अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी कूटनीतिक कामयाबियों का बखान करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र में कई ऐसे दावे पेश किए, जिन पर तीखी बहस छिड़ गई है। उन्होंने वैश्विक नेताओं के सामने कहा कि उनके हस्तक्षेप के चलते 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले संभावित सैन्य टकराव को टाल दिया गया, जिससे लगभग 3 करोड़ नागरिकों का जीवन सुरक्षित रहा। इसके साथ ही उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान दुनिया भर के आठ बड़े संघर्षों को समाप्त कराने का श्रेय भी स्वयं को दिया। हालांकि, कूटनीतिक हलकों और आंतरिक जांच-पड़तालों में इन दावों की सच्चाई पर गंभीर प्रश्न उठाए जा रहे हैं। भारत सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि दोनों पड़ोसियों के बीच किसी तीसरे पक्ष या अमेरिकी मध्यस्थता की कोई भूमिका नहीं थी।
संयुक्त राष्ट्र के मंच से किए गए बड़े दावे और उनकी जमीनी हकीकत
अपने संबोधन के दौरान ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति स्थापित करने के अपने प्रयासों को रेखांकित किया। उन्होंने जिन आठ टकरावों को सुलझाने की बात कही, उनमें कंबोडिया और थाईलैंड, कोसोवो और सर्बिया, रवांडा और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य के साथ-साथ आर्मेनिया और अजरबैजान के मामले शामिल थे। इसके अलावा उन्होंने गाजा पट्टी की स्थिति, इजरायल और ईरान के बीच जारी गतिरोध तथा मिस्र और इथियोपिया के आपसी विवाद को भी इसी सूची में जोड़ा। स्वतंत्र तथ्य-परीक्षणों में इन बातों का विश्लेषण करने पर यह संख्या वास्तविकता से परे पाई गई है। उदाहरण के लिए, मिस्र और इथियोपिया के बीच का मसला कभी पूर्ण युद्ध में तब्दील नहीं हुआ था। इसी तरह कोसोवो और सर्बिया के बीच भी उनके प्रशासन के दौरान कोई सक्रिय जंग नहीं चल रही थी, जबकि शांति पहलों के बावजूद रवांडा और कांगो के बीच तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाया था।
पर्यावरण, निवेश और सैन्य साजो-सामान से जुड़े वक्तव्यों पर उठे सवाल
वैश्विक लड़ाइयों के अलावा ट्रंप ने जलवायु परिवर्तन और अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने पर्यावरण को लेकर चेतावनी देने वालों की तुलना कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI के खतरों की चर्चा करने वालों से की। मौसम विज्ञान से जुड़ी विश्व संस्था के संकलित आंकड़ों के अनुसार हाल के वर्षों में धरती का तापमान निरंतर बढ़ा है, जो उनके आकलन के विपरीत तस्वीर पेश करता है। इतना ही नहीं, अमेरिका में 21 ट्रिलियन डॉलर के नए निवेश लाने की उनकी घोषणा भी सवालों के घेरे में आ गई, क्योंकि आधिकारिक सरकारी रिकॉर्ड और प्रशासनिक वेबसाइट पर इसके बिल्कुल अलग आंकड़े दर्ज हैं। देश के रक्षा भंडारों के बारे में किए गए दावों की जब पड़ताल हुई, तो पेंटागन के महानिरीक्षक और कांग्रेस के बजट कार्यालय की समीक्षाओं में महत्वपूर्ण गोला-बारूद तथा हथियारों की कमी की बात सामने आई।
मध्यावधि चुनाव के मुहाने पर रिपब्लिकन पार्टी के भीतर उभरते मतभेद
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दावों की बौछार के बीच घरेलू राजनीति में ट्रंप के लिए चुनौतियां लगातार गंभीर होती जा रही हैं। मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले उनकी अपनी रिपब्लिकन पार्टी के प्रमुख रणनीतिकार और उम्मीदवार ईरान के खिलाफ जारी सैन्य अभियान को लेकर खुले तौर पर असहज दिखने लगे हैं। मिशिगन राज्य से सीनेट के रिपब्लिकन प्रत्याशी माइक रोजर्स ने रोजमर्रा की वस्तुओं के आसमान छूते दामों का हवाला देते हुए इस टकराव को तत्काल रोकने की जरूरत बताई। उधर आयोवा से रिपब्लिकन प्रतिनिधि एश्ली हिंसन ने भी जोर देकर कहा कि आम जनता को पेट्रोल पंपों और खुदरा दुकानों पर युद्ध का आर्थिक खामियाजा भुगतने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। रोचक तथ्य यह है कि ये दोनों ही नेता पूर्व में ईरान के खिलाफ सैन्य रणनीति का पुरजोर समर्थन कर चुके हैं। हिंसन का तर्क रहा है कि हालांकि बड़े संकट को रोकने के लिए शुरुआती कदम आवश्यक थे, लेकिन अब जारी सैन्य अभियान को समेटना बेहद जरूरी हो चुका है।
गिरती लोकप्रियता और ऊर्जा कीमतों का सियासी असर
ईरान से जुड़े संघर्ष के गहराने के बाद ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मची है, जिसका सीधा असर पेट्रोल और डीजल की खुदरा दरों पर पड़ा है। जनमत सर्वेक्षणों में इस नीति को लेकर अमेरिकी नागरिकों की नाराजगी साफ झलक रही है। एक ताजा राष्ट्रीय सर्वेक्षण में सामने आया कि देश के सिर्फ 26 प्रतिशत वयस्क नागरिक ही ईरान संकट से निपटने के ट्रंप के तौर-तरीकों को सही मानते हैं, जबकि एक महीने पहले तक यह आंकड़ा 33 प्रतिशत पर था। सबसे बड़ा झटका रिपब्लिकन समर्थकों के रुख में आया है, जहां मार्च के महीने में 73 फीसदी मतदाता उनके पक्ष में खड़े थे, वहीं अब यह समर्थन घटकर 60 फीसदी पर आ गया है। इस आंतरिक असंतोष के बावजूद प्रशासनिक खेमा एकजुटता का दावा कर रहा है। प्रवक्ता डेविस इंगले ने मतभेद जताने वाले नेताओं की बातों को दरकिनार करते हुए दोहराया कि ट्रंप अपनी पार्टी के निर्विवाद नेता हैं और कांग्रेस में रिपब्लिकन बहुमत दिलाने के लिए पूरी तरह संकल्पित हैं।



















