अंतरंग पलों में अक्सर यह माना जाता है कि पुरुषों और महिलाओं की प्राथमिकताएं और चरम सुख तक पहुंचने के तरीके काफी अलग होते हैं। जहां कई अध्ययनों और निजी अनुभवों में यह बात सामने आती है कि महिलाएं पारंपरिक काउगर्ल पोजीशन को अपनी पसंद बताती हैं और पुरुष इसके विपरीत राय रखते हैं, वहीं एक ऐसी सेक्स पोजीशन भी है जिस पर दोनों पक्षों की सहमति आश्चर्यजनक रूप से बेहद मजबूत दिखाई देती है। ब्रिटेन के वयस्कों पर हुए अध्ययनों में यह साफ हुआ है कि डॉगी स्टाइल दोनों साझेदारों को न सिर्फ सबसे ज्यादा आकर्षित करती है, बल्कि उन्हें अपेक्षाकृत तेजी से चरम सुख यानी ऑर्गेज्म तक पहुंचाने में भी सबसे आगे रहती है।
ब्रिटेन में लगभग आधे वयस्कों की पहली पसंद
सुपरड्रग ऑनलाइन डॉक्टर द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक, ब्रिटेन के करीब 47 प्रतिशत वयस्कों ने डॉगी स्टाइल को अपनी पसंदीदा पोजीशन स्वीकार किया है। इसके अलावा गति और तीव्रता के मामले में भी यह सबसे ऊपर आंकी गई है। आंकड़ों के अनुसार 21 प्रतिशत पुरुषों और 14 प्रतिशत महिलाओं का मानना है कि यह विशेष मुद्रा उन्हें किसी भी अन्य तरीके की तुलना में सबसे तेजी से चरम सुख तक ले जाती है। शारीरिक उत्तेजना और गहराई का यह अनूठा संगम दोनों भागीदारों को एक साथ संतुष्टि के करीब लाता है।
महिलाओं को क्यों पसंद आती है यह स्थिति
महिलाओं के नजरिए से डॉगी स्टाइल की लोकप्रियता का सबसे मुख्य कारण आंतरिक आनंद केंद्रों पर पड़ने वाला सीधा असर है। सोशल प्लेटफॉर्म रेडिट पर अपने अनुभव साझा करते हुए कई महिलाओं ने बताया कि यह पोजीशन जी-स्पॉट को सबसे तीव्र गति से सक्रिय करती है। जब महिला अपने घुटनों और हाथों के बल होती है, तो प्रवेश का कोण सीधे उस हिस्से को छूता है जिसे उत्तेजित करना अन्य स्थितियों में कठिन होता है।
इसके साथ ही केवल आंतरिक उत्तेजना ही नहीं, बल्कि बाहरी आनंद केंद्रों तक पहुंच भी इस स्थिति में बेहद सहज हो जाती है। महिलाओं का कहना है कि इस मुद्रा में क्लिटोरिस को अतिरिक्त रूप से सहलाने की पूरी गुंजाइश रहती है। पीछे से होने वाले शारीरिक संपर्क, कूल्हों को थामने का अहसास और साथी की निकटता इसे मानसिक और शारीरिक दोनों स्तरों पर गहरा बना देती है। साथी का कंधों या पीठ पर झुकना और अंतरंग बातें फुसफुसाना भी महिलाओं के लिए इस अनुभव को और अधिक रोमांचक बनाता है।
जी-स्पॉट की शारीरिक संरचना और उत्तेजना
सेक्स विशेषज्ञ गीगी एंगले के अनुसार जी-स्पॉट या जी-क्षेत्र वास्तव में क्लिटोरिस का ही अंदरूनी पिछला विस्तार है। संरचनात्मक रूप से यह योनि, मूत्रमार्ग स्पंज और क्लिटोरिस का एक संगम स्थल होता है। यह हिस्सा प्यूबिक बोन के पीछे स्थित होता है और इसकी बनावट अखरोट की तरह थोड़ी खुरदरी महसूस होती है। डॉगी स्टाइल के दौरान जब लिंग का प्रवेश होता है, तो वह सीधे इस क्षेत्र पर घर्षण पैदा करता है, जिससे अत्यंत तीव्र संभोग सुख की अनुभूति संभव होती है।
पुरुषों के लिए नियंत्रण और दृश्य आकर्षण का महत्व
पुरुषों की दृष्टि से इस पोजीशन के सबसे लोकप्रिय होने के कारण थोड़े अलग लेकिन काफी स्पष्ट हैं। पुरुषों के अनुसार इसमें प्रवेश की गहराई और गति पर उनका पूरा नियंत्रण रहता है। वे अपनी सुविधानुसार रफ्तार और तीव्रता तय कर पाते हैं, जिससे उनका संभोग सुख कई गुना बढ़ जाता है।
इसके अलावा इस स्थिति में एक प्रमुख मनोवैज्ञानिक और दृश्य पहलू भी शामिल है। कई पुरुषों का कहना है कि पीछे से संबंध बनाते समय नियंत्रण की भावना उन्हें अधिक उत्तेजित करती है। साथी के शरीर की हलचल को सीधे देखना और आईने के सामने इस मुद्रा में होना संभोग की अवधि को तेज कर देता है। कई लोग इसे एक त्वरित समापन मुद्रा मानते हैं क्योंकि यह दृश्य उत्तेजना के जरिए पुरुषों को बहुत तेजी से स्खलन तक ले जाती है।
लोकप्रियता के बीच शारीरिक चोट का बड़ा खतरा
यद्यपि यह पोजीशन दोनों ही लिंगों में अत्यंत लोकप्रिय और आनंददायक मानी जाती है, लेकिन इसके साथ चोट लगने की संभावना भी सबसे अधिक पाई गई है। लवहनी द्वारा किए गए एक अध्ययन में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि ब्रिटेन में संभोग के दौरान होने वाली कुल चोटों में से आधे से अधिक मामले इसी पोजीशन से जुड़े होते हैं। इनमें कलाइयों में मोच या खिंचाव और फर्श के घर्षण से त्वचा छिल जाना सबसे आम समस्याएं हैं।
मनो-लैंगिक चिकित्सक एनाबेल नाइट बताती हैं कि यह समस्या तब पैदा होती है जब सक्रिय साथी अपना पूरा वजन आगे की ओर झुकी हुई साथी पर डाल देता है। इससे नीचे मौजूद व्यक्ति की कलाइयों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। इस दबाव और दर्द से बचने के लिए उन्होंने सलाह दी है कि ऊपर रहने वाले साथी को सीधा शरीर रखना चाहिए ताकि वजन नीचे न पड़े। वहीं नीचे रहने वाली साथी को अपनी हथेलियों पर पूरा भार टिकाने के बजाय अपनी कोहनियों और अग्रभुजाओं का सहारा लेना चाहिए।
इसके साथ ही कालीन या फर्श पर होने वाले घर्षण से त्वचा को नुकसान न पहुंचे, इसके लिए बिस्तर का उपयोग करना चाहिए या कम से कम नीचे एक मुलायम कंबल बिछा लेना बेहतर रहता है।



















