जॉन डियर की मरम्मत सेवाओं को लेकर एक नया समझौता हुआ है, जो 'राइट-टू-रिपेयर' यानी मरम्मत के अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे लोगों के लिए एक बड़ी जीत माना जा रहा है। इस समझौते के तहत जॉन डियर को यह अनिवार्य कर दिया गया है कि वह किसानों और स्वतंत्र मरम्मत कार्यशालाओं को वही उपकरण और संसाधन मुहैया कराए, जो अब तक केवल कंपनी के आधिकारिक डीलरों तक सीमित थे। इसमें विशेष रूप से सॉफ्टवेयर क्षमताएं शामिल हैं, जिसके जरिए अब किसान और स्थानीय मैकेनिक त्रुटि कोड्स को पढ़ सकेंगे, उन्हें रीसेट कर सकेंगे और अन्य सॉफ्टवेयर के साथ अपने उपकरणों को जोड़ पाएंगे। पहले इन सुविधाओं तक सीमित पहुंच होने के कारण अक्सर उपकरणों की खराबी को पहचानने और उन्हें ठीक करने में लंबा समय लग जाता था।
किसानों के लिए समय पर मरम्मत का महत्व
कृषि क्षेत्र में छोटी सी तकनीकी खराबी भी बड़ी मुसीबत बन सकती है। मरम्मत में देरी का सीधा मतलब है कटाई के समय का नुकसान, जो कई किसानों के लिए उनकी आजीविका पर एक बड़े खतरे जैसा था। अब, इस समझौते के लागू होने के बाद, जॉन डियर को अगले 10 वर्षों तक किसानों को यह सभी सुविधाएं प्रदान करनी होंगी। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी एफटीसी यानी फेडरल ट्रेड कमिशन द्वारा की जाएगी, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि कंपनी अपने वादों का पालन कर रही है।
लंबा संघर्ष और कानूनी कदम
इस अधिकार के लिए किसान पिछले एक दशक से अधिक समय से जॉन डियर की नीतियों के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे थे। वर्ष 2021 में एफटीसी ने बाइडन प्रशासन के नेतृत्व में इस मामले में सक्रिय हस्तक्षेप शुरू किया। इससे पहले अप्रैल में, जॉन डियर ने एक अलग क्लास एक्शन मुकदमे में 99 मिलियन डॉलर का भुगतान करने पर सहमति व्यक्त की थी, जो वर्ष 2022 में दायर किया गया था। हालांकि, उपभोक्ता अधिकार समर्थकों का मानना है कि एफटीसी के साथ हुआ यह नया समझौता किसी भी वित्तीय मुआवजे की तुलना में किसानों के लिए कहीं अधिक व्यावहारिक और महत्वपूर्ण है।
जॉन डियर का पक्ष और भविष्य की राह
दूसरी ओर, जॉन डियर का कहना है कि वे पहले से ही अपने ग्राहकों को सर्विस मैनुअल और डायग्नोस्टिक उपकरण जैसे संसाधन उपलब्ध करा रहे हैं। कंपनी ने अपने एक प्रेस बयान में दावा किया कि यह समझौता उनकी पुरानी कार्यप्रणाली के अनुरूप ही है। उनके अनुसार, यह निर्णय ग्राहकों को अधिक लचीले मरम्मत विकल्प देने और पारदर्शिता बढ़ाने की उनकी निरंतर प्रतिबद्धता को औपचारिक रूप देता है। वहीं, यूएस पीआईआरजी जैसे उपभोक्ता अधिकार समूहों ने इस समझौते का स्वागत किया है। पीआईआरजी के राइट टू रिपेयर अभियान के निदेशक नाथन प्रॉक्टर ने कहा कि अब लोग अपने उपकरणों को खुद ठीक करने में सक्षम होंगे। उनके अनुसार, यह न केवल किसानों के लिए, बल्कि उन सभी लोगों के लिए एक जीत है जो अधिक टिकाऊ और मरम्मत योग्य दुनिया का निर्माण देखना चाहते हैं।











