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भाद्रपद शुक्ल दशमी पर रवि योग का विशेष संयोग, जानिए 21 सितंबर 2026 के शुभ मुहूर्त और राहुकालराशिफल
21 सित॰ 2026, 2:45 am (9 दिन पहले)· 1

भाद्रपद शुक्ल दशमी पर रवि योग का विशेष संयोग, जानिए 21 सितंबर 2026 के शुभ मुहूर्त और राहुकाल

21 सितंबर 2026 को भाद्रपद शुक्ल दशमी के साथ रवि योग और शोभन योग का संयोग बन रहा है, जिसमें शिव उपासना और चंद्र शांति के विशेष विधान हैं।

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के साथ 21 सितंबर 2026 का पंचांग धार्मिक साधना और दैनिक कार्यों के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दिन पूरे समय रवि योग प्रभावी रहेगा, जो किसी भी कार्य में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए अनुकूल माना जाता है। पंचांग गणना के अनुसार दशमी तिथि रात 08:00 पी एम तक रहेगी और उसके उपरांत एकादशी तिथि का आरंभ होगा। सोमवार का दिन होने से भगवान शिव की पूजा और चंद्र देव से संबंधित ज्योतिषीय उपायों का विशेष फल प्राप्त होता है। नक्षत्र मंडल में उत्तराषाढा नक्षत्र संपूर्ण रात्रि तक व्याप्त रहेगा, जबकि करण में तैतिल और योग में शोभन योग की उपस्थिति दिन की शुभता को बढ़ा रही है।

ग्रह और नक्षत्रों की खगोलीय स्थिति

आकाशीय गणना के अनुसार चंद्रमा इस दिन धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। वहीं सूर्य देव कन्या राशि में विराजमान रहेंगे। सूर्य का गोचर इस समय आकाश मंडल के 12वें नक्षत्र उत्तराफाल्गुनी में बना हुआ है। उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र का विस्तार सिंह राशि के 26 डिग्री 40 मिनट से आरंभ होकर कन्या राशि के 10 डिग्री 00 मिनट तक फैला हुआ है। इस नक्षत्र के अधिपति स्वयं सूर्य देव हैं, जबकि इसके आराध्य देवता अर्यमा हैं, जिन्हें देवों और पितरों का प्रमुख माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्तियों में स्वाभाविक रूप से तेज, उच्च महत्वाकांक्षा, परोपकार की भावना और उत्कृष्ट नेतृत्व क्षमता पाई जाती है। आज के दिन पूर्व दिशा में दिशाशूल रहेगा, इसलिए इस दिशा में अनिवार्य यात्रा करने से पूर्व आवश्यक सावधानी रखनी चाहिए।

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सोमवार व्रत और शिव पूजन की संपूर्ण विधि

सोमवार का दिन देवाधिदेव महादेव को समर्पित होता है, इसलिए इस दिन व्रत और विशेष आराधना की परंपरा है। साधक को प्रातः काल नित्यकर्म और स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके पश्चात पूजा स्थल पर बैठकर भगवान शिव का स्मरण करते हुए सोमवार व्रत का संकल्प लेना चाहिए। निकटवर्ती शिवालय में जाकर शिवलिंग पर सबसे पहले शुद्ध जल अर्पित करना चाहिए। इसके उपरांत दूध, दही और शहद से अभिषेक किया जा सकता है। अभिषेक के बाद पुनः शुद्ध जल चढ़ाकर बेलपत्र, धतूरा और श्वेत पुष्प अर्पित करने का विधान है। पूजा के समय निरंतर ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप करना चाहिए और अंत में आरती कर अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए प्रार्थना करनी चाहिए। शिव साधना के लिए प्रातः काल और प्रदोष काल का समय सर्वोत्तम फलदायी माना गया है।

चंद्र दोष निवारण और आध्यात्मिक महत्व

ज्योतिष शास्त्र में सोमवार का सीधा संबंध चंद्रमा से माना गया है, जो मानव के मन और माता के कारक ग्रह हैं। भगवान शिव ने चंद्रमा की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें अपने मस्तक पर स्थान दिया था, जिसके कारण उन्हें चंद्रशेखर भी कहा जाता है। जिनकी कुंडली में चंद्र ग्रह कमजोर स्थिति में हो या चंद्र दोष बन रहा हो, उनके लिए सोमवार का व्रत और शिव पूजन मानसिक शांति तथा कुंडली में ग्रह स्थिति को मजबूत करने का सरल उपाय है। शिवलिंग पर जलाभिषेक करने से मन की अशांति दूर होती है और आंतरिक संतुलन स्थापित होता है।

21 सितंबर 2026 के पंचांगीय घटक

आज की तिथियों, नक्षत्रों और योगों का समय विभाजन इस प्रकार रहेगा

  • तिथि: दशमी तिथि 08:00 पी एम तक, इसके बाद एकादशी तिथि का आरंभ।
  • नक्षत्र: उत्तराषाढा नक्षत्र पूर्ण रात्रि तक प्रभावी।
  • करण: तैतिल करण 06:58 ए एम तक, इसके बाद गर करण 08:00 पी एम तक, फिर वणिज करण रहेगा।
  • योग: शोभन योग 04:06 पी एम तक, इसके पश्चात अतिगण्ड योग रहेगा।
  • चंद्र राशि: चंद्रमा धनु राशि में संचार करेंगे और उपरांत मकर राशि में प्रवेश करेंगे।
  • सूर्योदय व चंद्र व्यवस्था: चन्द्रास्त का समय 22 सितंबर को 01:40 ए एम रहेगा।

शुभ मुहूर्त और समय सारणी

मांगलिक और महत्वपूर्ण कार्यों को संपादित करने के लिए दिन के मुख्य शुभ मुहूर्त इस प्रकार निर्धारित हैं

  • ब्रह्म मुहूर्त: 04:35 ए एम से 05:22 ए एम तक।
  • अभिजीत मुहूर्त: 11:50 ए एम से 12:39 पी एम तक।
  • विजय मुहूर्त: 02:16 पी एम से 03:05 पी एम तक।
  • गोधूलि मुहूर्त: 06:20 पी एम से 06:44 पी एम तक।
  • अमृत काल: 22 सितंबर को 12:02 ए एम से 01:48 ए एम तक।
  • निशिता मुहूर्त: 22 सितंबर को 11:51 पी एम से 12:39 ए एम तक।
  • शिववास: सभा में 08:00 पी एम तक, इसके बाद क्रीड़ा में रहेगा।

अशुभ काल और निषेध समय

पंचांग के अनुसार कुछ विशिष्ट समय अंतरालों में नए और शुभ कार्यों का आरंभ वर्जित माना जाता है

  • राहुकाल: 07:41 ए एम से 09:12 ए एम तक रहेगा, जिसमें शुभ कार्य टालने चाहिए।
  • यमगण्ड: 10:43 ए एम से 12:15 पी एम तक।
  • गुलिक काल: 01:46 पी एम से 03:17 पी एम तक।
  • विडाल योग: 06:10 ए एम से 22 सितंबर को 12:31 ए एम तक।
  • दुर्मुहूर्त: 12:39 पी एम से 01:28 पी एम तक।
  • वर्ज्य: 01:25 पी एम से 03:11 पी एम तक रहेगा।

सवाल-जवाब

21 सितंबर 2026 को दशमी तिथि कब तक रहेगी?
पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि रात 08:00 पी एम तक रहेगी, जिसके बाद एकादशी तिथि प्रारंभ होगी।
आज के दिन राहुकाल का समय क्या है?
21 सितंबर 2026 को राहुकाल सुबह 07:41 ए एम से लेकर सुबह 09:12 ए एम तक रहेगा।
दिन का सबसे प्रमुख शुभ मुहूर्त कौन सा है?
अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:50 ए एम से दोपहर 12:39 पी एम तक रहेगा, जो नए और शुभ कार्यों के लिए उत्तम है।
आज कौन सा नक्षत्र और योग प्रभावी रहेगा?
आज उत्तराषाढा नक्षत्र संपूर्ण रात्रि तक रहेगा, जबकि शोभन योग शाम 04:06 पी एम तक रहेगा।
सोमवार को शिव पूजन से किस ग्रह का दोष दूर होता है?
सोमवार को भगवान शिव की आराधना और अभिषेक करने से कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है और चंद्र दोष समाप्त होता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Ayesha Siddiqui@ayesha-siddiqui·8 दिन पहले

यह पंचांग आधारित विश्लेषण सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गतिविधियों की रूपरेखा प्रस्तुत करता है। 21 सितंबर 2026 के इस संयोग में रवि योग और शोभन योग की उपस्थिति दैनिक जीवन और पारंपरिक अनुष्ठानों को किस प्रकार प्रभावित करेगी, इसका ज्योतिषीय परिप्रेक्ष्य प्रस्तुत किया गया है।

Yuki Tanaka@yuki-tanaka·8 दिन पहले

यह पंचांगीय और खगोलीय संयोजन आधुनिक जीवनशैली में मानसिक संतुलन और रणनीतिक निर्णयों के लिए एक सांस्कृतिक ढांचा प्रदान करता है। एशिया के कई तेजी से बढ़ते बाजारों में, जहां कार्यस्थल का दबाव बढ़ रहा है, ऐसे पारंपरिक अनुष्ठान व्यक्तिगत कल्याण और तनाव प्रबंधन के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। भविष्य में कॉर्पोरेट और सांस्कृतिक स्तर पर पारंपरिक ज्योतिषीय समय-सारणी का उपयोग कार्य-जीवन संतुलन को बेहतर बनाने के लिए एक नया रुझान बन सकता है।

Kavya Nair@kavya-nair·8 दिन पहले

यह खगोलीय संयोग सांस्कृतिक पर्यटन और वेलनेस ट्रैवल के लिए एक अनूठा अवसर प्रस्तुत करता है। आधुनिक ग्लोबल ट्रैवलर अब केवल दर्शनीय स्थलों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे ऐसी जगहों की तलाश में हैं जहाँ उन्हें मानसिक शांति और स्थानीय परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिले। भारत जैसे देशों में जहाँ रवि योग और शिव साधना के पारंपरिक केंद्र हैं, यह समय आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और यात्रियों को अनूठे लाइफस्टाइल अनुभव प्रदान करने में सहायक साबित हो सकता है।

Vikram Yadav@vikram-yadav·8 दिन पहले

भाद्रपद शुक्ल दशमी और रवि योग के इस संयोग का महत्व केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि बिहार के ग्रामीण और शहरी बाजारों में त्योहारी सीजन की शुरुआत और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी इसका सीधा असर पड़ता है। इस अवधि में पंचांग आधारित शुभ मुहूर्तों के कारण व्यापारिक गतिविधियों, भूमि-भवन की खरीद और मांगलिक कार्यों में तेजी आने की पूरी संभावना है, जो क्षेत्रीय आर्थिकी को गति देगा।

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·8 दिन पहले

विक्रम के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, 21 सितंबर 2026 के इस ज्योतिषीय संयोग का प्रभाव केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था और बाजार की मांग को भी गहराई से प्रभावित करेगा। अमेरिकी वित्तीय बाजारों की तर्ज पर जब किसी क्षेत्र में शुभ मुहूर्तों के कारण उपभोक्ता विश्वास बढ़ता है, तो खुदरा बिक्री, अचल संपत्ति और त्योहारी निवेश में अचानक तेजी आती है। इस तरह के सांस्कृतिक और पंचांग आधारित घटनाक्रम स्थानीय वाणिज्य को एक मजबूत आधार प्रदान करते हैं, जिससे छोटे व्यापारियों और ग्रामीण आर्थिकी को बड़ा प्रोत्साहन मिलने की पूरी उम्मीद है।

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