सीबीएसई की ओर से आयोजित 10वीं कक्षा की दूसरी बोर्ड परीक्षा में शामिल हुए लाखों छात्रों के लिए स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। परीक्षा संपन्न हुए 50 दिन पूरे हो चुके हैं, बावजूद इसके अब तक नतीजों की घोषणा नहीं की गई है। इस देरी का सीधा असर छात्रों के शैक्षणिक सत्र पर पड़ रहा है, क्योंकि वे 11वीं कक्षा में अपना दाखिला पक्का नहीं कर पा रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अभिभावकों का आक्रोश साफ देखा जा सकता है, जहां वे बोर्ड प्रशासन से जल्द से जल्द परिणाम घोषित करने का आग्रह कर रहे हैं। कई परिजनों का कहना है कि जहां एक ओर बच्चों का एडमिशन लटकने की वजह से उनका भविष्य दांव पर है, वहीं दूसरी ओर स्कूल प्रबंधन अप्रैल महीने से ही फीस जमा करने का दबाव बना रहे हैं।
सीबीएसई की दोहरी परीक्षा प्रणाली
बोर्ड ने वर्ष 2026 से 10वीं के छात्रों के लिए दो बार बोर्ड परीक्षा आयोजित करने का प्रावधान लागू किया है। नई नीति के मुताबिक, पहली परीक्षा मुख्य परीक्षा के रूप में होती है, जिसमें सभी छात्रों को सम्मिलित होना अनिवार्य है। वहीं, दूसरी परीक्षा उन छात्रों के लिए एक अतिरिक्त विकल्प के तौर पर है जो कंपार्टमेंट श्रेणी में हैं या फिर अपने अंकों में सुधार करना चाहते हैं। बोर्ड द्वारा प्रदान की जाने वाली अंक-तालिका-सह-प्रमाणपत्र में दोनों में से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन को आधार बनाया जाता है। पहली परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण करने वाले छात्र विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान और अन्य भाषाओं सहित अधिकतम तीन विषयों में अपने प्राप्तांक बेहतर करने के लिए दूसरी परीक्षा का सहारा ले सकते हैं।
परीक्षा के आंकड़े और देरी का संकट
इस दूसरी बोर्ड परीक्षा के लिए कुल 6,68,854 नियमित उम्मीदवारों ने पंजीकरण कराया था। इनमें से 5,25,655 छात्रों ने केवल अंकों में सुधार के उद्देश्य से परीक्षा दी, 85,285 छात्र कंपार्टमेंट श्रेणी के अंतर्गत थे, जबकि 57,914 छात्रों ने सुधार और कंपार्टमेंट दोनों श्रेणियों के लिए आवेदन किया था। इन छात्रों की परीक्षाएं 15 मई से शुरू होकर 21 मई तक चली थीं। उल्लेखनीय है कि अन्य छात्रों ने तो अप्रैल में ही 11वीं कक्षा में दाखिला लेकर अपनी पढ़ाई शुरू कर दी है, जबकि ये लाखों छात्र अभी भी केवल अपने रिजल्ट के आने का इंतजार कर रहे हैं ताकि वे कॉलेज या स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया को पूरा कर सकें।
बढ़ती बेचैनी और आधिकारिक अनिश्चितता
परिणाम जारी होने में हो रही लंबी देरी ने छात्रों और उनके परिवारों के बीच तनाव बढ़ा दिया है। वर्तमान में ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि रिजल्ट अगले सात दिनों के भीतर जारी किया जा सकता है, हालांकि सीबीएसई की तरफ से इस संबंध में अभी तक कोई भी आधिकारिक सूचना या बयान जारी नहीं किया गया है। अभिभावक इस बात से खासे परेशान हैं कि स्कूल प्रशासन दाखिला पूरा न होने के बावजूद फीस की मांग कर रहे हैं। इस अनिश्चितता के कारण न केवल छात्रों का समय बर्बाद हो रहा है, बल्कि उन पर मानसिक दबाव भी बना हुआ है, क्योंकि उनके भविष्य के शैक्षणिक विकल्प रिजल्ट आने तक पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो पा रहे हैं।







