सोशल मीडिया और इंटरनेट संस्कृति के दौर में पब्लिसिटी स्टंट और ब्रांड प्रचार की सीमाएं लगातार धुंधली होती जा रही हैं। एडल्ट कंटेंट क्रिएटर बॉनी ब्लू, जिनका असली नाम टिया बिलिंगर है और जो डर्बीशायर की रहने वाली हैं, ने अपने नवजात शिशु का नामकरण एक सार्वजनिक ऑनलाइन नीलामी के जरिए तय करने का दावा किया है। टिकटॉक पर आयोजित की गई इस बोली प्रक्रिया में सबसे ऊंची बोली लगाने वाले को बच्चे का नाम चुनने का अधिकार दिया गया था। अंतिम रूप से एक विदेशी क्रिप्टो जुआ मंच बेटबोल्ट ने 907,000 पाउंड (लगभग 1.2 मिलियन डॉलर) की सफल बोली लगाकर बच्चे का नाम अपने ब्रांड के नाम पर रखने का सौदा पक्का किया।
सट्टेबाजी कंपनी का तर्क और वित्तीय लेनदेन का दावा
इस नामकरण प्रक्रिया में शामिल जुआ मंच बेटबोल्ट एक ऑफशोर क्रिप्टो गैंबलिंग सेवा है, जो अफ्रीकी द्वीप अंजुआन से संचालित होती है। अंजुआन कोमोरोस संघ के तीन अर्ध-स्वायत्त द्वीपों में से एक माना जाता है। कंपनी के प्रतिनिधि लियो ने इस साझेदारी को सही ठहराते हुए एक बेहद विवादित बयान दिया। उनका कहना था कि दोनों ब्रांड्स के बीच काम करने के तरीके में समानता है। प्रतिनिधि के अनुसार उनका मंच इसे एक सीधी विपणन रणनीति के रूप में देखता है और उन्हें अपने सामान्य ग्राहकों के दूर होने का कोई भय नहीं है।
कंपनी का दावा है कि उन्होंने बॉनी ब्लू को 907,000 पाउंड यानी 1.2 मिलियन डॉलर की पूरी राशि का भुगतान कर दिया है। हालांकि मंच ने इस वित्तीय लेनदेन का कोई आधिकारिक वित्तीय प्रमाण या दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किया है। मंच के प्रतिनिधि ने आगे दावा किया कि नीलामी समाप्त होने के बाद उनकी बातचीत बच्चे की मां से हुई थी और उनका मानना है कि बच्चा सुरक्षित हाथों में है। कंपनी का तर्क है कि इस भारी भरकम रकम के कारण बच्चे का भविष्य वित्तीय रूप से सुरक्षित रहेगा और उसे गरीबी में नहीं पलना पड़ेगा, भले ही सार्वजनिक जगत में उसकी मां की छवि को नकारात्मक ढंग से पेश किया जा रहा हो।
बाल मनोविज्ञान और कानूनी पहलुओं पर उठते गंभीर सवाल
किसी नवजात शिशु की व्यक्तिगत पहचान को एक व्यावसायिक जुआ उत्पाद के साथ जोड़ने के इस कदम की विशेषज्ञों ने कड़ी आलोचना की है। मनोवैज्ञानिक एमा केनी के अनुसार यह स्थिति बच्चे के दीर्घकालिक मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक विकास के लिए बेहद नुकसानदेह साबित हो सकती है। बच्चे का नाम एक ऐसी स्थायी पहचान है जो उसके साथ नर्सरी, स्कूल, दोस्ती, व्यक्तिगत रिश्तों और भविष्य में रोजगार तक जुड़ी रहती है। जब किसी बच्चे के नाम के साथ यह डिजिटल और सार्वजनिक इतिहास जुड़ जाता है कि उसकी पहचान एक सट्टेबाजी कंपनी को बेची गई थी, तो उसे उपहास, सामाजिक कलंक और ऑनलाइन उत्पीड़न का सामना करना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों ने यह भी रेखांकित किया है कि इस पूरी प्रक्रिया में बच्चे की स्वयं की कोई सहमति या स्वायत्तता नहीं है। बड़े होने पर बच्चा यह महसूस कर सकता है कि एक स्वतंत्र इंसान के रूप में पहचाने जाने से पहले ही उसे एक मार्केटिंग उत्पाद या पब्लिसिटी के अवसर के रूप में इस्तेमाल कर लिया गया था। यूके में बच्चों के नामकरण को लेकर यद्यपि प्रतिबंधित नामों की कोई निश्चित आधिकारिक सूची नहीं है, लेकिन डीड पोल विभाग के अनुसार ऐसे नामों को पंजीकृत करने से रोका जा सकता है जो अश्लील हों, जिनमें अनुचित शब्द हों या जो बच्चे के कल्याण पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हों। यदि किसी नाम से बच्चे को अत्यधिक तनाव, सामाजिक बहिष्कार या उपहास झेलने का खतरा हो, तो अधिकारी हस्तक्षेप कर सकते हैं। जैसा कि वर्ष 2016 में वेल्स के पोविस में देखा गया था, जब एक मां द्वारा अपनी बच्ची का नाम साइनाइड रखने की कोशिश को स्थानीय अधिकारियों ने भावनात्मक नुकसान की आशंका के आधार पर रोक दिया था।
अन्य नामों की बोलियां और पूर्व विवादों का सिलसिला
इस ऑनलाइन नीलामी के दौरान कई अन्य विवादास्पद नाम भी चर्चा में आए थे। बॉनी ब्लू के अनुसार इंटरनेट व्यक्तित्व एचएसटिक्कीटॉक्की (असली नाम हैरिसन सुलिवन) के नाम पर 16,000 पाउंड की एक बोली आई थी, हालांकि इसका कोई स्वतंत्र प्रमाण नहीं है कि यह बोली सुलिवन ने स्वयं लगाई थी। सुलिवन लुई थेरॉक्स की डाक्यूमेंट्री मैनोस्फीयर में अपनी विवादास्पद और महिला विरोधी टिप्पणियों के लिए जाने जाते हैं। इसके अतिरिक्त क्लैविकुलर (असली नाम ब्रैडेन पीटर्स) नाम का सुझाव भी सामने आया था। पीटर्स पर मैसाचुसेट्स के केप कॉड में 8 सितंबर को बलात्कार, नशीला पदार्थ देकर यौन शोषण करने और नाबालिग को शराब उपलब्ध कराने के गंभीर आरोप दर्ज किए गए थे।
यह घटनाक्रम बॉनी ब्लू द्वारा अपने बच्चे के जन्म के बाद किए गए विवादित प्रचार अभियानों की श्रृंखला की एक नई कड़ी है। इससे पहले टोरी समानता प्रवक्ता जॉय मॉरिसे ने बच्चे के जन्म के बाद सुरक्षा और संरक्षण संबंधी गंभीर चिंताओं को लेकर नेशनल सोसाइटी फॉर द प्रिवेंशन ऑफ क्रुएल्टी टू चिल्ड्रन (NSPCC) में शिकायत दर्ज कराई थी। सोशल मीडिया पर जहां कई उपयोगकर्ताओं ने इसे केवल लोगों का ध्यान खींचने और गुस्सा भड़काने वाला स्टंट (रेज बेटिंग) करार दिया, वहीं बॉनी ने सार्वजनिक आलोचनाओं के जवाब में कहा कि यदि किसी को 1.2 मिलियन डॉलर की पेशकश की जाए तो क्या वह अपने बच्चे का नाम नहीं बदलेगा। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि यदि यह पूरी नीलामी केवल प्रचार पाने के लिए गढ़ी गई कहानी भी साबित होती है, तब भी नैतिक संकट खत्म नहीं होता क्योंकि एक नवजात की पहचान का इस्तेमाल सुर्खियां और व्यावसायिक लाभ बटोरने के लिए किया गया है।



















