उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में स्वरोजगार की एक नई मिसाल देखने को मिल रही है, जहां सरकारी मदद की बदौलत शुरू हुए टेक्सटाइल उद्यम ने न केवल एक परिवार की आर्थिक स्थिति बदल दी है, बल्कि आसपास के लोगों को भी रोजगार से जोड़ दिया है। जिले के गौरीगंज क्षेत्र में शिव दुलारी स्वयं सहायता समूह से संबद्ध राज इंटरप्राइजेज के जरिए कपड़ों का निर्माण और कारोबार किया जा रहा है। लक्ष्मण वर्मा ने अपनी मां शिव दुलारी के साथ मिलकर इस गारमेंट बिजनेस की नींव रखी थी। शुरुआती दौर में सरकारी अनुदान और प्रक्रिया संबंधी कई कठिनाइयों से गुजरने के बाद आज यह कारोबार पूरी तरह स्थापित हो चुका है और प्रति माह चालीस से पचास हजार रुपये का शुद्ध लाभ कमा रहा है।
शुरुआती संघर्ष और स्वयं सहायता समूह का सफर
लक्ष्मण वर्मा और उनकी मां शिव दुलारी ने जब इस कारोबार की योजना बनाई थी, तब पूंजी की व्यवस्था सबसे बड़ी चुनौती थी। इसके लिए उन्होंने स्वयं सहायता समूह के मंच से शुरुआत की। अनुदान हासिल करने के लिए उन्हें काफी भागदौड़ करनी पड़ी और कागजी प्रक्रियाओं की पेचीदगियों का सामना करना पड़ा। हालांकि, हिम्मत न हारते हुए उन्होंने अपने प्रयास जारी रखे। जैसे ही वित्तीय सहयोग मिला, उन्होंने तेजी से कपड़े तैयार करने वाली मशीनरी सिस्टम की स्थापना की। आज यह इकाई किसी भी बाहरी सहारे के बिना स्वतंत्र रूप से संचालित हो रही है और अपने खुद के ब्रांड के कपड़े तैयार कर रही है।
मुख्यमंत्री युवा उद्यमी अभियान से मिला पांच लाख का अनुदान
इस कारोबार को गति देने में प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री युवा उद्यमी अभियान की अहम भूमिका रही है। लक्ष्मण वर्मा के अनुसार, उन्हें वर्ष 2024 में इस योजना की जानकारी मिली थी। इसके तुरंत बाद उन्होंने अपनी मां के नाम पर औपचारिक आवेदन प्रस्तुत किया। आवेदन के उपरांत उद्योग कार्यालय की एक विशेष टीम ने मौके पर पहुंचकर उनके प्रस्तावित उद्यम का स्थलीय सर्वे और सत्यापन किया। सभी औपचारिकताएं संतोषजनक पाए जाने पर पांच लाख रुपये का अनुदान स्वीकृत कर सीधे खाते में जारी किया गया। इस वित्तीय मदद से सिलाई और निर्माण से जुड़ी आधुनिक मशीनें खरीदी गईं, जिससे उत्पादन क्षमता में काफी सुधार हुआ।
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स और स्थानीय बाजारों में ब्रांड की मांग
राज इंटरप्राइजेज ने अपने उत्पाद की पहुंच केवल अमेठी के आसपास के कस्बों तक सीमित नहीं रखी है। निर्मित कपड़ों को पारंपरिक रिटेल बाजारों में बेचने के साथ-साथ डिजिटल कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर भी उतारा गया है। आज उनके परिधान अमेज़न, फ्लिपकार्ट और मीशो जैसे प्रमुख ऑनलाइन मार्केटप्लेस पर बेचे जा रहे हैं। डिजिटल मौजूदगी की वजह से घर बैठे पूरे देश से ऑर्डर प्राप्त हो रहे हैं, जिससे बिक्री का दायरा काफी बढ़ गया है और व्यवसाय लगातार विस्तार कर रहा है।
स्थानीय लोगों को पलायन से मिली मुक्ति
इस टेक्सटाइल यूनिट ने क्षेत्र के चार से पांच अन्य लोगों को भी प्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध कराया है। बाहर जाकर काम करने की मजबूरी झेल रहे श्रमिकों के लिए यह पहल एक बड़ी राहत बनकर उभरी है। इकाई में कार्यरत कर्मचारी तेजभान कुमार के अनुसार, वे पहले पंजाब के लुधियाना में एक निजी नौकरी करते थे। वहां काम करते हुए छह-छह महीने तक घर लौटने का अवसर नहीं मिलता था और किसी भी विवाद या संकट के समय भारी परेशानी उठानी पड़ती थी। अब उन्हें अपने घर के पास ही काम मिल गया है, जहां प्रतिदिन केवल चार से पांच घंटे काम करके आठ से दस हजार रुपये आसानी से प्राप्त हो जाते हैं। वहीं, इकाई से जुड़ी महिला कर्मी मोनी देवी का कहना है कि पूर्व में काम की तलाश में गृह क्षेत्र से बाहर जाना पड़ता था, जिससे पारिवारिक स्तर पर तमाम समस्याएं आती थीं। अब गांव के निकट ही ससम्मान रोजगार मिलने से महिलाओं की आर्थिक स्थिति सुधरी है और बाहर जाने का दबाव खत्म हो गया है।
योजना में आवेदन की प्रक्रिया और पात्रता
मुख्यमंत्री युवा उद्यमी अभियान के तहत टेक्सटाइल अथवा मैन्युफैक्चरिंग जैसे किसी भी छोटे-बड़े उद्योग की शुरुआत के लिए पांच लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्राप्त की जा सकती है। इस योजना का लाभ उठाने के लिए अमेठी के जिला उद्योग कार्यालय में संपर्क कर आवेदन प्रक्रिया पूरी करनी होती है। योजना के लिए 18 से 45 वर्ष आयु वर्ग का कोई भी बेरोजगार युवा अथवा महिला आवेदन कर सकती है। इसके लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक और मोबाइल नंबर जैसे अनिवार्य दस्तावेजों की आवश्यकता होती है। आवेदन पूरी तरह निःशुल्क होता है। विभागीय सत्यापन और सर्वे के बाद अनुदान की राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में स्थानांतरित की जाती है।





















