आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में पर्सनल असिस्टेंट को लेकर लंबे समय से नए प्रयोग हो रहे हैं, लेकिन अब इसे एक नए रूप में पेश किया गया है। रेप्लिका की फाउंडर युजीनिया कुयदा ने अपने नए स्टार्टअप वाबी को आधिकारिक तौर पर सभी यूजर्स के लिए उपलब्ध करा दिया है। यह एक ऐसा मल्टीप्लेयर पर्सनल एआई असिस्टेंट है जो मैसेजिंग ऐप की तरह काम करता है और यूजर्स को अलग अलग लक्ष्यों तथा जिम्मेदारियों के लिए कई चैट थ्रेड्स बनाने की सुविधा देता है। करीब एक दशक पहले शुरू हुए सफर के बाद अब जाकर तकनीक उस मुकाम पर पहुंची है, जहां कोई एआई सिस्टम यूजर की जरूरत को समझकर उसके लिए खुद टूल्स तैयार कर सकता है।
शुरुआती सफर से लेकर रेप्लिका और वाबी तक का बदलाव
युजीनिया कुयदा का यह सफर लगभग बारह साल पहले शुरू हुआ था, जब उन्होंने अपने शुरुआती स्टार्टअप लुका के तहत आईओ नाम का पहला प्रोडक्ट तैयार किया था। वह दौर डीप लर्निंग और बड़े लैंग्वेज मॉडल्स की मौजूदा क्रांतियों से काफी पहले का था। न्यूयॉर्क शहर में रेस्तरां सुझावों के लिए बनाए गए उस नैचुरल लैंग्वेज सोशल कंसीयज ने सीमित तकनीकी दायरे के बावजूद काम किया था। समय के साथ लुका ने अपना रुख बदला और वह लोकप्रिय एआई साथी कंपनी रेप्लिका के रूप में तब्दील हो गई, जिसने अकेलेपन से जूझ रहे लाखों यूजर्स को एक वर्चुअल साथी उपलब्ध कराया।
बीते वर्ष युजीनिया कुयदा ने रेप्लिका के मुख्य कार्यकारी अधिकारी का पद छोड़ दिया और अपने नए वेंचर वाबी की नींव रखी। उस समय इस स्टार्टअप ने बीस मिलियन डॉलर की प्री-सीड फंडिंग जुटाई थी। शुरुआती दौर में वाबी को एक ऐसे सोशल प्लेटफॉर्म के तौर पर देखा जा रहा था, जहां आम यूजर्स प्रॉम्प्ट्स की मदद से छोटे ऐप्स बनाकर अपने दोस्तों या पूरे प्लेटफॉर्म पर साझा कर सकते थे। हालांकि, बीते एक साल के दौरान टीम को यह अहसास हुआ कि भले ही लोग ऐप स्टोर के पारंपरिक समाधानों के बजाय निजी सॉफ्टवेयर पसंद करते हैं, लेकिन वे खुद बैठकर सॉफ्टवेयर बनाने में अपना समय बर्बाद नहीं करना चाहते।
वाबी 2.0: अपने आप ऐप्स बनाने वाला एआई एजेंट
यूजर्स के इसी व्यवहार को देखते हुए वाबी ने अपने मॉडल में बड़ा बदलाव किया है, जिसे युजीनिया कुयदा एक स्वाभाविक विकास मानती हैं। वाबी 2.0 में ऐप तैयार करने की पूरी जिम्मेदारी एआई एजेंट खुद संभालता है। यूजर जैसे ही अपने ईमेल को इस प्लेटफॉर्म से जोड़ता है, सिस्टम तुरंत शुरुआती प्राथमिकताओं के आधार पर कई अलग थ्रेड्स और संबंधित मिनी ऐप्स बना देता है।
इसके बाद यूजर अपनी इच्छानुसार नए थ्रेड्स जोड़ सकते हैं या खास जरूरतों के लिए कस्टम ऐप्स बनाने की मांग कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, सेहत से जुड़े किसी थ्रेड में वजन घटाने का ट्रैकर अपने आप काम करने लगता है, जबकि परिवार से जुड़े थ्रेड में आसपास बच्चों के लिए होने वाले कार्यक्रमों की जानकारी देने वाला ऐप खुद सक्रिय हो जाता है। यह प्लेटफॉर्म बाजार में मौजूद अन्य पर्सनल एआई टूल्स की तरह इनबॉक्स संभालने या उड़ानों की सस्ती टिकटें तलाशने जैसे काम तो करता ही है, साथ ही कस्टम ऐप्स की मदद से उत्पादकता को कई गुना बढ़ा देता है।
सिंगल थ्रेड की कमियों से निपटने के लिए मल्टीथ्रेड डिजाइन
बाजार में मौजूद अन्य एआई सहायकों से वाबी को अलग करने वाली सबसे बड़ी खूबी इसका मल्टीथ्रेडेड ढांचा है। आम तौर पर ज्यादातर एआई असिस्टेंट यूजर को एक ही लंबे चैट थ्रेड में बांधकर रखते हैं। लगातार एक ही बातचीत में ढेरों निर्देश और जानकारियां देने से चैट इतनी लंबी हो जाती है कि जरूरी चीजें खोजना मुश्किल हो जाता है।
एआई शोधकर्ताओं के मुताबिक, जब कोई चैटबॉट बहुत लंबी बातचीत जारी रखता है, तो उसमें भ्रामक जानकारी देने, प्रसंग भूल जाने या सुरक्षा नियमों को दरकिनार करने की आशंका काफी बढ़ जाती है। वाबी इस समस्या को हल करने के लिए अलग अलग कार्यों को अलग थ्रेड्स में बांटता है। इससे हर विषय का संदर्भ सुरक्षित रहता है और एआई एजेंट बिना भटके सटीक जवाब देने में सक्षम रहता है।
मल्टीप्लेयर अनुभव: जब एआई चैट में जुड़ते हैं परिवार और दोस्त
वाबी का सबसे अनोखा पहलू इसका मल्टीप्लेयर और सहयोगी ढांचा है। वर्तमान में उपलब्ध ज्यादातर एजेंटिक एप्लिकेशन केवल यूजर और बॉट के बीच की निजी बातचीत तक सीमित हैं। वाबी इस धारणा को बदलकर ग्रुप चैट का माहौल तैयार करता है, ताकि लोग एआई के जरिए आपस में भी जुड़ सकें।
इन शेयर्ड थ्रेड्स में कई तरह के उपयोगी टूल्स एक साथ काम करते हैं। उदाहरण के तौर पर, पार्टनर के साथ साझा किए गए थ्रेड में लाइव म्यूजिक कॉन्सर्ट की जानकारी, रिश्तों को मजबूत करने के लिए रोजाना पूछे जाने वाले सवाल, पसंदीदा रेस्तरां की सूची, साझा कैलेंडर और साथ पढ़ी जाने वाली किताबों की प्रगति जैसे ऐप्स शामिल किए जा सकते हैं। वहीं परिवार के लिए बने थ्रेड में बच्चों की दिनचर्या का शेड्यूल, आसपास के मनोरंजक कार्यक्रम और पढ़ाई से जुड़े क्विज जैसे टूल्स जोड़े जा सकते हैं। इस चैट में कोई भी सदस्य सीधे एआई से यह पूछ सकता है कि क्या दूसरा व्यक्ति किसी खास दिन खाली है या उसने जरूरी टिकटें खरीद ली हैं।
गोपनीयता, सुरक्षा और भविष्य की रणनीति
पर्सनल डेटा और ईमेल एक्सेस को लेकर उठने वाली चिंताओं के बीच वाबी ने प्राइवेसी को बेहद सख्त दायरे में रखा है। किसी भी ग्रुप चैट में क्या साझा करना है, यह पूरी तरह यूजर के नियंत्रण में रहता है। कैलेंडर, ईमेल या वित्तीय जानकारी साझा करने की सीमाएं तय की जा सकती हैं। चैट के भीतर हर सदस्य को साफ दिखता है कि कब और किसकी निजी जानकारी एजेंट द्वारा उपयोग में लाई गई है।
कंपनी ने डेटा सुरक्षा के लिए एसओसी 2 मानकों का स्वतंत्र ऑडिट पूरा किया है। वाबी का पूरा सिस्टम क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर संचालित होता है और इसका अधिकांश यूजर डेटा अमेरिका में स्थित सर्वरों में सुरक्षित रखा जाता है। जहां रेप्लिका का प्राथमिक उद्देश्य वर्चुअल बातचीत के जरिए अकेलेपन को दूर करना था, वहीं वाबी का मकसद तकनीक के जरिए लोगों को वास्तविक जीवन में एक दूसरे के करीब लाना है। वर्तमान में यह सर्विस सभी के लिए पूरी तरह मुफ्त रखी गई है, और कंपनी भविष्य के बिजनेस मॉडल तथा नए फंडिंग राउंड पर काम कर रही है।



















