अक्सर पहली मुलाकात किसी अच्छे रेस्तरां की मेज पर मोमबत्तियों की रोशनी और हंसी-मजाक के बीच कटती है, लेकिन जिंदगी कभी-कभी बिल्कुल अप्रत्याशित मोड़ ले लेती है। ईस्ट लंदन की सड़कों पर शाम ढलते ही शुरू हुआ एक सहज और खुशनुमा सफर पलक झपकते ही अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड की सफेद दीवारों के बीच पहुंच गया। एक इलेक्ट्रिक साइकिल, अचानक काम करना बंद कर चुके ब्रेक और सामने से गुजरता एक पैदल राहगीर, बस इसी एक पल ने दो अजनबियों की पहली डेट को दर्द, खून और सात घंटे लंबे इंतजार में बदल दिया। हालांकि यह शाम किसी रोमांटिक परीकथा जैसी खत्म नहीं हुई, फिर भी इसने इंसानियत और रिश्तों पर भरोसा करने की एक नई वजह जरूर दे दी।
फुटबॉल मैच के शोर में टकराई थीं नजरें
हाल ही में एक बेहद उलझे और तनावपूर्ण रिश्ते से बाहर निकलने के बाद जिंदगी सामान्य ढर्रे पर लौट रही थी। मन किसी नए रिश्ते की तलाश में बिल्कुल नहीं था और न ही किसी को डेट करने की कोई जल्दी थी। एक शनिवार की शाम दोस्तों के साथ वर्ल्ड कप का फुटबॉल मैच देखने के लिए लंदन के एक खचाखच भरे पब में जाना हुआ। वहां भीड़ इतनी ज्यादा थी कि बैठने के लिए खाली टेबल मिलना लगभग नामुमकिन था। तभी नीली आंखों और गहरे काले बालों वाले एक लंबे युवक पर नजर पड़ी, जो पहली ही नजर में काफी आकर्षक लग रहा था। जगह की कमी के कारण दो अलग-अलग दोस्तों के समूह को एक ही टेबल साझा करनी पड़ी, जिससे दोनों बिल्कुल पास-पास बैठ गए।
बातचीत की शुरुआत करने के इरादे से एक सिगरेट मांगी गई, जिसके बाद बातचीत का सिलसिला खुद-ब-खुद चल पड़ा। युवक का नाम मार्क था। बात करते हुए जब मार्क ने ऑस्ट्रेलियाई लहजा भांपा, तो उसने शहर के बारे में पूछा। सिडनी का नाम सुनते ही उसने मुस्कुराते हुए बताया कि वह अगले ही हफ्ते एक शादी में शामिल होने के लिए सिडनी जाने वाला है। खेल शुरू होने में अभी एक घंटे का वक्त बाकी था, इसलिए दोनों के बीच सफर, ऑस्ट्रेलिया और रोजमर्रा की बातों पर लंबी बातचीत होती रही। बातचीत में कोई बनावट नहीं थी और दोनों एक-दूसरे की संगत में बेहद सहज महसूस कर रहे थे। मैच में इंग्लैंड की जीत के बाद जब पब खाली होने लगा, तो दोनों ने साथ मिलकर देर रात का डिनर करने की योजना बनाई।
सड़क पर फिसली साइकिल और इमरजेंसी वार्ड का सफर
डिनर के लिए दोनों ने साइकिल से निकलने का फैसला किया। ईस्ट लंदन की सड़कों पर दोनों आगे बढ़ रहे थे कि तभी अचानक एक मोड़ पर सामने से एक पैदल राहगीर गुजरने लगा। उस राहगीर को बचाने की कोशिश में जब इलेक्ट्रिक साइकिल के ब्रेक दबाए गए, तो वे पूरी तरह बेअसर साबित हुए। ब्रेक ने काम करना बंद कर दिया था। सीधी टक्कर से बचने के प्रयास में संतुलन बिगड़ा और शरीर हैंडलबार के ऊपर से उछलकर सीधे सड़क पर जा गिरा। उस वक्त सिर पर हेलमेट भी नहीं लगा था, जो एक बहुत बड़ी चूक साबित हुई। खुद को संभालने का एक पल का मौका भी नहीं मिला।
हादसा इतनी तेजी से हुआ कि गिरने के बाद कुछ भी याद नहीं रहा, सिवाय सड़क पर हुए तेज धमाके, सिर में उठे भ्रम और फिर जमीन पर तेजी से फैलते खून के। माथे पर गहरा कट लगा था और पसलियों में असहनीय दर्द हो रहा था। कुछ ही घंटे पहले मिला मार्क तुरंत आगे आया, उसने कैब बुलाई और सीधे अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड का रुख किया। शनिवार की रात और फुटबॉल मैच का खुमार होने की वजह से अस्पताल में पहले से ही भारी भीड़ थी। वहां कई लोग शराब के नशे में अधीर होकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। दर्द, शर्मिंदगी और एक अच्छी शाम के यूं बर्बाद हो जाने का मलाल मन में कचोट रहा था।
अस्पताल की कुर्सियों पर गुजरे सात मुश्किल घंटे
अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने सबसे पहले माथे के घाव पर छह टांके लगाए। टांके लगने के बाद आगे की विस्तृत जांच और एक्स-रे के लिए इंतजार का लंबा दौर शुरू हुआ। दर्द लगातार बढ़ रहा था और मन किसी से बात करने का नहीं था, लेकिन मार्क ने पूरी संवेदनशीलता के साथ माहौल को हल्का बनाए रखा। उसने अपने पांच साल के फ्रेंच बुलडॉग की प्यारी तस्वीरें दिखाईं और ध्यान भटकाने के लिए फोन पर मजेदार वीडियो दिखाए। उस शनिवार की रात किसी अजनबी के साथ अस्पताल के भीड़भाड़ वाले कमरे में बैठना किसी के लिए भी उबाऊ हो सकता था, इसलिए मार्क से कई बार घर जाने के लिए कहा गया, लेकिन उसने वहां से जाने से साफ इनकार कर दिया।
वह पूरी रात वहीं डटा रहा और बिस्तर के पास रखी एक साधारण सी कमजोर कुर्सी पर ही बैठा रहा। जब स्कैन की रिपोर्ट सामने आई, तो पता चला कि पसली में फ्रैक्चर हो चुका था। सारी चिकित्सीय औपचारिकताएं पूरी होते-होते अगली सुबह हो गई। मार्क पूरे सात घंटे तक बिना किसी शिकायत के साथ रहा। सुबह जब अस्पताल से छुट्टी मिली, तो वह घर तक छोड़ने आया। इतना ही नहीं, उसने बालों में जम चुके खून को धोने और साफ करने में भी पूरी मदद की। विदा लेते समय एक सहज शुक्रिया और स्नेह भरे चुंबन के साथ वह अपने घर रवाना हो गया।
सिडनी का सफर और अधूरी रह गई प्रेम कहानी
हादसे के अगले कुछ दिनों तक दोनों के बीच लगातार संदेशों का आदान-प्रदान होता रहा। इसके बाद मार्क अपने तय कार्यक्रम के अनुसार दो सप्ताह के लिए सिडनी चला गया। वहां रहने के दौरान भी उसने लगातार हाल-चाल पूछा और शादी समारोह की तस्वीरें भेजीं। फोन की स्क्रीन पर उसका नाम चमकते देखना एक सुखद अहसास देता था और उसके वापस लौटने का बेसब्री से इंतजार था। मुलाकात के ठीक तीन हफ्ते बाद, दोनों आखिरकार उसी रेस्तरां में डिनर के लिए पहुंचे, जहां वे उस हादसे वाली रात जा रहे थे। इस बार का सफर बिना किसी दुर्घटना के शांति से पूरा हुआ।
डिनर के दौरान बातचीत हुई, लेकिन धीरे-धीरे यह स्पष्ट हो गया कि दोनों की जीवन की प्राथमिकताएं और लक्ष्य एक जैसे नहीं थे। आखिरकार वे एक रोमांटिक रिश्ते में नहीं बंध सके। पुराने रिश्तों में मिले कड़वे अनुभवों के बाद, जहां हर चीज जरूरत से ज्यादा जटिल और तनावपूर्ण लगती थी, मार्क का यह सौम्य और शांत व्यवहार बिल्कुल अलग था। यह डेट भले ही किसी स्थायी रिश्ते में न बदल पाई हो, लेकिन इसने एक गहरी सीख दी। किसी रेस्तरां में अच्छा दिखना और शिष्टाचार निभाना बहुत आसान होता है, मगर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में किसी अनजान इंसान के लिए सात घंटे तक बिना स्वार्थ के खड़े रहना असली इंसानियत को दर्शाता है।



















