मेटा के नए डेस्कटॉप एआई एजेंट म्यूज को लेकर प्राइवेसी से जुड़ा एक गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। एक पत्रकार ने दावा किया कि मैक कंप्यूटर पर काम करते हुए म्यूज एआई ने बिना किसी स्पष्ट मंजूरी के उनके निजी संदेश पढ़ लिए। इस आरोप के सार्वजनिक होते ही टेक कंपनी ने फौरन सफाई जारी की और यह साफ किया कि उनका सॉफ्टवेयर उपभोक्ता की सीधी सहमति और सिस्टम सेटिंग्स की मंजूरी के बिना कभी भी पर्सनल चैट तक नहीं पहुंच सकता।
कंपनी के संचार उपाध्यक्ष एंडी स्टोन ने X पर लिखा कि मैक पर म्यूज ऐप का मैसेजेस इंटीग्रेशन पूरी तरह से यूजर के हाथ में है। स्टोन ने जोर देकर कहा कि इस फीचर को सक्रिय करने के लिए उपभोक्ता को खुद आगे बढ़कर अनुमति देनी पड़ती है। उनके मुताबिक जब तक कोई यूजर फुल डिस्क एक्सेस और मैसेजेस कनेक्टर दोनों को मैनुअल तौर पर ऑन नहीं करता, तब तक म्यूज के लिए किसी भी संदेश को पढ़ना तकनीकी रूप से असंभव है।
मेटा के इंजीनियरों ने दी सिस्टम सुरक्षा की दलील
स्टोन के आधिकारिक बयान के साथ ही मेटा सुपरइंटेलिजेंस लैब्स के अधिकारी डेविड सिंगलटन ने भी थ्रेड्स प्लेटफॉर्म पर मामले की तकनीकी गहराई समझाई। उन्होंने बताया कि मैक ऑपरेटिंग सिस्टम पर म्यूज को संदेशों तक पहुंचने की अनुमति देने के लिए तीन अलग-अलग स्तरों की सुरक्षा को पार करना पड़ता है। इसमें ऐप के स्तर पर मांगी जाने वाली परमिशन और मैकओएस के इन-बिल्ट सुरक्षा तंत्र शामिल हैं। सिंगलटन के अनुसार इन सुरक्षा घेरों को तोड़ा नहीं जा सकता, भले ही म्यूज ऐप के कोड में कोई तकनीकी बग क्यों न मौजूद हो।
सिंगलटन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार सबसे पहले यूजर को सिस्टम में जाकर फुल डिस्क एक्सेस चालू करना होता है। इसके बाद ही यह चुनने का विकल्प मिलता है कि म्यूज मैसेजेस ऐप को किस स्तर की पहुंच दे, जैसे बिल्कुल नहीं, केवल पढ़ने की सुविधा, या सामान्य रीड एक्सेस। अगर फुल डिस्क एक्सेस बंद रखा जाए, तो ये तमाम विकल्प डिसेबल या धूसर रहते हैं। इसके अलावा जब कोई इस परमिशन को सक्षम करने का प्रयास करता है, तो मैकओएस की सेटिंग्स स्क्रीन खुलकर सामने आती है जहां यूजर को दोबारा अपने इरादे की पुष्टि करनी होती है। इस प्रक्रिया को पूरा करने के बाद म्यूज ऐप अपने आप पूरी तरह रीस्टार्ट होता है, जिससे यह संभावना न के बराबर रह जाती है कि किसी यूजर से यह कदम अनजाने में उठ गया हो। सिंगलटन ने मेटा के सुरक्षा ढांचे और बग बाउंटी से जुड़े आधिकारिक पेज का हवाला भी दिया।
पत्रकार का आरोप और एआई के जवाब पर संशय
दूसरी तरफ पत्रकार जेसन एटेन ने अपनी रिपोर्ट में एक अलग ही स्थिति बयां की थी। उनका कहना था कि जब म्यूज ने उनके संदेश पढ़े, तब उनके कंप्यूटर पर फुल डिस्क एक्सेस का विकल्प पूरी तरह बंद था। जब उन्होंने इस अनपेक्षित गतिविधि के बारे में खुद म्यूज एआई से सवाल किया, तो बॉट ने जवाब दिया कि वह डिवाइस के नोटिफिकेशन सिंक कर रहा था। एटेन का मानना है कि म्यूज स्क्रीन पर आने वाले बैनर नोटिफिकेशन के टेक्स्ट को सीधे एआई एजेंट के पास भेज रहा था।
हालांकि सिंगलटन ने बॉट के इस स्पष्टीकरण को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि एआई भ्रमित हो गया था और उसने पूरी स्थिति के बारे में गलत जानकारी दे दी। कंपनी का रुख स्पष्ट है कि जो घटनाक्रम पत्रकार द्वारा बताया जा रहा है, वह सिस्टम के मौजूदा तकनीकी ढांचे के तहत संभव ही नहीं था।
पुराने प्राइवेसी रिकॉर्ड और विश्वास का संकट
मेटा की तरफ से दी गई तकनीकी दलीलों के बावजूद आम उपभोक्ताओं और जानकारों के बीच संशय बना हुआ है। कंपनी का पिछला इतिहास उपभोक्ता डेटा के अनुचित प्रबंधन, लंबे मुकदमों, अमेरिकी फेडरल ट्रेड कमीशन यानी एफटीसी के नियमों के उल्लंघन और भारी भरकम जुर्मानों से भरा रहा है। इनमें कैम्ब्रिज एनालिटिका जैसे चर्चित डेटा लीक मामले भी शामिल रहे हैं, जहां न्यू मैक्सिको की एक जूरी ने पाया था कि कंपनी ने डेटा हैंडलिंग को लेकर यूजर्स को गुमराह किया था। सुरक्षा उल्लंघनों के चलते यूरोपीय यूनियन में लगे 263 मिलियन डॉलर के जुर्माने, 5 बिलियन डॉलर के एफटीसी समझौते, 18 बिलियन डॉलर के सेटलमेंट और 8 बिलियन डॉलर के प्राइवेसी मुकदमों के साये में मेटा के किसी भी नए टूल पर सवाल उठना लाजिमी है।
उपभोक्ता एआई बाजार में अपनी बादशाहत कायम करने के लिए मेटा के लिए यह विश्वास हासिल करना बेहद अहम है। हालांकि म्यूज ऐप इस समय ऐप स्टोर पर शीर्ष स्थान पर काबिज है, लेकिन अगर डेटा सुरक्षा को लेकर इस तरह के सवाल लगातार उठते रहे, तो उसकी साख को भारी नुकसान पहुंच सकता है।
फेसबुक मार्केटप्लेस से जुड़ा एक और मामला
म्यूज द्वारा यूजर की सीमाओं को लांघने का यह अकेला मामला नहीं है। इससे पहले यूट्यूबर मैट रॉब ने भी म्यूज के कामकाज पर चिंता जताई थी। उन्होंने बताया था कि फेसबुक मार्केटप्लेस पर सामान बेचने का काम संभालते हुए म्यूज ने उनका निजी पता खरीदार के साथ साझा कर दिया था, जिसके चलते जब वह घर पर मौजूद नहीं थे तब एक खरीदार उनके घर पहुंच गया था। बाद में मेटा द्वारा मामले की जांच करने पर पता चला कि यह एक पेचीदा स्थिति थी और रॉब ने भी स्वीकार किया कि उन्होंने ही म्यूज को वह परमिशन दी थी जिसके कारण यह पता शेयर हुआ था। फिर भी, निजी डेटा के ऐसे संवेदनशील आदान-प्रदान ने एआई सहायकों की सुरक्षा नीतियों पर बहस को हवा दे दी है।


















