अंतरंग पलों में दो लोगों के बीच आपसी संवाद होना आमतौर पर रिश्ते को बेहतर और गहरा बनाता है। बेडरूम में अपनी पसंद, गति या तरीके के बारे में हल्की हिदायत देना दोनों ही साथियों के लिए सुखद अनुभव तैयार करता है। लेकिन कई बार अनजाने में कहे गए चंद लफ्ज पुरुष पार्टनर के मन में भारी दबाव पैदा कर देते हैं। कई पुरुषों के लिए यह स्थिति इतनी असहज हो जाती है कि वे अपना इरेक्शन खो बैठते हैं और उनके भीतर खुद को लेकर हीनभावना घर करने लगती है।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म रेडिट पर जेम्स नाम के एक यूजर ने इस बारे में अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने लिखा कि महिला पार्टनर की तरफ से अक्सर यह सुनने को मिलता है कि रुको मत, और तेज करो। खासकर पीछे से संबंध बनाते समय ऐसी बातें ज्यादा सामने आती हैं। जेम्स के मुताबिक, ऐसी स्थिति में वे अपनी पूरी ऊर्जा झोंक देते हैं, जिससे एक समय बाद वे शारीरिक रूप से असहज हो जाते हैं और कई बार इरेक्शन भी खत्म हो जाता है। उनके भीतर तुरंत यह डर जाग उठता है कि वे यौन संतुष्टि देने में नाकाम रहे हैं। सेक्स विशेषज्ञ गीगी एंगल बताती हैं कि ऐसी मांग पुरुषों में अनजाना तनाव पैदा कर देती है, जिसे गहराई से समझने की जरूरत है।
परफॉर्मेंस का भारी मानसिक दबाव और नाकामी का डर
हर पुरुष की प्रतिक्रिया एक जैसी नहीं होती। निश्चित रूप से कई पुरुष ऐसे भी होते हैं जिन्हें पार्टनर से इस तरह के शब्द सुनकर उत्तेजना मिलती है। लेकिन हर किसी के साथ ऐसा नहीं होता और यहीं से मानसिक उलझनें शुरू होती हैं।
गीगी एंगल के अनुसार, सबसे बड़ी चूक यह मान लेने में होती है कि ऐसी बातें हर किसी को पसंद आती हैं। कुछ पुरुषों को तुरंत लगने लगता है कि अगर वे जल्दी स्खलित हो गए तो वे नाकाम साबित होंगे। वहीं कुछ अन्य पुरुष पहले से ही अपनी पूरी ताकत लगा रहे होते हैं, इसलिए ऐसी बात सुनते ही उनके दिमाग में ख्याल आता है कि वे शायद अपने साथी के लिए पर्याप्त नहीं हैं। यही सोच उनमें परफॉर्मेंस का भारी दबाव बना देती है।
रिलेशनशिप ट्रॉमा से उबरने में पुरुषों की मदद करने वाले बीएसीपी रजिस्टर्ड मनोचिकित्सक एलेक विलियम्स का मानना है कि अंतरंगता के दौरान पुरुषों पर यह दबाव एक दोहरा चक्र बन जाता है। पुरुष सारा ध्यान केवल अपने प्रदर्शन और सब कुछ सही करने पर केंद्रित कर लेते हैं। इस वजह से वे अपने विचारों में ही उलझ जाते हैं। जब दिमाग तनाव में होता है, तो उसका सीधा असर शरीर की कार्यप्रणाली पर पड़ता है। नतीजा यह होता है कि इरेक्शन खत्म हो जाता है या चरम सुख तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। इससे अगली बार के लिए मन में और ज्यादा हिचकिचाहट और डर पैदा हो जाता है।
गीगी एंगल यह भी रेखांकित करती हैं कि अगर कोई पुरुष स्खलन के बेहद करीब है और ठीक उसी वक्त उसे कहा जाए कि रुको मत, और तेज करो, तो वह अचानक वीर्यपात कर सकता है। समय से पहले हुआ यह स्खलन पुरुष को गहरी शर्मिंदगी और पछतावे में धकेल देता है।
शारीरिक थकान, अति-उत्तेजना और चोट का जोखिम
मानसिक दबाव के अलावा भी जरूरत से ज्यादा तेजी या ताकत से संबंध बनाने के अपने शारीरिक नुकसान होते हैं। लगातार बहुत ज्यादा बल लगाने से पुरुष का शरीर थक जाता है। शारीरिक थकान सीधे तौर पर इरेक्शन को कमजोर कर देती है या फिर स्खलन में असामान्य देरी की वजह बनती है। दूसरी तरफ, बहुत अधिक शारीरिक उत्तेजना होने से शीघ्रपतन की समस्या भी पैदा हो सकती है।
किंक क्यूरियस पुस्तक की लेखिका गीगी एंगल चेतावनी देती हैं कि दुर्लभ मामलों में बहुत आक्रामक तरीके से संबंध बनाने से शारीरिक चोटें भी लग सकती हैं। यदि संभोग के दौरान लिंग बाहर फिसल जाए और तुरंत तेज झटके के साथ वापस अंदर जाए, तो गलत कोण बनने से लिंग में फ्रैक्चर जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है।
जिन पुरुषों का खतना नहीं हुआ है, उन्हें खास एहतियात बरतनी चाहिए। गीगी सलाह देती हैं कि ऐसे पुरुषों को फोरस्किन के नीचे लुब्रिकेंट का इस्तेमाल करना चाहिए, क्योंकि अत्यधिक तेजी के दौरान त्वचा खिंच सकती है या कट सकती है। उन्होंने साफ कहा कि अगर कहीं भी दर्द महसूस हो, तो फौरन रुक जाना चाहिए। इसके अलावा, अत्यधिक उत्तेजना के चलते लिंग कुछ समय के लिए सुन्न या संवेदनहीन भी हो सकता है। हालांकि यह स्थिति अस्थायी होती है और समय के साथ सामान्य हो जाती है।
इरेक्शन बनाए रखने के उपाय और आपसी संवाद का महत्व
एलेक विलियम्स और गीगी एंगल दोनों का सबसे महत्वपूर्ण सुझाव खुलकर संवाद करने को लेकर है। अपनी बात रखने का एक सलीका होता है जो इस तरह के तनाव को दूर कर सकता है।
गीगी एंगल समझाती हैं कि तेज करने का मतलब हमेशा अधिक झटके मारना नहीं होता। इसका अर्थ धीमे लेकिन गहरे स्पर्श से भी हो सकता है। ज्यादातर लोगों को बहुत ज्यादा आक्रामक या कठोर तरीका पसंद भी नहीं आता। इसलिए किसी भी गलतफहमी से बचने के लिए पुरुष सीधे तौर पर अपनी महिला पार्टनर से पूछ सकते हैं कि उनके इस कहने का असल मतलब क्या है। जब पार्टनर अपनी चाहत को स्पष्ट कर देता है, तो दिमाग पर से अनचाहा दबाव हट जाता है।
एलेक विलियम्स का कहना है कि शारीरिक संबंध के दौरान एक-दूसरे से खुलकर बात करनी चाहिए कि वे कैसा महसूस कर रहे हैं। साथ ही यह भी समझना चाहिए कि किस तरह के व्यवहार से वे अधिक सुरक्षित और भावनात्मक रूप से जुड़ाव महसूस करेंगे।
अगर कोई महिला अपने पार्टनर से यह कहना चाहती है, तो गीगी के अनुसार उसे पहले ही सामान्य चर्चा में यह बात स्पष्ट कर देनी चाहिए। महिला अपने साथी से पहले ही कह सकती है कि उसे यह बात पसंद है, लेकिन वह जानती है कि इससे दबाव बन सकता है और वह ऐसा बिल्कुल नहीं चाहती। इस बारे में साथी की पसंद पहले जान लेना बेहतर होता है।
वहीं दबाव महसूस कर रहे पुरुषों के लिए एलेक विलियम्स सलाह देते हैं कि वे खुद के प्रति दयालु नजरिया अपनाएं। संबंध बनाने के मायने केवल चरम सुख या स्खलन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य भावनात्मक जुड़ाव, दोनों का आनंद और वर्तमान पल में मौजूदगी होना चाहिए। इस तरह की सोच थैरेपी के जरिए विकसित की जा सकती है, जिससे गैरजरूरी दबाव खत्म होता है और दोनों के लिए यह अनुभव खूबसूरत बन जाता है।



















