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फरीदाबाद में फैमिली आईडी और पेंशन की अड़चन से बुजुर्ग बेहाल, दफ्तरों के फेरे लगाने को मजबूरहरियाणा
9 अक्तू॰ 2026, 8:06 pm (2 घंटे पहले)· 1

फरीदाबाद में फैमिली आईडी और पेंशन की अड़चन से बुजुर्ग बेहाल, दफ्तरों के फेरे लगाने को मजबूर

हरियाणा में स्वचालित पेंशन के सरकारी दावों के बावजूद फरीदाबाद में फैमिली आईडी की गलतियों और कागजी फेरबदल से बुजुर्गों व दिहाड़ी मजदूरों के जरूरी काम ठप पड़े हैं।

हरियाणा सरकार की ओर से बुजुर्गों के लिए ऑटोमेटिक पेंशन प्रक्रिया शुरू करने के बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन फरीदाबाद के जमीनी हालात इन दावों से बिल्कुल उलट तस्वीर बयां कर रहे हैं। यहां बड़ी संख्या में लोग फैमिली आईडी यानी परिवार पहचान पत्र में दर्ज गड़बड़ियों और पेंशन नहीं बन पाने के कारण भारी दिक्कतों का सामना कर रहे हैं। कई पात्र बुजुर्ग उम्र पूरी हो जाने के बाद भी अपनी सामाजिक सुरक्षा पेंशन से वंचित हैं। इसके अलावा परिवार पहचान पत्र में जरूरत से ज्यादा आय दर्ज हो जाने की वजह से आम परिवारों के तमाम जरूरी काम बीच में ही अटक गए हैं।

सीएससी और सरकारी कार्यालयों के बीच झूलते जरूरतमंद

अपनी समस्याओं को दुरुस्त कराने के लिए नागरिक लगातार सरकारी दफ्तरों और सीएससी सेंटरों के चक्कर काटने को विवश हैं। तकनीकी विसंगतियों का असर न केवल बुजुर्गों पर पड़ रहा है, बल्कि बच्चों के स्कूल दाखिलों तक पर इसका बुरा असर देखा जा रहा है। फरीदाबाद के पल्ला इलाके में रहने वाले 72 वर्षीय देव सिंह बताते हैं कि उनकी उम्र पात्रता से कहीं अधिक हो चुकी है और उनके सारे जरूरी दस्तावेज पूरी तरह तैयार हैं, फिर भी उनकी पेंशन अब तक शुरू नहीं हो पाई है। वे दफ्तरों में बार-बार आते हैं और निराश होकर लौट जाते हैं। उनसे कभी कल आने के लिए कहा जाता है तो कभी परसों की तारीख दे दी जाती है, जिससे वे मानसिक और शारीरिक रूप से बेहद परेशान हो चुके हैं।

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दिहाड़ी छोड़कर महीनों से भटक रहे कामगार

इसी तरह की पीड़ा फरीदाबाद में मेहनत-मजदूरी करके अपने परिवार का पेट पालने वाले राम मनेश भी झेल रहे हैं। वे पिछले 6 से 7 महीने से अपनी फैमिली आईडी से जुड़ी विसंगतियों को सुधारने की जद्दोजहद में जुटे हैं। उन्हें बार-बार सेक्टर 11 स्थित सरकारी कार्यालय से सीएससी सेंटर और वहां से दोबारा दफ्तर का रुख करने के लिए कहा जाता है। इस अंतहीन भागदौड़ के चलते उन्हें अपनी रोजमर्रा की मजदूरी छोड़नी पड़ती है, जिससे परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो रहा है। इतना ही नहीं, परिवार पहचान पत्र की त्रुटियों की वजह से सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने में बाधा आ रही है और उनके बच्चे की पढ़ाई भी बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

आय विवरण की त्रुटियों से बच्चों की पढ़ाई पर गहरा संकट

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि फैमिली आईडी में गलत दर्ज हुई आय को ठीक कराने के लिए लोगों को भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। इस पोर्टल में आय अधिक दर्ज होने के कारण कई परिवारों के बच्चों को स्कूलों से निकाले जाने तक की नौबत आ गई है, जिससे उनका शैक्षणिक भविष्य अधर में लटक गया है। पेंशन से वंचित बुजुर्गों और अन्य प्रभावित लोगों ने मांग की है कि प्रशासन इन समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर त्वरित समाधान निकाले, ताकि बुजुर्गों को उनका हक मिल सके और लोगों के रोजमर्रा के रुके हुए काम सुचारू रूप से पूरे हो सकें।

सवाल-जवाब

फरीदाबाद में बुजुर्गों की पेंशन क्यों अटकी हुई है?
फैमिली आईडी में दर्ज गलत जानकारी, विशेषकर अधिक आय दर्ज होने और कागजी फेरबदल के कारण पात्र बुजुर्गों की पेंशन नहीं बन पा रही है।
देव सिंह को पेंशन के लिए क्या समस्या आ रही है?
फरीदाबाद के पल्ला निवासी 72 वर्षीय देव सिंह के सभी दस्तावेज तैयार हैं, लेकिन उन्हें दफ्तरों से बार-बार कल या परसों आने के लिए कहकर लौटा दिया जाता है।
राम मनेश कितने समय से दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं?
राम मनेश पिछले 6 से 7 महीने से अपनी फैमिली आईडी की समस्या ठीक कराने के लिए सेक्टर 11 कार्यालय और सीएससी सेंटरों के चक्कर लगा रहे हैं।
फैमिली आईडी में गलत आय दर्ज होने से परिवारों पर क्या असर पड़ रहा है?
गलत आय की वजह से लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है और कई बच्चों को स्कूल से निकाले जाने से उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Neha Verma@neha-verma·29 मिनट पहले

बुजुर्गों और दिहाड़ी मजदूरों को इस तरह दफ्तरों के चक्कर कटवाना बहुत गलत है। एक तरफ ऑटोमेटिक पेंशन के बड़े दावे होते हैं और दूसरी तरफ जरा सी तकनीकी गलती से लोगों की जिंदगी और बच्चों की पढ़ाई अटक जाती है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·49 मिनट पहले

छह-सात महीने से राम मनेश दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, मजदूरी अलग मारी जा रही है।

Ravikash Gupta@ravikash·48 मिनट पहले

अर्जुन जी, बात तो सही है पर छह महीने सिर्फ चक्कर काटने में ही निकल जाएं, इस पर थोड़ा यकीन करना मुश्किल लगता है।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

सिस्टम ऑनलाइन होने के बाद भी बुजुर्गों को पेंशन के लिए चक्कर काटने पड़ रहे हैं। यूपी के जिलों में भी परिवार रजिस्टर और पोर्टल की ऐसी तकनीकी गलतियों से आम लोग महीनों परेशान होते हैं, सुधार का कोई आसान रास्ता नहीं मिलता।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

रोहन भाई, यूपी का तो पता नहीं, पर यहाँ फरीदाबाद में तो अधिकारी खुद सीएससी भेज रहे हैं, मामला सिर्फ पोर्टल की गलती का नहीं लगता।

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