मेटा अपने कृत्रिम बुद्धिमत्ता टूल्स को हर स्क्रीन तक पहुंचाने की दिशा में काफी तेज रफ्तार दिखा रहा है। स्मार्टफोन पर पहली बार पेश किए जाने के ठीक एक महीने के भीतर कंपनी ने बुधवार को घोषणा की कि उसका असिस्टेंट म्यूज अब एक समर्पित आईपैड ऐप के रूप में भी उपलब्ध हो चुका है। दिलचस्प बात यह है कि इसी कंपनी के फोटो और वीडियो शेयरिंग प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम को आईपैड तक पहुंचने में लगभग 15 साल लग गए थे, जबकि यूजर्स लंबे समय से इसकी मांग कर रहे थे। इसके विपरीत, टेक्स्ट पर आधारित इंटरफेस होने के कारण म्यूज को टैबलेट स्क्रीन के अनुकूल बनाना तकनीकी रूप से अपेक्षाकृत आसान रहा, क्योंकि यहां जटिल वीडियो या इमेज लेआउट की जटिलताएं बहुत कम होती हैं।
डाउनलोड के आंकड़े और रोजमर्रा के कामों में मदद
सेंसर टॉवर के अनुमान के मुताबिक, 8 सितंबर को आईओएस और एंड्रॉइड पर आने के बाद से अब तक म्यूज 66 लाख से अधिक इंस्टॉल्स पूरे कर चुका है। यह ऐप दर्जनों कंज्यूमर एआई एजेंट्स की कतार में शामिल होकर लोगों के डिजिटल रूटीन को संभालने का काम करता है। इसमें यूजर्स अपने जरूरी खातों को जोड़ सकते हैं, जिससे ईमेल देखना, मीटिंग्स ट्रैक करना और बिल चुकाना आसान हो जाता है। इसके अलावा टेबल रिजर्वेशन कराने, किराना ऑर्डर करने, निजी लक्ष्य तय करने और ऑनलाइन खरीदारी जैसे काम भी यह असिस्टेंट खुद संभाल सकता है।
छोटे कारोबारियों और खरीदारी के लिए नए कनेक्टर्स
इन सुविधाओं को संभव बनाने के लिए मेटा लगातार तीसरे पक्ष के टूल्स को जोड़ रहा है, जिन्हें ऐप में कनेक्टर्स कहा जाता है। यूजर्स केवल उन्हीं प्लेटफॉर्म्स को अनुमति देते हैं, जिन पर वे एआई का दखल चाहते हैं। आईपैड वर्जन के साथ मेटा ने कई नए बिजनेस टूल्स जोड़े हैं। इनमें असाना, कैनवा, ड्रॉपबॉक्स, फिगमा, क्विकबुक्स, गिटहब, क्लेवियो और जूम शामिल हैं। साथ ही नोशन, ग्रेनोला और मेटा के विज्ञापन खातों के कनेक्टर्स भी शामिल किए गए हैं। इसके अतिरिक्त बेस्ट बाय, गैप, सेफोरा, वॉलमार्ट और वेफेयर जैसे रिटेलर्स के साथ साझेदारी की गई है, ताकि एजेंट सीधे इन वेबसाइट्स पर जाकर खरीदारी पूरी कर सके।
वेबसाइट्स द्वारा ब्लॉकिंग और नए ओपन स्टैंडर्ड की तैयारी
एआई एजेंट्स की यह पूरी व्यवस्था अभी नई है, इसलिए लेन-देन के दौरान तकनीकी अड़चनें भी सामने आ रही हैं। कई ऑनलाइन स्टोर इन एजेंट्स को नुकसान पहुंचाने वाले बॉट्स समझकर उनका एक्सेस ब्लॉक कर देते हैं। इस बाधा को दूर करने के लिए कंपनी ने उद्योग के अन्य साझेदारों के साथ मिलकर एक समाधान तैयार करने की बात कही है। इसके तहत एक ऐसा ओपन स्टैंडर्ड बनाया जा रहा है, जिससे व्यक्तिगत एआई एजेंट्स सीधे तौर पर कारोबारी वेबसाइट्स के सामने अपनी पहचान प्रमाणित कर सकेंगे और कंपनियां सामान्य सुरक्षा खतरों से अलग हटकर उपयोगी बॉट्स को आसानी से पहचान सकेंगी।


















