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घर के गमलों में मोगरा-गुलाब पर नहीं आ रहे फूल? 50 साल के माली ने बताया शानदार तरीकाजीवनशैली
2 घंटे पहले· 2

घर के गमलों में मोगरा-गुलाब पर नहीं आ रहे फूल? 50 साल के माली ने बताया शानदार तरीका

अगर आपके गमलों में लगे फूल वाले पौधे ठीक से खिल नहीं रहे हैं, तो कोटा के अनुभवी माली बच्चू सिंह द्वारा बताए गए इन खास बागवानी टिप्स को अपनाएं। सही खाद और पानी के सही प्रबंधन से आप अपने घर के गार्डन को फूलों से भर सकते हैं।

प्रिया शर्माप्रिया शर्मालाइफस्टाइल एडिटर 3 मिनट पढ़ें AI के लिए
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घर की बालकनी, छत या छोटे से गार्डन में रंग-बिरंगे फूलों का होना सबको पसंद आता है। मोगरा, गुलाब, चमेली, हरसिंगार और चांदनी जैसे पौधे अमूमन हर घर की शोभा बढ़ाते हैं, लेकिन एक आम समस्या यह देखने को मिलती है कि नर्सरी से लाए गए ये पौधे कुछ समय बाद फूल देना बंद कर देते हैं या फिर सूखने लगते हैं। कई लोग इसे सिर्फ मौसम का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। हकीकत में, इसके पीछे पौधों की देखभाल, सिंचाई और सही पोषण की कमी मुख्य कारण होती है। केवल नियमित पानी देने भर से काम नहीं चलता, बल्कि पौधों को समय पर खाद और सही देखभाल की भी सख्त जरूरत होती है।

पौधों में फूल न आने की मुख्य वजह

कोटा के रहने वाले और बागवानी के क्षेत्र में 50 वर्षों का लंबा अनुभव रखने वाले माली बच्चू सिंह के अनुसार, मोगरा, बेला, चमेली, चांदनी और गुलाब जैसे पौधों को निरंतर फूल देने के लिए उचित पोषण चाहिए होता है। ज्यादातर लोग पौधों में रोज पानी तो डालते हैं लेकिन खाद देने में लापरवाही बरतते हैं। यही सबसे बड़ी चूक साबित होती है। यदि पौधों में हर महीने नियमित रूप से खाद दी जाए, तो वे न केवल स्वस्थ रहते हैं, बल्कि उन पर फूलों की भरमार भी रहती है। पोषण की कमी होने पर पौधे केवल हरे तो दिखते हैं, लेकिन उनमें कलियां नहीं बनतीं।

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अत्यधिक पानी से जड़ें हो सकती हैं खराब

बच्चू सिंह का मानना है कि पौधों के खराब होने का एक प्रमुख कारण जरूरत से ज्यादा पानी देना है। कई शौकीन माली पौधों को हरा-भरा बनाए रखने के चक्कर में आवश्यकता से अधिक पानी डाल देते हैं, जिससे जड़ों में सड़न पैदा होने लगती है। इसके विपरीत, पानी की कमी होना भी पौधों के लिए घातक हो सकता है। बरसात के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह देते हुए बच्चू सिंह कहते हैं कि गमले को मिट्टी से पूरा ऊपर तक भरें, ताकि बारिश का अतिरिक्त पानी रुकने के बजाय बाहर निकल जाए। इससे गमले की जड़ों में पानी जमा नहीं होगा और पौधा सुरक्षित रहेगा।

खाद के रूप में DAP और वर्मीकंपोस्ट का उपयोग

पौधों के पोषण के लिए बच्चू सिंह डीएपी (DAP) और वर्मीकंपोस्ट को एक बेहतरीन विकल्प मानते हैं। इनके अलावा, बाजार में उपलब्ध अच्छी गुणवत्ता वाली जैविक खाद का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। समय-समय पर संतुलित मात्रा में खाद देने से पौधों का विकास तेजी से होता है और उन पर फूलों की संख्या भी बढ़ती है।

घर की बनी खाद को इस्तेमाल करने का सही तरीका

अगर आप घर पर गोबर या रसोई के जैविक कचरे से खाद तैयार कर रहे हैं, तो उसे सीधे पौधों में कभी न डालें। ऐसी खाद में मीथेन जैसी कुछ गर्म गैसें मौजूद होती हैं जो पौधों की जड़ों को जला सकती हैं या उन्हें नुकसान पहुंचा सकती हैं। बच्चू सिंह सुझाव देते हैं कि घर की बनी खाद को दो से तीन दिन तक धूप या खुली हवा में अच्छी तरह सुखा लेना चाहिए। ऐसा करने से हानिकारक गैसें निकल जाती हैं और खाद पूरी तरह सुरक्षित हो जाती है।

नियमित देखभाल से सालभर महकेगा गार्डन

बच्चू सिंह का स्पष्ट मानना है कि यदि पौधों को समय पर पोषण, संतुलित सिंचाई और मौसम के अनुकूल देखभाल मिले, तो वे लंबे समय तक स्वस्थ बने रहते हैं। छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर और निरंतर देखभाल के जरिए कोई भी व्यक्ति अपने घर के छोटे से गार्डन को सालभर रंग-बिरंगे फूलों से महका सकता है।

इसका आप पर असर

भारत में: बागवानी के शौकीनों को खाद देते समय यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वह अच्छी तरह सूख गई हो, ताकि पौधों की जड़ें सुरक्षित रहें।

कोटा में: स्थानीय निवासियों को वर्षा ऋतु के दौरान गमलों में जलभराव की समस्या को रोकने के लिए मिट्टी का स्तर गमले के ऊपरी किनारे तक रखने की सलाह दी जाती है।

प्रेरणा और सीख

  • नियमितता का महत्व: केवल पानी देना काफी नहीं है, पौधों को हर महीने संतुलित पोषण (खाद) देना अनिवार्य है।
  • सीखने की प्रक्रिया: बागवानी के प्रति 50 वर्षों का धैर्य और अनुभव पौधों की भाषा को समझने में मदद करता है।
  • सावधानी जरूरी है: घर पर बनी जैविक खाद का उपयोग करने से पहले उसे धूप में सुखाना जरूरी है ताकि हानिकारक गैसें निकल जाएं।
  • मिट्टी का प्रबंधन: गमलों में जल निकासी सुनिश्चित करना पौधों को जड़ के सड़ने से बचाने का सबसे प्रभावी तरीका है।

सवाल-जवाब

पौधे हरे-भरे क्यों दिखते हैं लेकिन उन पर फूल क्यों नहीं आते?
इसका मुख्य कारण पौधों में पोषण की कमी होना है। नियमित रूप से खाद न देने पर पौधे अपनी ऊर्जा केवल पत्तियों को उगाने में लगा देते हैं और फूल नहीं खिला पाते।
क्या रोज पानी देना पौधों के लिए अच्छा है?
नहीं, जरूरत से ज्यादा पानी देना पौधों की जड़ों के लिए नुकसानदायक है क्योंकि इससे उनमें सड़न पैदा हो सकती है।
घर पर बनी जैविक खाद को सीधे क्यों नहीं डालना चाहिए?
घर की खाद में मीथेन जैसी गर्म गैसें होती हैं जो पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसे पहले धूप में दो-तीन दिन सुखाना चाहिए।
बारिश के मौसम में गमलों को खराब होने से कैसे बचाएं?
गमले को ऊपर तक मिट्टी से भरें ताकि अतिरिक्त बारिश का पानी रुकने के बजाय बाहर निकल जाए और जड़ों में जलभराव न हो।
प्रिया शर्मा
लेखक के बारे मेंप्रिया शर्मालाइफस्टाइल एडिटर नई दिल्ली
विशेषज्ञतालाइफस्टाइल पत्रकारिता, वेलनेस, यात्रा, संस्कृति, रिश्ते, खानपान, फ़ैशन, आधुनिक जीवन, व्यक्तित्व विकास, संपादकीय क्यूरेशन

प्रिया शर्मा एक लाइफस्टाइल एडिटर हैं जो आधुनिक जीवनशैली, वेलनेस, यात्रा, संस्कृति, रिश्तों और रोज़मर्रा के लाइफस्टाइल रुझानों को कवर करती हैं। वे समकालीन जीवन और पाठकों की रुचियों को दर्शाने वाली दिलचस्प सामग्री तैयार करती हैं।

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