शारीरिक अंतरंगता और सुख पाने के तरीके समय के साथ लगातार नए रूप ले रहे हैं। मास्टरबेशन से जुड़ी एक लोकप्रिय तकनीक, जिसे 'ब्रॉडनिंग' कहा जाता है और जो करीब 87 प्रतिशत महिलाओं द्वारा पसंद की जाती है, अब कपल्स के बीच एक अनूठे फोरप्ले के रूप में उभर रही है। आमतौर पर इस तकनीक में महिला अपने पूरे वल्वा को किसी सपाट या ठोस सतह पर रगड़कर आनंद लेती है। लेकिन हाल ही में एक महिला ने अपने साथी के उभरे हुए बाइसेप्स यानी बांहों के मजबूत हिस्से को इस काम के लिए इस्तेमाल करने की इच्छा जताई, जिसके बाद यह तरीका इंटरनेट पर जबरदस्त बहस और आकर्षण का केंद्र बन गया।
एक ऑनलाइन चर्चा मंच रेडिट पर एक महिला ने अपनी निजी बातचीत साझा की। महिला एक 'फ्रेंड्स विद बेनिफिट्स' के रिश्ते में है, जहां दोनों बिना किसी भावनात्मक वादे के शारीरिक संबंध साझा करते हैं। उसने बताया कि उसके पुरुष मित्र ने जिम में कड़ी मेहनत करके अपनी बांहों की मांसपेशियों को काफी गठीला और मजबूत बना लिया है। महिला ने लिखा कि वह पहले भी आकर्षक दिखता था, लेकिन हाल ही में जब उसने उसे पसीने से तरबतर देखा और उसकी उभरी हुई मांसपेशियां नजर आईं, तो उसके मन में एक तीव्र इच्छा जागी। उसने पूछा कि क्या अगली बार मिलते वक्त फोरप्ले के दौरान अगर वह अपनी योनि को उसके बाइसेप्स पर टिकाकर रगड़ना शुरू कर दे, तो क्या यह अजीब लगेगा? उसने यह भी जोड़ा कि वह पहले पार्टनर से सहमति लेगी और फिर उस जगह को चूमकर साफ करेगी।
महिलाओं का समर्थन और अन्य अंगों का आकर्षण
इस पोस्ट पर अन्य महिलाओं ने तुरंत अपनी सहमति जताई और बताया कि यह इच्छा बिल्कुल असामान्य नहीं है। कई महिलाओं ने टिप्पणी की कि वे इस भावना से पूरी तरह जुड़ सकती हैं। एक महिला ने लिखा कि उसके लिए पार्टनर की छाती की मांसपेशियां यानी पेक्स और कूल्हे इसी तरह उत्तेजना जगाते हैं। वहीं एक अन्य महिला ने अपनी पसंद बताते हुए कहा कि उसे पार्टनर की कलाई के ऊपर का हिस्सा यानी फोरआर्म्स सबसे ज्यादा आकर्षित करता है। इस चर्चा से साफ हो गया कि पुरुषों के शरीर के मजबूत और उभरे हुए अंग कई महिलाओं के लिए गहरी कामुक उत्तेजना का जरिया होते हैं।
पुरुषों की प्रतिक्रिया और आत्मविश्वास में उछाल
जब महिला ने यह सवाल उठाया कि पुरुषों के नजरिए से यह हरकत कहीं बहुत अजीब तो नहीं लगेगी, तो पुरुषों की ओर से मिला जवाब बेहद सकारात्मक था। पुरुषों ने इस अनुभव को 'बाइसेप्सुअल' नाम दिया और खुले दिल से इसका स्वागत किया। कई पुरुषों ने कहा कि अगर कोई पार्टनर उनकी बांहों पर इस तरह सुख पाए, तो इससे उनका आत्मविश्वास सातवें आसमान पर पहुंच जाएगा। एक यूजर ने मजाक में कहा कि अगर उसके साथ ऐसा हुआ तो उसका अहंकार इतना बढ़ जाएगा कि वह गगनचुंबी इमारतों को भी बेंच प्रेस कर देगा।
एक अन्य पुरुष ने स्वीकार किया कि पहली नजर में यह हरकत थोड़ी अजीब लग सकती है, लेकिन अगर किसी ने उसके साथ ऐसा किया तो वह इसे अपनी पूरी जिंदगी कभी नहीं भूल पाएगा। पुरुषों का कहना था कि जिम में घंटों पसीना बहाकर शरीर बनाने के बाद अगर पार्टनर उनकी इस शारीरिक बनावट से इतनी आकर्षित होती है, तो यह उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान और सुखद अहसास है। अधिकांश पुरुषों ने इसे बेहद उत्तेजक और तारीफ के काबिल माना।
मनोवैज्ञानिक और शारीरिक वजहें
साइकोसेक्सुअल थेरेपिस्ट बेकी क्रेप्सली-फॉक्स के अनुसार, यह चाहत बिल्कुल भी अजीब नहीं है। पार्टनर के शरीर के किसी हिस्से पर घर्षण करना बहुत आम बात है और बाइसेप्स केवल उसी का एक और विकल्प है। बाइसेप्स के प्रति यह दीवानगी कोई नई बात नहीं है। टिकटॉक पर इस अंग को लेकर करीब 18 लाख पोस्ट मौजूद हैं, जिनमें कई वीडियो में युवतियां अपने पार्टनर के उभरे हुए डोले पर रखकर सुशी खाती दिखती हैं।
थेरेपिस्ट बेकी क्रेप्सली-फॉक्स बताती हैं कि बाइसेप्स का आकर्षण कई स्तरों पर काम करता है। कई लोगों के लिए पुरुषत्व यानी मर्दाना ताकत बेहद आकर्षक होती है और बड़ा डोला उसी का प्रतीक होता है। कुछ मामलों में लोग इसे लिंग के रूप में भी कल्पना कर सकते हैं, जहां इसका बड़ा आकार आकर्षण को और बढ़ा देता है। व्यावहारिक स्तर पर देखें तो बाइसेप्स का घेरा और चौड़ा आकार घर्षण के लिए एक बेहतरीन सतह प्रदान करता है। जब मांसपेशी को कसकर सख्त किया जाता है, तो यह रगड़ने के लिए एक बेहद मजबूत और आरामदायक आधार बन जाती है।
ब्रॉडनिंग तकनीक का असर और महिला संतुष्टि
पार्टनर की बांह पर घर्षण असल में ब्रॉडनिंग तकनीक का ही एक व्यावहारिक रूप है। इसका सीधा मतलब होता है कि केवल क्लिटोरिस के एक बिंदु पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय पूरे वल्वा के एक बड़े हिस्से को उत्तेजित करना, जिससे अधिक तंत्रिकाएं सक्रिय होती हैं। कई महिलाएं केवल पेनेट्रेशन यानी लिंग प्रवेश के मुकाबले ब्रॉडनिंग को अधिक प्राथमिकता देती हैं, क्योंकि ज्यादातर महिलाओं को सिर्फ प्रवेश से ऑर्गेज्म नहीं मिलता और उन्हें क्लिटोरल संपर्क की जरूरत होती है।
लगातार क्लिटोरल घर्षण से तेज संतुष्टि मिलती है। चूंकि महिला खुद यह हरकत कर रही होती है, इसलिए गति, दबाव और दिशा पर उसका पूरा नियंत्रण रहता है। मानसिक रूप से भी इस प्रक्रिया में प्रदर्शन का कोई दबाव नहीं होता। यह पारंपरिक सेक्स की तरह किसी तय लक्ष्य पर केंद्रित नहीं होता, बल्कि एक ऐसी तकनीक पर आधारित होता है जिसे महिला का शरीर पहले से अच्छी तरह जानता है, जिससे तनाव पूरी तरह खत्म हो जाता है।
इसे आजमाने का सुरक्षित तरीका
इस तकनीक को आजमाना बेहद सरल है। सबसे पहले अपने साथी से इस बारे में खुलकर बात करें कि क्या वह इसके लिए तैयार है। जब पार्टनर की हरी झंडी मिल जाए, तो आगे बढ़ा जा सकता है। बेकी क्रेप्सली-फॉक्स सलाह देती हैं कि पार्टनर को अपनी बांह की मांसपेशी को तानकर स्थिर रखने के लिए कहें, ताकि महिला अपनी गति खुद तय कर सके। जब पुरुष लेटा हो या बैठा हो, तब उसकी बांह पर सवार होना सबसे ज्यादा नियंत्रण देता है। शुरुआत धीरे-धीरे करें और पार्टनर को बताएं कि क्या अच्छा लग रहा है। त्वचा को छिलने से बचाने के लिए कपड़े या अंडरवियर पहने रखें, या फिर नग्न होने की स्थिति में पर्याप्त ल्यूब का इस्तेमाल करें।



















