राजस्थान की पाक कला और मिष्ठान परंपरा अपनी विविधता के लिए पूरे देश में मशहूर है। यहां के अलग-अलग क्षेत्रों में ऐसी कई खास मिठाइयां तैयार की जाती हैं, जो अपने अनूठे रूप और स्वाद से हर किसी को चकित कर देती हैं। राजस्थान के करौली जिले में भी पिछले करीब 30 साल से एक बेहद अनूठी मिठाई तैयार की जा रही है। यह मिठाई देखने में हूबहू ताजी हरी और चटख लाल मिर्च जैसी प्रतीत होती है, लेकिन असलियत में यह बिल्कुल मीठी होती है और इसमें मिर्च का अंश मात्र भी इस्तेमाल नहीं किया जाता।
करौली के चटीकना बाजार से जुड़ी तीन दशकों पुरानी परंपरा
करौली के प्रसिद्ध चटीकना बाजार में स्थित करीब 70 साल पुराने प्रतिष्ठान लक्ष्मी मिष्ठान भंडार पर यह अनूठी मिठाई बनाई जाती है। इस मिष्ठान की परंपरा की सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसे पूरे साल नहीं बेचा जाता, बल्कि साल में सिर्फ एक बार विशेष रूप से दीपावली के पावन पर्व पर ही ग्राहकों के लिए तैयार किया जाता है। जब यह मिठाई दुकान के काउंटर पर सजती है, तो पहली नजर में ऐसा भ्रम होता है मानो थाल में तीखी हरी और लाल मिर्च रखी हुई हों। जैसे ही कोई इसे चखता है, उसका मुंह मिठास से भर जाता है। हलवाई इस मिठाई को बनाने के लिए मैदा, सूजी, शुद्ध घी, चीनी और खाद्य रंगों का प्रयोग करते हैं।
घर पर तैयार करने के लिए आवश्यक सामग्री
अगर आप इस पारंपरिक और अनूठे स्वाद को अपनी रसोई में आजमाना चाहते हैं, तो इसे बहुत ही बुनियादी सामग्रियों के साथ घर पर तैयार किया जा सकता है। इसमें किसी भी तरह की तीखी सामग्री की आवश्यकता नहीं होती, केवल आकार और रंग मिर्च जैसा दिया जाता है। इसे बनाने के लिए आपको निम्नलिखित सामग्री जुटानी होगी
- मैदा: 2 कप
- सूजी: 2 से 3 चम्मच
- घी: मोयन और आवश्यकता के अनुसार
- चीनी: चाशनी तैयार करने के लिए
- पानी: आवश्यकता अनुसार आटा गूंथने और चाशनी के लिए
- खाद्य रंग: थोड़ा सा हरा और थोड़ा सा लाल फूड कलर
- तलने के लिए: आवश्यकतानुसार घी या तेल
आटा गूंथने और रंग मिलाने की सही प्रक्रिया
मिर्च जैसी मिठाई बनाने की शुरुआत आटा तैयार करने से होती है। सबसे पहले एक फैले हुए बर्तन में दो कप मैदा लें और उसमें दो से तीन चम्मच सूजी मिलाएं। इसके बाद इसमें थोड़ा सा घी डालकर अच्छी तरह मिला लें ताकि मोयन सही ढंग से लग सके। अब बहुत संभालकर थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए एक सख्त आटा गूंथकर तैयार करें। आटा गीला या बहुत मुलायम नहीं होना चाहिए।
जब आटा गुंथ जाए, तो उसे बराबर मात्रा में दो हिस्सों में बांट लें। एक हिस्से में थोड़ा सा हरा फूड कलर और दूसरे हिस्से में लाल फूड कलर मिलाएं। रंग मिलाते समय सावधानी बरतें कि रंग की मात्रा बहुत अधिक न हो जाए। रंगों को आटे में एकसार मिलने तक मसलें और फिर दोनों रंगीन हिस्सों को कपड़े या बर्तन से ढककर थोड़ी देर के लिए आराम करने के लिए छोड़ दें।
हाथों से मिर्च का आकार देने की तकनीक
आटे को कुछ देर आराम देने के बाद अब उसे सुंदर रूप देने का समय आता है। तैयार रंगीन आटे से छोटी-छोटी लोइयां तोड़ लें। इन लोइयों को हथेलियों के बीच रखकर लंबा रोल करें और मिर्च की तरह ढालें। करौली के पारंपरिक स्वरूप के अनुसार, मिठाई का ऊपरी सिरा थोड़ा पतला रखें और नीचे का हिस्सा हल्का सा मोटा बनाएं। प्रामाणिक लुक देने के लिए हरी और लाल दोनों किस्मों की मिर्च का आकार बनाएं, जिससे यह थाल में बिल्कुल असली मिर्चियों की तरह सजी हुई नजर आएं।
धीमी आंच पर तलने और दो तार की चाशनी में डुबोने का तरीका
एक कड़ाही में पर्याप्त मात्रा में घी या तेल गर्म करें। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि घी बहुत ज्यादा खौलता हुआ या तेज गर्म न हो, अन्यथा मिठाइयां ऊपर से तुरंत जल जाएंगी और अंदर से कच्ची रह जाएंगी। गढ़ी हुई मिर्चियों को धीमी से मध्यम आंच पर धीरे-धीरे तलें। इन्हें तब तक सेंकें जब तक कि बाहरी परत पूरी तरह पककर हल्की कुरकुरी न हो जाए। सिकने के बाद इन्हें कड़ाही से निकालकर अलग रख लें।
इसके बाद एक दूसरे बर्तन में चीनी और पानी मिलाकर चाशनी पकने के लिए रखें। चाशनी को लगातार चलाते हुए तब तक पकाएं जब तक कि वह दो तार की अवस्था तक न पहुंच जाए। जब दो तार की चाशनी तैयार हो जाए, तब पहले से तली हुई मिर्च रूपी मिठाइयों को इसमें डाल दें। कुछ समय तक इन्हें चाशनी में डूबा रहने दें ताकि मिठास अंदर तक समा जाए। इसके बाद मिठाइयों को चाशनी से बाहर निकालें और किसी जाली या बर्तन पर ठंडा होने के लिए रख दें। लगभग 2 से 3 घंटे में इनकी बाहरी चाशनी सेट हो जाती है और कुरकुरी मीठी मिर्च की अनूठी मिठाई परोसने के लिए तैयार हो जाती है।


















