घर की बालकनी, छत या छोटे से गार्डन में रंग-बिरंगे फूलों का होना सबको पसंद आता है। मोगरा, गुलाब, चमेली, हरसिंगार और चांदनी जैसे पौधे अमूमन हर घर की शोभा बढ़ाते हैं, लेकिन एक आम समस्या यह देखने को मिलती है कि नर्सरी से लाए गए ये पौधे कुछ समय बाद फूल देना बंद कर देते हैं या फिर सूखने लगते हैं। कई लोग इसे सिर्फ मौसम का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। हकीकत में, इसके पीछे पौधों की देखभाल, सिंचाई और सही पोषण की कमी मुख्य कारण होती है। केवल नियमित पानी देने भर से काम नहीं चलता, बल्कि पौधों को समय पर खाद और सही देखभाल की भी सख्त जरूरत होती है।
पौधों में फूल न आने की मुख्य वजह
कोटा के रहने वाले और बागवानी के क्षेत्र में 50 वर्षों का लंबा अनुभव रखने वाले माली बच्चू सिंह के अनुसार, मोगरा, बेला, चमेली, चांदनी और गुलाब जैसे पौधों को निरंतर फूल देने के लिए उचित पोषण चाहिए होता है। ज्यादातर लोग पौधों में रोज पानी तो डालते हैं लेकिन खाद देने में लापरवाही बरतते हैं। यही सबसे बड़ी चूक साबित होती है। यदि पौधों में हर महीने नियमित रूप से खाद दी जाए, तो वे न केवल स्वस्थ रहते हैं, बल्कि उन पर फूलों की भरमार भी रहती है। पोषण की कमी होने पर पौधे केवल हरे तो दिखते हैं, लेकिन उनमें कलियां नहीं बनतीं।
अत्यधिक पानी से जड़ें हो सकती हैं खराब
बच्चू सिंह का मानना है कि पौधों के खराब होने का एक प्रमुख कारण जरूरत से ज्यादा पानी देना है। कई शौकीन माली पौधों को हरा-भरा बनाए रखने के चक्कर में आवश्यकता से अधिक पानी डाल देते हैं, जिससे जड़ों में सड़न पैदा होने लगती है। इसके विपरीत, पानी की कमी होना भी पौधों के लिए घातक हो सकता है। बरसात के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह देते हुए बच्चू सिंह कहते हैं कि गमले को मिट्टी से पूरा ऊपर तक भरें, ताकि बारिश का अतिरिक्त पानी रुकने के बजाय बाहर निकल जाए। इससे गमले की जड़ों में पानी जमा नहीं होगा और पौधा सुरक्षित रहेगा।
खाद के रूप में DAP और वर्मीकंपोस्ट का उपयोग
पौधों के पोषण के लिए बच्चू सिंह डीएपी (DAP) और वर्मीकंपोस्ट को एक बेहतरीन विकल्प मानते हैं। इनके अलावा, बाजार में उपलब्ध अच्छी गुणवत्ता वाली जैविक खाद का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। समय-समय पर संतुलित मात्रा में खाद देने से पौधों का विकास तेजी से होता है और उन पर फूलों की संख्या भी बढ़ती है।
घर की बनी खाद को इस्तेमाल करने का सही तरीका
अगर आप घर पर गोबर या रसोई के जैविक कचरे से खाद तैयार कर रहे हैं, तो उसे सीधे पौधों में कभी न डालें। ऐसी खाद में मीथेन जैसी कुछ गर्म गैसें मौजूद होती हैं जो पौधों की जड़ों को जला सकती हैं या उन्हें नुकसान पहुंचा सकती हैं। बच्चू सिंह सुझाव देते हैं कि घर की बनी खाद को दो से तीन दिन तक धूप या खुली हवा में अच्छी तरह सुखा लेना चाहिए। ऐसा करने से हानिकारक गैसें निकल जाती हैं और खाद पूरी तरह सुरक्षित हो जाती है।
नियमित देखभाल से सालभर महकेगा गार्डन
बच्चू सिंह का स्पष्ट मानना है कि यदि पौधों को समय पर पोषण, संतुलित सिंचाई और मौसम के अनुकूल देखभाल मिले, तो वे लंबे समय तक स्वस्थ बने रहते हैं। छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर और निरंतर देखभाल के जरिए कोई भी व्यक्ति अपने घर के छोटे से गार्डन को सालभर रंग-बिरंगे फूलों से महका सकता है।











