अक्टूबर के महीने में त्योहारों की बहार और नवरात्रि के आगमन के साथ ही भारतीय रसोईयों में पारंपरिक व्यंजनों की खुशबू महकने लगती है। पूजा-पाठ और उत्सव के इन पावन दिनों में खास तौर पर बिना प्याज-लहसुन वाले स्वादिष्ट पकवानों को प्राथमिकता दी जाती है। ऐसे मौकों पर कद्दू की खट्टी-मीठी सब्जी एक ऐसी सदाबहार देसी पसंद बनकर उभरती है, जो गर्मागर्म पूरी और खस्ता कचौड़ी के स्वाद को कई गुना बढ़ा देती है। इस व्यंजन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे पकाने के लिए किसी दुर्लभ मसाले या लंबे तामझाम की दरकार नहीं होती। रसोई घर में दैनिक रूप से उपलब्ध मसालों की सहायता से बेहद कम वक्त में यह लाजवाब डिश तैयार की जा सकती है।
सब्जी पकाने के लिए आवश्यक सामग्री का माप
इस लजीज सब्जी को बनाने के लिए सबसे पहले करीब 500 ग्राम ताजा कद्दू लें। तड़के और बघार के लिए 2 बड़े चम्मच सरसों का तेल, आधा छोटा चम्मच जीरा, एक चुटकी हींग और 1 से 2 सूखी लाल मिर्च की आवश्यकता होगी। सूखे पिसे मसालों के रूप में आधा छोटा चम्मच हल्दी, आधा छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, स्वादानुसार नमक और थोड़ा सा गरम मसाला अलग रख लें। सब्जी में उसका विशेष खट्टा-मीठा जायका घोलने के लिए करीब 1-2 बड़े चम्मच गुड़ और 1 बड़ा चम्मच अमचूर पाउडर की जरूरत पड़ेगी। अंत में डिश की ताजगी और महक बढ़ाने के लिए बारीक कटी हरी धनिया पत्ती का बंदोबस्त करें।
सब्जी की तैयारी और तड़के की विधि
सब्जी बनाने की शुरुआत कद्दू को साफ पानी से अच्छी तरह धोने से करें। इसके बाद कद्दू का छिलका उतार लें, भीतर के रेशेदार बीजों को पूरी तरह साफ करें और गूदे को छोटे-छोटे चौकोर टुकड़ों में काट लें। अब एक कड़ाही को गैस चूल्हे पर चढ़ाएं और उसमें 2 बड़े चम्मच सरसों का तेल डालकर अच्छी तरह धुआं उठने तक गर्म करें। तेल के गर्म हो जाने पर गैस की आंच को नियंत्रित करें और तेल में आधा छोटा चम्मच जीरा, एक चुटकी हींग व 1 से 2 सूखी लाल मिर्च डालकर चटकाएं।
मसालों की भुनाई और धीमी आंच पर पकाने का तरीका
जैसे ही तड़के का जीरा और मिर्च चटकने लगें, कड़ाही में कद्दू के कटे हुए टुकड़े डाल दें और करछी से अच्छी तरह मिला लें। इसके तुरंत बाद कद्दू के ऊपर आधा छोटा चम्मच हल्दी, आधा छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर और स्वादानुसार नमक छिड़कें। इन सभी मसालों को कद्दू के टुकड़ों के साथ मध्यम आंच पर कुछ मिनटों तक भूनें ताकि मसाले तेल के साथ मिलकर कद्दू पर एक समान परत बना लें। भूनने के बाद कड़ाही पर ढक्कन लगा दें और आंच धीमी करके कद्दू को गलने दें। पकते समय कद्दू अपने भीतर से प्राकृतिक पानी छोड़ता है, इसलिए प्रारंभ में इसमें अतिरिक्त पानी डालने की कोई जरूरत नहीं होती। यदि पकाने के दौरान मिश्रण बहुत सूखा लगे या कद्दू तली में चिपकने लगे, तो जरूरत के अनुसार बिल्कुल थोड़ा सा पानी मिलाया जा सकता है। कद्दू को तब तक पकने दें जब तक उसके टुकड़े पूरी तरह नरम न हो जाएं।
गुड़ और अमचूर से दें खास खट्टा-मीठा स्वाद
जब कद्दू अच्छी तरह पककर मुलायम हो जाए, तब कड़ाही में करीब 1-2 बड़े चम्मच गुड़ मिलाएं। गुड़ को कद्दू के साथ अच्छी तरह चलाएं ताकि वह पिघलकर पूरी सब्जी में घुल जाए। गुड़ के पिघलते ही इसमें 1 बड़ा चम्मच अमचूर पाउडर डाल दें। गुड़ की प्राकृतिक मिठास और अमचूर का तीखा खट्टापन आपस में घुलकर इस सब्जी को इसका पारंपरिक जायका प्रदान करते हैं। अब सब्जी को धीमी आंच पर करीब 2 से 3 मिनट तक और पकने दें, जिससे गुड़, अमचूर और अन्य सभी मसाले कद्दू के रेशों में पूरी तरह समा जाएं।
अंतिम स्पर्श और परोसने का सुझाव
सब्जी के पक जाने पर अंत में थोड़ा सा गरम मसाला बुरकें और ऊपर से बारीक कटी हरी धनिया पत्ती छिड़क कर गैस बंद कर दें। अब आपकी गरमा-गरम, रसीली और सुगंधित खट्टी-मीठी कद्दू की सब्जी परोसने के लिए बिल्कुल तैयार है। इसे पूरी, फूली हुई कचौड़ी या गरमा-गरम पराठे के साथ थाली में परोसें। यदि चाहें तो इसे उबले हुए सादे चावल के साथ भी खाया जा सकता है। इसका अनोखा खट्टा और मीठा स्वाद त्योहारों के भोजन को संपूर्ण और यादगार बना देता है।


















