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उत्तर भारत का यह पारंपरिक व्यंजन स्वाद के साथ सेहत का भी रखता है पूरा ख्यालखानपान
1 अक्तू॰ 2026, 12:09 am (30 मिनट पहले)· 0

उत्तर भारत का यह पारंपरिक व्यंजन स्वाद के साथ सेहत का भी रखता है पूरा ख्याल

उत्तर प्रदेश और बिहार के घरों में चना दाल फरा भाप में पकाया जाने वाला एक खास देसी पकवान है, जो कम तेल में बेहतरीन पोषण और ज़ायका देता है।

पारंपरिक भारतीय खानपान में ऐसे कई व्यंजन हैं जो स्वाद में जितने लाजवाब होते हैं, सेहत के लिहाज से भी उतने ही गुणकारी साबित होते हैं। उत्तर प्रदेश और बिहार के घरेलू चूल्हों पर तैयार होने वाला चना दाल फरा ऐसा ही एक नाश्ता है। इस देसी पकवान की खासियत यह है कि इसे किसी भी भारी तेल या रिफाइंड में डीप फ्राई करने के बजाय पूरी तरह भाप की मदद से पकाया जाता है। इसी खूबी की वजह से यह उन लोगों के लिए बेहद मुफीद विकल्प बन जाता है जो बिना तेल-मसाले के भारीपन के कुछ बेहद स्वादिष्ट और पौष्टिक खाना पसंद करते हैं। खासकर सर्दियों के सुहावने मौसम और विभिन्न घरेलू त्योहारों के दौरान इसे घरों में बड़े चाव और उत्साह के साथ तैयार किया जाता है।

मसालेदार दाल की भरावन तैयार करने का तरीका

फरा बनाने के लिए मुख्य सामग्री के रूप में एक कप चना दाल की आवश्यकता होती है, जिसे लगभग चार से पांच घंटे पहले से साफ पानी में भिगोकर रखा गया हो। जब दाल अच्छी तरह फूल जाए, तब उसका अतिरिक्त पानी पूरी तरह छानकर अलग कर लें। इसके बाद दाल को मिक्सी या सिलबट्टे पर अदरक, लहसुन और हरी मिर्च के साथ मिलाकर दरदरा पीसना होता है। ध्यान रहे कि दाल का बिल्कुल बारीक पेस्ट न बने, क्योंकि दरदरापन ही इसके असली टेक्सचर की पहचान है। अब इस पिसी हुई दाल में स्वादानुसार नमक, जीरा, धनिया पाउडर, लाल मिर्च पाउडर और बारीक कटी हुई ताजी हरी धनिया पत्ती डालकर अच्छी तरह मिला लें। इस तरह फरा के अंदर भरी जाने वाली चटपटी और खुशबूदार स्टफिंग तैयार हो जाती है।

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चावल के आटे का नर्म खोल और आकार देने का हुनर

फरा की बाहरी परत बनाने के लिए एक गहरे पैन में उचित मात्रा में पानी, थोड़ा नमक और एक चम्मच घी डालकर आंच पर उबलने के लिए रख दें। जैसे ही पानी में खौल आने लगे, उसमें चावल का आटा डालें और करछी की मदद से तेजी से चलाएं ताकि कोई गांठ न पड़े। इसके तुरंत बाद गैस बंद कर दें और बर्तन को ढक दें। जब यह मिश्रण हल्का गुनगुना रह जाए, तब हाथों पर हल्का सा घी लगाकर इसे अच्छी तरह मसलते हुए बिल्कुल मुलायम आटे की तरह गूंध लें। अब इस गुंधे हुए आटे से छोटी-छोटी लोइयां काटें और उन्हें गोल पूड़ी के आकार में बेल लें। हर पूड़ी के बीच में तैयार की गई चना दाल की स्टफिंग रखें और किनारों को आपस में मोड़ते हुए गुझिया या मोमो के अंदाज में अच्छी तरह सील कर दें।

भाप में पकाने की प्रक्रिया और देसी तड़के का जादू

सभी फरा को आकार देने के बाद एक स्टीमर या किसी बड़े गहरे बर्तन में पानी गरम करें। स्टीमर की जालीदार प्लेट पर हल्का सा चिकनाई लगाकर फरा को व्यवस्थित रखें और ढक्कन बंद करके मध्यम आंच पर लगभग 15 से 20 मिनट तक भाप में पकने दें। जब फरा पूरी तरह पक जाएं, तो उन्हें स्टीमर से बाहर निकालें और कुछ देर के लिए सामान्य तापमान पर ठंडा होने के लिए छोड़ दें। यदि आपको अतिरिक्त देसी स्वाद का आनंद लेना है, तो एक कड़ाही में थोड़ा सा घी गरम करें। उसमें साबुत जीरा, चुटकी भर हींग और ताजी करी पत्तियां डालकर तड़का तैयार करें। स्टीम किए गए फरा को इस सुगंधित तड़के में डालकर हल्का सा भून लें। बाहर से नर्म और अंदर से मसालेदार दाल से भरपूर इस फरा को ताजी हरी धनिया की चटनी, टमाटर की चटनी या ताजे दही के साथ गर्मागर्म परोसें।

सवाल-जवाब

चना दाल फरा बनाने के लिए दाल को कितनी देर भिगोना चाहिए?
चना दाल को पीसने से पहले कम से कम चार से पांच घंटे के लिए पानी में भिगोकर रखना जरूरी होता है।
फरा की बाहरी परत किस चीज से तैयार की जाती है?
इसकी बाहरी परत उबलते पानी, नमक और थोड़े घी में चावल का आटा मिलाकर गूंधे गए नर्म आटे से बनाई जाती है।
दाल को पीसते समय क्या सावधानी रखनी चाहिए?
दाल का अतिरिक्त पानी निकालकर उसे अदरक, लहसुन और हरी मिर्च के साथ हमेशा दरदरा पीसना चाहिए, बिल्कुल महीन पेस्ट नहीं बनाना चाहिए।
फरा को भाप में कितनी देर तक पकाना चाहिए?
फरा को स्टीमर या गहरे बर्तन में रखकर लगभग 15 से 20 मिनट तक भाप में अच्छी तरह पकाया जाता है।
तड़के में किन चीजों का इस्तेमाल किया जाता है?
स्टीम किए गए फरा को अतिरिक्त स्वादिष्ट बनाने के लिए घी में जीरा, हींग और करी पत्ते का तड़का लगाया जाता है।
फरा को किन चीजों के साथ परोसा जाता है?
इसे हरी धनिया की चटनी, टमाटर की चटनी या ताजे दही के साथ गरमा-गरम परोसना सबसे अच्छा माना जाता है।
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