लहसुन और बिना प्याज के ही पकाया जाता है। जो लोग पूरी तरह सात्विक या बिना प्याज-लहसुन का भोजन तलाशते हैं, उनके लिए यह जगह एक पसंदीदा पड़ाव बन चुकी है। कांजी वड़े के अतिरिक्त यहां की रसोई में मखमली दही वड़ा, हल्का छोला चाट, कुरकुरे पकौड़े और मोठ दाल के व्यंजन भी पूरी शुद्धता के साथ तैयार किए जाते हैं।
हल्के मसालों का छोला और खास मिक्स चाट
दुकान पर परोसी जाने वाली छोला चाट में बहुत तेज या भारी मसालों का इस्तेमाल नहीं किया जाता। इसे बेहद हल्का और सुपाच्य रखा जाता है, ताकि लोग बिना किसी भारीपन के इसका लुत्फ उठा सकें। स्थानीय लोग इस छोले को न केवल चाट की तरह खाते हैं, बल्कि कई ग्राहक इसे सादी रोटी के साथ तो कई चावल के साथ बड़े चाव से लेते हैं। इसके अलावा मूंग दाल से बने नमकीन-खट्टे व्यंजन और दही वड़े की भी यहां भारी मांग रहती है। अगर किसी को एक साथ कई स्वादों का आनंद लेना हो, तो उनके लिए 30 रुपये की मिक्स चाट उपलब्ध कराई जाती है, जिसमें उबले आलू, मोठ, छोले और दही वड़े का बेहतरीन मेल होता है।
गर्मियों में पाचन के फायदे और किफायती दाम
बजट के लिहाज से देखें तो यहां अधिकांश पारंपरिक व्यंजन महज 20 रुपये प्रति प्लेट की दर पर मिल जाते हैं, जिससे यह हर वर्ग की जेब के अनुकूल रहता है। विशेष रूप से गर्मियों के दिनों में कांजी वड़े की बिक्री में भारी इजाफा देखा जाता है। राई और नमक के पानी में तैयार होने के कारण यह पेट के लिए काफी हल्का माना जाता है, जिससे गैस की समस्या नहीं होती और भोजन को पचाने में भी सहूलियत मिलती है। यहां रोजाना नए और पुराने ग्राहकों का तांता लगा रहता है, और जो लोग घर ले जाकर इसका आनंद लेना चाहते हैं, उनके लिए पार्सल की सुविधा भी मुहैया कराई जाती है।


















