वर्तमान समाज में जहां यौन उत्तेजना और कामुकता से जुड़ी गतिविधियों की चर्चा आए दिन देखने को मिलती है, वहीं इसके ठीक विपरीत एक अलग तरह का यौन प्रयोग पुरुषों के बीच बहुत तेजी से ध्यान खींच रहा है। यह प्रयोग स्वैच्छिक कौमार्य या आत्मसंयम से जुड़ा है, जिसे लेकर हर साल अक्टूबर की शुरुआत में जबरदस्त उत्सुकता देखी जाती है। इसे बोलचाल में लॉकटोबर कहा जाता है। यह मात्र शारीरिक संबंध बनाने से दूरी बनाने का सामान्य व्रत नहीं है, बल्कि इसमें पुरुष अपने जननांग को एक विशेष उपकरण यानी चैस्टिटी केज में बंद करते हैं और उसकी चाबी अपने प्रमुख साथी के हाथों में सौंप देते हैं, जिससे नियंत्रण का पूरा अधिकार साथी के पास चला जाता है।
इस अनूठी प्रथा का उभार सोशल मीडिया पर वर्ष 2010 के आसपास शुरू हुआ था जब ट्विटर पर इससे जुड़ा हैशटैग लोकप्रिय हुआ था। उस समय कौमार्य उपकरण पहनने वाले कुछ प्रमुख उपयोगकर्ताओं ने इस पर खुलकर बात की, जिसके बाद एक एडल्ट टॉय कंपनी ने इसका इस्तेमाल प्रचार के लिए किया। तब से यह विषय कामुक प्रयोगों और फेटिश पसंद करने वाले समूहों में नियमित रूप से चर्चा का केंद्र बना हुआ है। आंकड़ों से पता चलता है कि दशक की शुरुआत के मुकाबले इस तरह के कौमार्य उपकरणों और अभ्यासों में लोगों की रुचि तीन गुना बढ़ चुकी है। बीते दो वर्षों में ही इससे जुड़ी ऑनलाइन खोजों में 38 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
अक्टूबर में अचानक क्यों बढ़ जाती है इस विषय की खोज
पूरे वर्ष के मुकाबले अक्टूबर के महीने में जब लॉकटोबर का समय आता है, तब कौमार्य और नियंत्रण से संबंधित सामग्री की ऑनलाइन खोजों में 40 प्रतिशत का भारी उछाल देखने को मिलता है। इस विषय में सबसे अधिक रुचि ब्रिटेन, अमेरिका और स्पेन के लोगों में दर्ज की गई है। यहां तक कि अमेरिकी राज्य नेब्रास्का में यह पूरे राज्य के भीतर सबसे अधिक खोजी जाने वाली श्रेणी बन गई है। इंटरनेट पर इस चुनौती को समर्पित एक सबरेडिट समूह भी काफी सक्रिय है, जहां हर हफ्ते लगभग 10,000 लोग आते हैं और प्रतिभागी अपने अनुभवों और तस्वीरों को साझा करते हैं।
यौन विशेषज्ञ नेस कूपर के अनुसार, कुछ लोग लॉकटोबर का हिस्सा केवल संयम का अनुभव करने के लिए बनते हैं, जबकि कई लोग इसके जरिए चरम सुख से इनकार यानी ऑर्गेज्म डिनायल की मानसिक अनुभूति को तलाशते हैं। किसी बीडीएसएम अथवा किंक रिश्ते में शक्ति संतुलन और नियंत्रण की गतिशीलता को समझने का यह एक बड़ा जरिया बनता है। कई लोग अपने प्रभावशाली साथी के प्रति पूर्ण समर्पण और निष्ठा प्रदर्शित करने के लिए इस पूरे महीने अपने जननांग को ताले में बंद रखने का फैसला करते हैं।
नियंत्रण और मानसिक उत्तेजना का गहरा रिश्ता
आमतौर पर इस रिश्ते में एक समर्पण करने वाला साथी उपकरण पहनता है, जबकि दूसरा प्रभावशाली साथी पूरी प्रक्रिया की निगरानी करता है। हालांकि, यह केवल एक ही रूप तक सीमित नहीं है। मनोवैज्ञानिक और कामुक खेल के तहत कुछ लोग इसे अपने भीतर की परस्पर विरोधी इच्छाओं से संघर्ष करने के लिए भी आजमाते हैं। कुछ रिश्तों में प्रभावशाली साथी इसे एक कामुक सजा अथवा अधीनता की स्थिति के रूप में भी लागू करते हैं। नियंत्रण का स्तर इतना अनोखा भी हो सकता है जहां कुछ लोग डाक सेवा के जरिए उपकरण की चाबी किसी अजनबी को भेज देते हैं और केवल सप्ताह में मिलने वाले निर्देशों के आधार पर ही उपकरण को हटाने या अन्य काम करने का पालन करते हैं।
मनोवैज्ञानिक यौन चिकित्सक बेकी क्रेप्सली-फॉक्स बताती हैं कि इस अभ्यास में हिस्सा लेने वाले लोग अपनी कामुकता से कोई विराम नहीं ले रहे होते, बल्कि वे पाबंदी और संयम की स्थिति को ही कामुक बना देते हैं। जब किसी व्यक्ति पर कोई दूसरा नियंत्रण रखता है और यह तय करता है कि वह कब क्या कर सकता है और क्या नहीं, तो यह स्थिति कई लोगों के लिए अत्यधिक उत्तेजक साबित होती है। शारीरिक संबंध बनाने पर लगी रोक के कारण प्रत्याशा बढ़ती जाती है और जिस इच्छा को तुरंत पूरा नहीं किया जा सकता, वह मन में और अधिक तीव्र लगने लगती है। उपकरण का लगातार शरीर पर मौजूद रहना इस नियंत्रण का एक निरंतर अहसास कराता रहता है। इसके साथ ही, अपने चरम सुख का अधिकार किसी अन्य व्यक्ति को सौंप देना कुछ लोगों के लिए अत्यधिक स्वतंत्रता और निकटता का भाव लेकर आता है। आमतौर पर यह चलन विपरीतलिंगी पुरुषों में अधिक देखा जाता है, जहां पुरुष उपकरण पहनता है और उसकी महिला साथी के पास चाबी की बागडोर होती है।
उपकरण पहनने से जुड़े शारीरिक खतरे और सुरक्षा के नियम
जननांग के इर्द-गिर्द धातु या सख्त सामग्री का घेरा पहनना पूरी तरह से जोखिम मुक्त नहीं है। नेस कूपर चेतावनी देती हैं कि इन उपकरणों के लगातार घर्षण से त्वचा छिल सकती है, पसीने के कारण चकत्ते पड़ सकते हैं और संक्रमण या घाव होने का गंभीर खतरा रहता है। इस तरह की असहजता को कम करने के लिए सूडोकेम जैसी क्रीम का उपयोग मददगार साबित होता है। इसके अलावा, त्वचा या अग्रत्वचा के उपकरण में फंसने का भी खतरा रहता है, जिसे चिकनाई प्रदान करने वाले लुब्रिकेंट से कुछ हद तक कम किया जा सकता है, लेकिन अगर स्थिति बिगड़े तो उपकरण को तुरंत निकाल देना ही सबसे उचित कदम है।
यदि उपकरण पहनने के बाद किसी भी हिस्से में सूजन महसूस हो, तो स्थायी शारीरिक क्षति से बचने के लिए इसे बिना किसी देरी के तुरंत खोल देना चाहिए। किसी भी रिश्ते में जहां नियंत्रण का खेल शामिल हो, वहां आपसी सहमति, स्पष्ट सीमाएं और अपेक्षाओं पर पहले से बातचीत होना बेहद अनिवार्य है। बेकी क्रेप्सली-फॉक्स सलाह देती हैं कि सबसे पहले यह तय किया जाना चाहिए कि यह प्रयोग अकेले किया जा रहा है या किसी साथी के साथ। इसके बाद स्पष्ट नियम तय होने चाहिए कि उपकरण कितनी देर तक पहना जाएगा, क्या यह चौबीसों घंटे रहेगा या केवल अंतरंग पलों के दौरान, क्या चरम सुख की बिल्कुल भी अनुमति होगी और यदि होगी तो कब होगी। इसके साथ ही एक सुरक्षित शब्द यानी सेफ वर्ड और खेल के बाद की देखभाल की योजना भी तय होनी चाहिए।
शुरुआती लोगों के लिए सही चुनाव और सावधानियां
उपकरण का चयन करते समय भी अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए। बाजार में कुछ उपकरण केवल लिंग को सीमित करते हैं, जबकि कुछ पूरे हिस्से को ढकते हैं। शुरुआती लोगों को हमेशा थोड़े ढीले और आरामदायक आकार का चयन करना चाहिए, जबकि अनुभवी लोग अधिक दबाव वाले छोटे आकार का प्रयोग कर सकते हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि कोई व्यक्ति इस प्रयोग में नया है, तो उसे धीरे-धीरे समय बढ़ाना चाहिए। सीधे पूरे महीने के लिए इसे पहनने के बजाय शुरुआत में केवल कुछ घंटों के लिए पहनना चाहिए और पहली बार में रात को सोते समय इसे पहनने से बचना चाहिए ताकि शरीर इसके अनुकूल हो सके। सबसे महत्वपूर्ण नियम यह है कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए एक अतिरिक्त चाबी या आपातकालीन रिलीज का साधन हमेशा पास में रखा जाना चाहिए।


















