हैदराबाद के अंदर डांडिया और गरबा उत्सवों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े मुस्लिम कर्मचारियों के कथित बहिष्कार को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और गौशामहल के विधायक टी राजा सिंह इस मुद्दे पर एक-दूसरे के खिलाफ खुलकर सामने आ गए हैं। इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब स्थानीय बाउंसरों और सुरक्षा सेवा एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि त्योहारों से जुड़े आयोजनों में धर्म के आधार पर कर्मियों को काम देने से रोका जा रहा है।
बाउंसरों और सुरक्षा एजेंसियों ने लगाए भेदभाव के आरोप
हैदराबाद में सुरक्षा सेवाएं देने वाली एजेंसियों और मुस्लिम बाउंसरों ने एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी स्थिति रखी। इन प्रतिनिधियों ने दावा किया कि 2024 के बाद से मुस्लिम कर्मियों को डांडिया उत्सवों, होटलों और विभिन्न आयोजनों में अनुबंध देने से लगातार मना किया जा रहा है। इससे जुड़े पेशेवरों का कहना है कि वे वर्षों से शहर के प्रमुख आयोजनों में व्यवस्था संभालते रहे हैं, लेकिन अब अचानक लिए जा रहे फैसलों से उनके सामने आजीविका का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
सुरक्षा एजेंसी के प्रतिनिधियों शंकर रेड्डी, सलिगे प्रभाकर और सलमान के साथ उपस्थित होकर पेशेवर बाउंसर एमडी फिरोज (जिन्हें फजल भी कहा जाता है) ने कहा कि राज्य में हजारों हिंदू और मुस्लिम बाउंसर एक साथ काम करते हैं। उन्होंने आयोजकों से अपील की कि सभी कर्मियों के साथ एक जैसा व्यवहार किया जाए क्योंकि पेशेवर जिम्मेदारी में धर्म की कोई भूमिका नहीं होती। फिरोज के अनुसार, पूर्व में उन्हें शहर के अधिकांश डांडिया कार्यक्रमों के अनुबंध मिलते थे, जबकि इस वर्ष उनके साथियों को स्पष्ट रूप से कहा गया कि मुस्लिम बाउंसरों की सेवाएं स्वीकार नहीं की जाएंगी। उन्होंने यह चिंता भी जताई कि कुछ समूह डांडिया आयोजनों में लाइटिंग, डेकोरेशन, डीजे और साउंड सिस्टम जैसी सेवाओं में लगे मुस्लिम कर्मचारियों के बहिष्कार का अभियान भी चला रहे हैं। इन एजेंसियों ने तेलंगाना सरकार और पुलिस से मांग की है कि उनकी आजीविका प्रभावित करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
असदुद्दीन ओवैसी ने पुलिस कार्रवाई और सामाजिक एकता की अपील की
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बयान जारी कर इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि चरमपंथी संगठनों के दबाव में इवेंट आयोजक मुस्लिम कर्मियों का बहिष्कार कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि पुलिस सख्त कार्रवाई करे तो इस माहौल पर रोक लगाई जा सकती है।
असदुद्दीन ओवैसी ने तेलंगाना के नागरिकों से अपील की कि राज्य के विकास और सौहार्द की रक्षा के लिए सभी को धर्म से ऊपर उठकर ऐसी प्रवृत्तियों के खिलाफ एकजुट होना चाहिए। उनका मानना है कि यदि इस प्रकार के बहिष्कारों को रोका नहीं गया, तो इसका सीधा असर राज्य की प्रगति पर पड़ेगा।
विधायक टी राजा सिंह का तीखा पलटवार
दूसरी तरफ, गौशामहल से विधायक और हिंदूवादी नेता टी राजा सिंह ने इन आरोपों पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि तेलंगाना में नवरात्र के अवसर पर गरबा और डांडिया उत्सव बड़े पैमाने पर मनाए जाते हैं। उन्होंने दावा किया कि बीते 4-5 वर्षों से गैर-हिंदू कर्मियों को इन धार्मिक उत्सवों से दूर रखने का अभियान चलाया जा रहा है, जिसे कई आयोजकों का समर्थन भी मिला है।
टी राजा सिंह ने आरोप लगाया कि पूर्व के वर्षों में डांडिया उत्सवों में ऐसे कर्मियों की मौजूदगी के चलते विवाद बढ़े हैं। उन्होंने असदुद्दीन ओवैसी के बयान पर सीधा सवाल उठाते हुए कहा कि किसी को हिंदू धार्मिक उत्सवों के प्रबंधन को लेकर दिशा-निर्देश देने का अधिकार नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों पक्षों की सोच में बड़ा अंतर है और हिंदू त्योहारों में हिंदू कर्मियों को ही प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
अन्य क्षेत्रों में भी सामने आ चुकी हैं घटनाएं
त्योहारों के दौरान उत्सव परिसरों में प्रवेश और पहचान को लेकर विवाद पहले भी दर्ज किए जा चुके हैं। इससे पहले उत्तर प्रदेश के कानपुर में गरबा और डांडिया कार्यक्रम परिसर में प्रवेश करने को लेकर एक युवक के साथ मारपीट की घटना सामने आई थी, जिसका वीडियो भी प्रसारित हुआ था। इसी प्रकार धार्मिक संगठनों द्वारा गरबा कार्यक्रमों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर विरोध प्रदर्शन के मामले भी दर्ज किए गए हैं। हैदराबाद में छिड़ी यह बहस अब तेलंगाना के सामाजिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बन गई है।



















