स्वीडिश पॉप गायिका ज़ारा लार्सन अपने बिंदास अंदाज और गानों के लिए जानी जाती हैं, लेकिन हाल ही में उनके एक बयान ने इंटरनेट पर बड़ा बखेड़ा खड़ा कर दिया है। आमतौर पर विवादों से दूर रहने वाली गायिका ने अपने कर्मचारियों के काम करने के माहौल को लेकर एक ऐसा खुलासा किया है, जिससे उनके चाहने वाले भी हैरान रह गए हैं। कॉरपोरेट जगत में अक्सर कर्मचारियों से देर तक दफ्तर में रुकने या छुट्टियों के दौरान संदेशों का तुरंत जवाब देने की उम्मीद की जाती है, मगर ज़ारा लार्सन ने अपने साथियों के लिए एक बिल्कुल अलग और अजीबोगरीब पैमाना तय कर रखा है।
हाल ही में मशहूर पॉडकास्ट लास कल्चरिस्टास में बातचीत के दौरान ज़ारा ने खुलासा किया कि उनकी टीम में काम करने वाले हर व्यक्ति को एक अजीब चेहरे का भाव यानी गून फेस बनाना आना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर उनकी टीम का कोई भी सदस्य तुरंत ऐसा चेहरा बनाने से इनकार करता है, तो उसे नौकरी से निकाल दिया जाता है। गायिका ने अपनी इस अजीब मांग के पीछे की सोच साझा करते हुए कहा कि उनके साथ काम करने वाले लोगों के बीच यह एक खास नियम है, जिससे वह यह परखती हैं कि क्या सामने वाला व्यक्ति तनावमुक्त, लापरवाह, सच्चा और मजाकिया हो सकता है।
आखिर क्या होता है गून फेस और इसका असली मतलब क्या है?
गायिका की इस टिप्पणी से सोशल मीडिया पर सक्रिय उनके प्रशंसक काफी असहज महसूस कर रहे हैं। इंटरनेट की गुप्त यौन उपसंस्कृतियों से निकले इस शब्द का संबंध एक बेहद अतिरंजित, मूर्खतापूर्ण और ढीले जबड़े वाले चेहरे के भाव से है, जिसमें अक्सर आंखें तिरछी हो जाती हैं या जीभ बाहर निकली होती है। आमतौर पर यह भाव गूनिंग की एक लंबी प्रक्रिया के बाद बनाया जाता है। इंटरनेट की बोलचाल में गूनिंग हस्तमैथुन के एक लंबे रूप को कहा जाता है, जिसमें चरमोत्कर्ष तक पहुंचने से ठीक पहले खुद को बार-बार रोका जाता है ताकि एक अलग तरह की मदहोशी महसूस हो सके।
पिछले दो वर्षों में गूनिंग से जुड़े वीडियो और सामग्री की लोकप्रियता में भारी उछाल दर्ज किया गया है। वयस्क सामग्री से जुड़े मंच क्लिप्स4सेल के आंकड़ों के मुताबिक, नवंबर 2023 के मुकाबले दिसंबर 2025 तक इस विषय में लोगों की रुचि में 151 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके अलावा, साल 2025 में ब्रिटेन में गूगल पर सबसे ज्यादा खोजे जाने वाले शीर्ष पांच अनौपचारिक शब्दों में भी यह शामिल रहा। उस वर्ष ब्रिटेन में इस शब्द को लेकर 28,000 बार खोज की गई, जिसका मतलब है कि प्रतिदिन औसतन लगभग 77 बार यह शब्द खोजा गया। ऐसे में दफ्तर के गंभीर माहौल में इस तरह के यौन संकेत वाले चेहरे की मांग करना पूरी तरह अप्रत्याशित माना जा रहा है।
सोशल मीडिया पर प्रशंसकों की नाराजगी और बचाव में उठे तर्क
पॉडकास्ट की यह क्लिप जब सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा की गई, तो लोगों ने तुरंत इस पर नाराजगी जताना शुरू कर दिया। कई उपयोगकर्ताओं ने सीधे तौर पर गायिका पर सवाल उठाए और कहा कि वह बेहद सहजता से अपने सभी कर्मचारियों के साथ यौन उत्पीड़न करने की बात स्वीकार कर रही हैं। कुछ अन्य लोगों ने लिखा कि कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न कोई मजाक का विषय नहीं है, भले ही गायिका ने यह बात व्यंग्य में ही क्यों न कही हो।
हालांकि, इस विवाद के बीच गायिका के कई समर्थक उनके बचाव में भी उतर आए। प्रशंसकों के एक वर्ग का कहना था कि यह केवल एक बचकाना और मासूम मजाक था, जिसे जरूरत से ज्यादा तूल देकर यौन उत्पीड़न का नाम दिया जा रहा है। कुछ लोगों ने तर्क दिया कि यह केवल शब्दों के गलत चयन का मामला हो सकता है। उनका मानना था कि यदि ज़ारा ने केवल कोई मजाकिया या फनी चेहरा बनाने की बात कही होती तो स्थिति अलग होती, लेकिन सीधे पोर्नोग्राफी और यौन क्रिया से जुड़े शब्द का इस्तेमाल करके उसे रोजगार से जोड़ना बेहद गलत कदम था।
विशेषज्ञों की राय और कार्यस्थल पर उत्पीड़न का कानूनी पहलू
इस पूरे मामले पर कार्यस्थल और यौन संबंध विशेषज्ञों ने भी गहरी चिंता जताई है। यौन एवं संबंध चिकित्सक सारा बेरी का मानना है कि मनोरंजन के नाम पर किसी भी कर्मचारी पर कुछ थोपना एक स्वतंत्र और तनावमुक्त माहौल तैयार करने के बिल्कुल उलट है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब यह मांग सीधे तौर पर हस्तमैथुन और कामोत्तेजना से जुड़ी मुद्रा से संबंध रखती है, तो यह स्थिति और भी ज्यादा गंभीर हो जाती है। उनका कहना है कि किसी को भी ऐसा काम करने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए जो वह न करना चाहे, खासकर तब जब उस बात का उसके काम या सामाजिक व्यवहार से कोई लेना-देना न हो।
चिकित्सक ने यह भी रेखांकित किया कि वर्तमान सामाजिक परिवेश में, जहां कार्यस्थल की शुचिता को लेकर संवेदनशीलता काफी बढ़ चुकी है, दफ्तर में इस तरह की मांग अनिवार्य करना चौंकाने वाला है। भले ही ज़ारा लार्सन ने यह बात केवल प्रचार पाने या चुटकुले के तौर पर कही हो, यह किसी भी सूरत में स्वस्थ कार्य संस्कृति को बढ़ावा नहीं देता। वहीं मानव संसाधन सलाहकार फर्म हैमिल्टन नैश के कर्मचारी संबंध विशेषज्ञ जिम मूर ने कहा कि यह टिप्पणी पूरी तरह अनुचित व्यवहार की सीमा पर खड़ी है।
जिम मूर के अनुसार, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की पहचान करने की कानूनी कसौटी में कई ऐसे पहलू शामिल होते हैं जिनका कर्मचारियों को अंदाजा भी नहीं होता। किसी सहकर्मी से दफ्तर में यौन संकेत देने वाला चेहरा बनाने के लिए कहना सीधे तौर पर कानूनी सीमा लांघने जैसा हो सकता है, भले ही मालिक इसे कितना भी मजेदार समझता हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून की नजर में बात कहने वाले की मंशा नहीं, बल्कि कर्मचारी पर पड़ने वाला असर सबसे ज्यादा मायने रखता है। यह विवाद इसलिए भी ज्यादा चौंकाने वाला है क्योंकि ज़ारा लार्सन पहले भी यौन उत्पीड़न और हिंसा के खिलाफ खुलकर बोलती रही हैं। उन्होंने पहले गायक क्रिस ब्राउन पर लगे यौन शोषण के आरोपों की कड़ी आलोचना की थी और वह सामाजिक न्याय के लिए लगातार अपनी आवाज उठाती रही हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में शब्दों के चयन में अधिक सावधानी बरतना जरूरी है।



















