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महाराष्ट्र में 16 अक्टूबर से लागू होगी कम से कम 10 प्रतिशत पानी की कटौती, 265 तालुकों में सूखा घोषितभारत
7 अक्तू॰ 2026, 5:57 pm (2 घंटे पहले)· 0

महाराष्ट्र में 16 अक्टूबर से लागू होगी कम से कम 10 प्रतिशत पानी की कटौती, 265 तालुकों में सूखा घोषित

कम बारिश और अल नीनो के असर के चलते महाराष्ट्र सरकार ने 16 अक्टूबर से राज्यभर के शहरी व ग्रामीण इलाकों में कम से कम 10 प्रतिशत पानी कटौती का निर्देश दिया है। उद्योगों को 30 प्रतिशत पानी रीसायकल करने को कहा गया है।

महाराष्ट्र में सूखे और संभावित जल संकट की आहट को देखते हुए राज्य प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। आगामी शुष्क मौसम में पानी की भारी किल्लत न हो, इसके लिए 16 अक्टूबर से पूरे राज्य में अनिवार्य रूप से कम से कम 10 प्रतिशत पानी की कटौती लागू की जा रही है। यह फैसला मानसून के दौरान हुई कम बारिश, बांधों में सीमित जल भंडारण और अल नीनो परिस्थितियों के कारण पैदा हुए जोखिम को ध्यान में रखकर लिया गया है। यदि आने वाले दिनों में स्थिति और अधिक गंभीर होती है, तो इस कटौती के अनुपात को और भी बढ़ाया जा सकता है।

शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों पर पड़ेगा असर

जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन ने राज्य की सभी नगर पालिकाओं, नगर निगमों और ग्राम पंचायतों को इस जल कटौती को कड़ाई से लागू करने का निर्देश दिया है। इसका मतलब यह है कि पानी की कमी का प्रभाव केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि गांवों और कस्बों में भी लोगों को आपूर्ति में कटौती का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, अलग-अलग शहरों और इलाकों में पानी की आपूर्ति का समय या तरीका क्या होगा, इसकी विस्तृत कार्ययोजना स्थानीय स्तर पर जारी की जाएगी।

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मुंबई, पुणे, नागपुर और अन्य प्रमुख शहरों के नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे जलापूर्ति के समय में होने वाले बदलावों को लेकर किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और अपने संबंधित स्थानीय निकायों की आधिकारिक घोषणाओं की प्रतीक्षा करें। प्रत्येक नगर निगम और परिषद अपनी स्थानीय उपलब्धता और जरूरतों के अनुसार पानी के वितरण का नया शेड्यूल तय करेगी।

31 अगस्त 2027 तक के लिए जल आवंटन की योजना

जल संसाधन विभाग ने राज्य के सभी व्यक्तिगत बांधों में मौजूदा जल स्तर का बारीकी से आकलन किया है। इसी आधार पर 31 अगस्त 2027 तक के लिए पानी के आवंटन की एक व्यापक योजना तैयार की गई है। इस दीर्घकालिक योजना को तैयार करते समय कई महत्वपूर्ण चुनौतियों को शामिल किया गया है, जिनमें तेज गर्मी के कारण होने वाला वाष्पीकरण, बांधों में गाद (सिल्ट) का जमाव, बड़े पैमाने पर होने वाली अनधिकृत जल निकासी और भविष्य में सूखे जैसी गंभीर परिस्थितियों की आशंका शामिल हैं।

राज्य की इस नई जल नीति के तहत पीने के पानी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी हाल में 31 अगस्त 2027 तक नागरिकों के लिए पेयजल सुरक्षित रहे। इसी प्राथमिकता को ध्यान में रखते हुए गैर-जरूरी उपयोग पर अंकुश लगाया जा रहा है।

2026 खरीफ सीजन में 265 तालुकों में सूखा घोषित

कम बारिश की मार राज्य के कृषि क्षेत्र पर साफ देखी जा रही है। महाराष्ट्र सरकार ने 2026 के खरीफ सीजन के दौरान ट्रिगर-1 मानदंड के तहत 265 तालुकों में आधिकारिक तौर पर सूखा घोषित कर दिया है। ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों में पानी की कमी ने संकट को और गहरा कर दिया है, जिसके चलते प्रशासन को जलाशयों के पानी को संरक्षित करने के लिए तत्काल कड़े नियम बनाने पड़े हैं।

उद्योगों के लिए 30 प्रतिशत पानी रीसायकल करना अनिवार्य

पानी बचाने की इस मुहिम में केवल आम नागरिकों पर ही जिम्मेदारी नहीं डाली गई है, बल्कि औद्योगिक इकाइयों के लिए भी कड़े नियम तय किए गए हैं। महाराष्ट्र सरकार ने उद्योगों को निर्देश दिया है कि वे अपने द्वारा उपयोग किए जाने वाले पानी में से कम से कम 30 प्रतिशत पानी का पुनर्चक्रण (रीसायकल) या पुन: उपयोग (रीयूज) अनिवार्य रूप से करें। इससे औद्योगिक कार्यों में ताजे पानी की खपत में कमी आएगी और जलाशयों पर दबाव घटेगा। प्रशासन ने सभी नागरिकों से भी अपील की है कि वे पानी की बर्बादी को पूरी तरह रोकें और 16 अक्टूबर से पहले अपने स्थानीय निकायों द्वारा जारी किए जाने वाले दिशा-निर्देशों पर नजर रखें।

सवाल-जवाब

महाराष्ट्र में पानी की 10 प्रतिशत कटौती कब से शुरू होगी?
राज्यभर में यह कटौती 16 अक्टूबर से अनिवार्य रूप से लागू की जाएगी।
किन क्षेत्रों पर इस पानी कटौती का प्रभाव पड़ेगा?
यह आदेश नगर निगमों, नगर पालिकाओं और ग्राम पंचायतों सहित शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों पर लागू होगा।
क्या पानी की कटौती 10 प्रतिशत से अधिक बढ़ाई जा सकती है?
हां, यदि जलाशयों में पानी की स्थिति और अधिक खराब होती है, तो कटौती के अनुपात को बढ़ाया जा सकता है।
राज्य में कितने तालुकों में सूखा घोषित किया गया है?
वर्ष 2026 के खरीफ सीजन में ट्रिगर-1 मानदंड के तहत 265 तालुकों में सूखा घोषित किया गया है।
पीने के पानी को कब तक के लिए सुरक्षित रखने की योजना बनाई गई है?
राज्य सरकार ने जल आवंटन योजना के तहत पीने के पानी को 31 अगस्त 2027 तक संरक्षित रखने का फैसला किया है।
उद्योगों के लिए पानी के उपयोग को लेकर क्या नियम बनाए गए हैं?
उद्योगों के लिए अपने कुल उपभोग का कम से कम 30 प्रतिशत पानी रीसायकल या पुन: उपयोग करना अनिवार्य किया गया है।
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टिप्पणियाँ 5

Kavya Nair@kavya-nair·21 मिनट पहले

महाराष्ट्र के गांवों में घूमते वक्त मैंने हमेशा पानी की कमी का असर देखा है। यह कटौती बहुत ज़रूरी है।

Ravikash Gupta@ravikash·42 मिनट पहले

अल नीनो और कम बारिश की मार अब साफ़ दिखने लगी है। अक्टूबर से पानी की कटौती शुरू होना वाकई चिंताजनक है, खासकर जब इतने सारे तालुकों में सूखा घोषित हो चुका है।

Ayesha Siddiqui@ayesha-siddiqui·42 मिनट पहले

रविकेश, बात तो सही है आपकी। पर क्या उद्योगों के लिए तय 30 प्रतिशत पानी रीसायकल करने का नियम ज़मीन पर सच में लागू हो पाएगा?

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

पानी की यह कटौती आने वाले दिनों में जनता के लिए बड़ी परेशानी खड़ी करेगी।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

करन भाई, बिल्कुल सही कह रहे हो। पिछले साल जब बुंदेलखंड दौरे पर गया था, तब एक-एक बाल्टी पानी के लिए लोगों को लाइन में लगते देखा था, दर्दनाक था वह मंजर।

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