ईरान के साथ हुए संघर्ष विराम की स्थिति फिलहाल डांवाडोल है। डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट रूप से संकेत दिया है कि यह समझौता अब प्रभावी नहीं रहा। डोनाल्ड ट्रंप ने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका भविष्य में और अधिक हमले कर सकता है और वह मामले को पूरी तरह से समाप्त करने पर विचार कर सकते हैं। हालांकि, उनका यह भी कहना था कि और हमलों का मतलब यह नहीं है कि युद्ध बहुत लंबा खिंचेगा। इन विरोधाभासी बयानों ने हाल ही में थमे संघर्ष के भविष्य को लेकर संदेह पैदा कर दिया है।
नई सैन्य कार्रवाई की चेतावनी
अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए लगातार सैन्य हमलों के बाद से अनिश्चितता का माहौल गहरा गया है। बुधवार को डोनाल्ड ट्रंप ने एक और हमले की चेतावनी जारी की, जिसके कुछ ही घंटों बाद सैन्य बलों ने ईरान के खिलाफ नए हमले शुरू करने की घोषणा की। पेंटागन के अनुसार, इन हमलों का उद्देश्य होरमुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता के लिए ईरान द्वारा पैदा किए जा रहे खतरों को कम करना था। डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया कि चीजें बहुत तेजी से बदल सकती हैं, और वे एक लंबे संघर्ष की तलाश में नहीं हैं। उन्होंने संघर्ष विराम को सिरे से नकारते हुए कहा कि यह खत्म हो चुका है और अमेरिका सैन्य स्तर पर काम पूरा करने में सक्षम है।
मध्यस्थता और कूटनीतिक प्रयास
मध्यस्थता प्रक्रिया में शामिल एक क्षेत्रीय खुफिया अधिकारी का कहना है कि यह संघर्ष एक बेहद नाजुक मोड़ पर है। अधिकारी के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच आपसी अविश्वास की खाई चौड़ी होती जा रही है, फिर भी उच्च-स्तरीय संपर्क चौबीसों घंटे जारी हैं। वर्तमान में पाकिस्तान और कतर के विदेश मंत्री इस वार्ता का नेतृत्व कर रहे हैं। इस प्रयास में मिस्र के खुफिया प्रमुख भी शामिल हैं। इसके साथ ही, सऊदी अरब के नेतृत्व और तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगन की भी इसमें अहम भूमिका है। रजब तैयब एर्दोगन का देश नाटो शिखर सम्मेलन की मेजबानी भी कर रहा था, जो बुधवार को संपन्न हुआ।
अविश्वास की जड़ें
अमेरिकी पक्ष होरमुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हो रहे हमलों को लेकर बेहद नाराज है। इसके अलावा, अमेरिका ने ईरान पर अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने की शर्तों पर बातचीत को लटकाने का आरोप लगाया है। परमाणु वार्ता को इस युद्ध को पूरी तरह समाप्त करने के लिए अगला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा था। वहीं, तेहरान का तर्क है कि अमेरिका ने जलडमरूमध्य से संबंधित समझौते का उल्लंघन किया है। ईरान का यह भी कहना है कि लेबनान में संघर्ष विराम को लागू करने में अमेरिका विफल रहा है, जिसमें इजरायली सैनिकों की वापसी भी शामिल थी।
विशेषज्ञों और नेताओं की प्रतिक्रिया
वॉशिंगटन इंस्टीट्यूट फॉर नियर ईस्ट पॉलिसी के मिलिट्री एंड सिक्योरिटी स्टडीज प्रोग्राम के निदेशक माइकल आइजनस्टेड का मानना है कि बातचीत अभी भी जारी है। उनका तर्क है कि राष्ट्रपति के बयानों के बावजूद वार्ता का दौर अभी खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग यानी एमओयू के अंत की घोषणा करना भी बातचीत की एक रणनीति हो सकती है। दूसरी ओर, ईरान के मुख्य वार्ताकार और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कलीबाफ ने कहा है कि अमेरिका ने समझौते को तोड़ा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि धौंस दिखाने का दौर बीत चुका है और ईरान पीछे नहीं हटने वाला है।
कूटनीतिक संतुलन और भविष्य की राह
पाकिस्तान, जिसने शुरू में संघर्ष विराम कराने में मदद की थी, ने फिर से युद्ध शुरू होने के खतरों के प्रति आगाह किया है। विदेश मंत्रालय ने जोर दिया कि शांति के लिए बातचीत ही एकमात्र रास्ता है। इन सबके बावजूद, डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नेताओं के खिलाफ काफी कठोर और अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया है। यह बयान पिछले महीने की उनकी बातों से बिल्कुल विपरीत हैं, जब उन्होंने ईरान के नेतृत्व को तार्किक और सुलझा हुआ बताया था। उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी ईरान के व्यवहार पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर वे जहाजों पर हमला करेंगे, तो अमेरिका उन्हें करारा जवाब देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप अक्सर अपनी बातचीत में दबाव बनाने के लिए धमकियों का सहारा लेते हैं, जैसा कि उन्होंने अप्रैल के संघर्ष विराम से पहले भी किया था। हालांकि, संघर्ष विराम के पूरी तरह समाप्त होने के बयानों से ईरान को सैन्य जवाबी कार्रवाई की खुली छूट मिल सकती है, जिससे तेल की कीमतों और वैश्विक वित्तीय बाजारों में बड़ी अस्थिरता पैदा होने का खतरा बना हुआ है।











