न्यूयॉर्क में वैश्विक कूटनीति के सबसे बड़े मंच पर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने पश्चिमी देशों के रवैये को आड़े हाथों लिया. संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें वार्षिक सत्र के दौरान अपने संबोधन में उन्होंने पश्चिमी दुनिया और इजरायल के रुख की कड़ी आलोचना की. उन्होंने इस धारणा को पूरी तरह खारिज किया कि उनका देश आतंकवाद फैलाता है, बल्कि जोर देकर कहा कि हकीकत में उनका मुल्क लंबे समय से बाहरी हमलों और आतंकी हरकतों का शिकार होता रहा है. उन्होंने साफ किया कि राष्ट्रीय संप्रभुता और सुरक्षा बनाए रखने के लिए रक्षा प्रणालियों को सशक्त करना तेहरान की सर्वोच्च प्राथमिकता है, और धमकियों के दबाव में आए बिना बातचीत की मेज पर बैठा जा सकता है.
नागरिक ठिकानों पर हुए हमलों का ब्योरा
ईरानी राष्ट्रपति ने वैश्विक मंच पर देश में क्षतिग्रस्त हुए नागरिक बुनियादी ढांचे का सिलसिलेवार ब्योरा रखा. उन्होंने बताया कि विदेशी हथियारों के जरिए शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, विश्वविद्यालयों, पुलों और खेल के मैदानों तक को निशाना बनाया गया है. खास तौर पर लामर्द स्थित एक स्पोर्ट्स हॉल की घटना का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि वहां विभिन्न गतिविधियों में भाग ले रहे युवाओं और बच्चों को नुकसान पहुंचाया गया. उनका आरोप था कि इन अभियानों में अमेरिकी और इजरायली शस्त्रागार का उपयोग हुआ, और जो ताकतें खुद आतंकियों को प्रश्रय तथा सैन्य प्रशिक्षण देती हैं, वही तेहरान को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश करती हैं.
वैश्विक मंच पर तस्वीरें और क्लस्टर बम के आरोप
सत्र के दौरान ईरानी राष्ट्रपति ने प्रतिनिधियों के सामने पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के साथ-साथ दक्षिणी हिस्से में स्थित मीनाब के स्कूली छात्रों के चित्र प्रदर्शित किए. उन्होंने दावा किया कि ये बच्चे संयुक्त सैन्य हमलों में अपनी जान गंवा चुके हैं. इसके अतिरिक्त, उन्होंने आरोप लगाया कि लामर्द क्षेत्र में बच्चों और आम नागरिकों के खिलाफ घातक क्लस्टर हथियारों का प्रयोग किया गया, जो अंतरराष्ट्रीय नियमों का खुला उल्लंघन है.
दो सदियों का इतिहास और शांतिपूर्ण परमाणु रुख
संबोधन में तेहरान के ऐतिहासिक रुख को रेखांकित करते हुए मसूद पेजेश्कियन ने कहा कि उनके देश पर हमेशा से युद्ध थोपा गया है, मगर वे अपनी संप्रभुता की हिफाजत से कभी पीछे नहीं हटेंगे. उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए स्पष्ट किया कि पिछले 200 वर्षों के दौरान ईरान ने किसी भी दूसरे मुल्क की सीमाओं का अतिक्रमण या हमला नहीं किया है. इसके अलावा, उन्होंने असैन्य कार्यों के लिए परमाणु ऊर्जा विकसित करने के राष्ट्रीय अधिकार का जोरदार बचाव किया और कहा कि शांतिपूर्ण वैज्ञानिक प्रगति के इस हक से कोई समझौता नहीं किया जाएगा.
अमेरिकी रुख और जलमार्गों की घेराबंदी पर सवाल
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संयुक्त राष्ट्र में दिए गए वक्तव्य पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पेजेश्कियन ने कहा कि वाशिंगटन की भाषा में सैन्य शक्ति और दबाव का खुला प्रदर्शन झलकता है. उन्होंने चेतावनी दी कि बमबारी और आक्रामकता की नीतियों से किसी राष्ट्र की प्रतिरोध क्षमता को कुचला नहीं जा सकता. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जरूरी आपूर्ति शृंखलाओं को बाधित करने के लिए अमेरिकी प्रशासन रणनीतिक जलमार्गों को नियंत्रित और बंद करने के प्रयासों में जुटा है.



















